
महू, 2 मई 2025। मध्यप्रदेश के महू क्षेत्र में स्थित कृषि उपज मंडी में शुक्रवार दोपहर उस वक्त हड़कंप मच गया जब आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) की टीम ने अचानक छापामार कार्रवाई कर दी। इस कार्रवाई में मंडी में कार्यरत लिपिक किशोर नाविक को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ा गया। जानकारी के अनुसार आरोपी किशोर नाविक ने एक स्थानीय व्यापारी से लाइसेंस नवीनीकरण के एवज में ₹30,000 की मांग की थी। यह राशि व्यापारी कृष्ण अग्रवाल के माध्यम से ली जा रही थी।
कैसे हुआ खुलासा?
सूत्रों के अनुसार व्यापारी कृष्ण अग्रवाल को जब किशोर नाविक द्वारा रिश्वत की मांग की गई, तो उन्होंने इसकी सूचना सीधे आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) को दे दी। इस सूचना के बाद EOW की टीम ने एक सटीक योजना के तहत कार्रवाई की और डोंगरगांव स्थित कृषि उपज मंडी में शुक्रवार दोपहर को छापा मारा। वहीं पर किशोर नाविक को व्यापारी से ₹30,000 लेते हुए रंगे हाथ पकड़ लिया गया।
क्या है रिश्वत की राशि में शामिल?
बताया जा रहा है कि ₹30,000 में लाइसेंस रिनिवल की वास्तविक फीस भी शामिल थी, लेकिन ईओडब्ल्यू की प्रारंभिक जांच में यह साफ हुआ कि किशोर नाविक इस राशि का एक हिस्सा निजी लाभ के लिए मांग रहा था। मंडी में पहले भी इस प्रकार की शिकायतें सामने आती रही हैं, लेकिन यह पहली बार है जब भ्रष्टाचार के मामले में कार्रवाई इस स्तर तक पहुँची है।
व्यापारी कृष्ण अग्रवाल की भूमिका भी संदिग्ध?
EOW की टीम ने किशोर नाविक को पकड़ने के बाद व्यापारी कृष्ण अग्रवाल से भी पूछताछ शुरू की है। पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि क्या यह रिश्वत सिर्फ किशोर नाविक के स्तर तक सीमित थी या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है। कृष्ण अग्रवाल से गहन पूछताछ बडगोंडा थाने में की जा रही है, ताकि पूरे मामले की तह तक जाया जा सके।
स्थानीय व्यापारियों में फैली सनसनी
इस कार्रवाई के बाद महू मंडी के व्यापारियों में हड़कंप मच गया है। एक तरफ जहां व्यापारी वर्ग ईओडब्ल्यू की तत्परता और कार्रवाई की सराहना कर रहा है, वहीं कई लोगों को डर भी सता रहा है कि कहीं उनके खिलाफ भी जांच न शुरू हो जाए। मंडी में वर्षों से काम कर रहे एक व्यापारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि “यहां घूसखोरी आम बात है। लाइसेंस से लेकर माल तुलाई तक हर काम में unofficial पैसे देने पड़ते हैं।”
लाइसेंस नवीनीकरण प्रक्रिया पर भी उठे सवाल
इस पूरे मामले ने कृषि उपज मंडी में लाइसेंस नवीनीकरण की प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। किसानों और व्यापारियों का आरोप है कि अधिकारी जानबूझकर दस्तावेजों में कमी निकालते हैं और फिर रिश्वत मांगते हैं। यदि कोई इसका विरोध करता है, तो उसका काम अटकाया जाता है या अनावश्यक रूप से जांच में उलझा दिया जाता है।
EOW की आगे की रणनीति
EOW सूत्रों के अनुसार, यह कार्रवाई सिर्फ शुरुआत है। आने वाले दिनों में मंडी के अन्य कर्मचारियों और अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जाएगी। अगर किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता पाई जाती है तो उनके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई होगी। EOW अधिकारी ने बताया, “हम सबूतों के आधार पर आगे बढ़ रहे हैं। किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।”
आरोपी से चल रही गहन पूछताछ
किशोर नाविक को बडगोंडा थाने लाया गया है, जहां उससे लगातार पूछताछ की जा रही है। EOW की टीम यह जानने का प्रयास कर रही है कि क्या वह पहले भी इसी प्रकार से रिश्वत लेता रहा है और क्या इसमें मंडी के अन्य कर्मचारी भी शामिल हैं।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी शुरू
इस घटना पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं। स्थानीय नेताओं ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए मंडी प्रशासन की जवाबदेही तय करने की मांग की है। एक जनप्रतिनिधि ने कहा, “यह महज एक व्यक्ति का मामला नहीं है, यह पूरे सिस्टम में फैले भ्रष्टाचार का प्रमाण है। ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई और निगरानी जरूरी है।”
आम जनता की उम्मीदें
इस कार्रवाई से महू और आसपास के क्षेत्र की जनता में एक उम्मीद जगी है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाई जा सकती है और यदि शिकायतें उचित माध्यम से की जाएं तो कार्रवाई भी संभव है। किसान और व्यापारी वर्ग अब मांग कर रहा है कि मंडी व्यवस्था को पारदर्शी और डिजिटल बनाया जाए, ताकि ऐसे भ्रष्टाचार के मामले रोके जा सकें।