जबलपुर। आधुनिक युग की भागदौड़ और चकाचौंध ने मनुष्य को भौतिक साधन तो बहुत दिए हैं, लेकिन उसके मन की शांति और चेहरे की स्वाभाविक मुस्कान छीन ली है। आज व्यक्ति काम के बोझ से ज्यादा मन के बोझ से थका हुआ है। यह विचार भावनायोग प्रणेता मुनि प्रमाण सागर ने जबलपुर के डी.एन. जैन महाविद्यालय प्रांगण में आयोजित सात दिवसीय प्रवचनमाला के समापन अवसर पर व्यक्त किए।
मुस्कुराते रहने का मूल मंत्र: कर्म सिद्धांत
मुनि प्रमाण सागर ने कहा कि जो व्यक्ति कर्म सिद्धांत की गहराई को समझता है, वह जीवन की हर बुराई में भी अच्छाई ढूंढ लेता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रसन्नता और मुस्कान किसी बाहरी वस्तु पर निर्भर नहीं होनी चाहिए। जब तक आपका मन बोझिल रहेगा, तब तक चेहरे पर सच्ची रौनक नहीं आ सकती। जीवन का आनंद वही ले सकता है जो स्वयं से और ईश्वर से शिकायत करना बंद कर देता है।
> “विपत्तियाँ भी हार मान लेंगी, यदि आप हर हाल में मुस्कुराना सीख लें।”
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जीवन के 4 मूल तत्व: जिससे बदलेगा नजरिया
मुनि ने सुखी जीवन के लिए चार महत्वपूर्ण सूत्र साझा किए:
* अच्छे-बुरे में स्थिरता: परिस्थितियाँ कैसी भी हों, मन को डगमगाने न दें।
* सुख-दुख में समता: दोनों को जीवन का हिस्सा मानकर स्वीकार करें।
* लाभ-हानि में संतोष: जो प्राप्त है, उसे पर्याप्त मानकर संतोष रखें।
* मान-अपमान में सहजता: दूसरों के व्यवहार से अपनी शांति भंग न होने दें।
मुनि ने स्पष्ट किया कि दुनिया में कोई भी व्यक्ति ऐसा नहीं है जिसके सभी कार्य मन मुताबिक हुए हों। यहाँ तक कि भगवान के जीवन में भी ऐसी घटनाएँ घटीं जो अनुकूल नहीं थीं, लेकिन उन्होंने धैर्य और सहनशीलता का परिचय दिया।
आध्यात्मिकता ही संकट का समाधान
प्रवचन के दौरान उन्होंने एक बहुत ही गहरी बात कही— "जो मेरे मन को सुहाए और मुझे मिले, यह मेरे हाथ में नहीं है। लेकिन जो मुझे मिला है, वह मुझे सुहाए, यह पूरी तरह मेरे हाथ में है।" उन्होंने समझाया कि परिस्थितियाँ बाहरी होती हैं, लेकिन उन्हें अच्छा या बुरा हमारा मन बनाता है। एक आध्यात्मिक व्यक्ति विपरीत परिस्थितियों में भी विचलित नहीं होता क्योंकि उसे अपनी आत्मा और कर्म सिद्धांत पर अटूट विश्वास होता है।
जबलपुर में आगामी धार्मिक कार्यक्रमों की रूपरेखा
मुनिसंघ के प्रवक्ता अविनाश जैन और सुबोध कामरेड के अनुसार, आगामी दिनों में शहर में भक्ति का उत्साह चरम पर रहेगा:
* 22 जनवरी (गुरुवार): प्रातः 7:15 बजे मुनिसंघ का जिनालय वंदना हेतु प्रस्थान। यह यात्रा हनुमानताल, नन्हे मंदिर, चौधरी मंदिर, परिया मंदिर, जुड़ी तलैया और अन्य प्रमुख मंदिरों से होते हुए वापस डी.एन. जैन महाविद्यालय पहुँचेगी।
* 23 जनवरी: आचार्य विद्यासागर महाराज के 'संयम कीर्ति स्तंभ' का शिलान्यास।
* 25 जनवरी: पंडित रविशंकर शुक्ल स्टेडियम (राइट टाउन) में सुबह 7:30 बजे से "भावनायोग" का विशाल आयोजन। इसकी किट ही प्रवेश पत्र के रूप में मान्य होगी।
* 27 जनवरी: आचार्य विद्यासागर महाराज का द्वितीय समाधि दिवस (हिंदी तिथि अनुसार)।
* 30 जनवरी से 6 फरवरी: जबलपुर के इतिहास में पहली बार संस्कृत लिपिबद्ध 1008 श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान। इसमें 151 वेदियों पर भगवान विराजमान होंगे, जो अब तक का सबसे भव्य आयोजन होगा।
मुनि प्रमाण सागर ने संस्कारधानी के समस्त परिवारों से इस दुर्लभ अवसर का लाभ उठाने और धर्म की इस गंगा में डुबकी लगाने का आह्वान किया है।