VIDISHA BHARTI

collapse
...
Home / Religion/धर्म / 'मैं किसी से द्वेष नहीं रखूँगा...'- मुनि श्री प्रमाण सागर ने बताया- 'उत्तम क्षमा' में छिपा है हर दर्द का इलाज

'मैं किसी से द्वेष नहीं रखूँगा...'- मुनि श्री प्रमाण सागर ने बताया- 'उत्तम क्षमा' में छिपा है हर दर्द का इलाज

2025-08-27  Baby jain  957 views

ImgResizer_20250827_1247_39672

भोपाल: जैन समाज का दस दिवसीय 'दशलक्षण पर्व' शुरू हो चुका है, जो आत्मा की शुद्धि और जागृति का महापर्व माना जाता है। इस अवसर पर मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज ने 'उत्तम क्षमा' के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह सिर्फ एक धार्मिक क्रिया नहीं, बल्कि हमारे जीवन के सभी गहरे दुख और कटुता का समाधान है। उन्होंने कहा, “मैं न किसी से द्वेष रखूँगा, न अपने भीतर क्रोध पालूँगा।”

उत्तम क्षमा: क्यों है आज के समय में सबसे ज़रूरी?

मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज ने बताया कि दशलक्षण धर्मों में उत्तम क्षमा सबसे पहला और मौलिक धर्म है। आज के समाज में छोटी-छोटी बातों पर भावनाएं आहत हो जाती हैं। लोग कहते हैं, "उसने मेरी उपेक्षा की थी," या "मैं उसे कभी माफ नहीं करूँगा।" ये भावनाएं न केवल रिश्तों को खराब करती हैं, बल्कि व्यक्ति को अंदर से खोखला कर देती हैं।

उन्होंने सोशल मीडिया के दौर की बात करते हुए कहा कि जब एक पोस्ट या कमेंट से मन दुखी हो जाता है, तो क्षमा केवल एक धार्मिक शब्द नहीं, बल्कि मानसिक शांति की दवा बन जाती है।

क्षमा का मतलब: सिर्फ दूसरों को नहीं, खुद को भी मुक्त करना

मुनि श्री ने स्पष्ट किया कि क्षमा का अर्थ केवल सामने वाले को माफ़ कर देना नहीं है, बल्कि यह स्वयं को क्रोध, द्वेष और पीड़ा के बोझ से मुक्त करना है। जब हम किसी को क्षमा करते हैं, तो हम अपने मन की गाँठों को खोलते हैं। उन्होंने कहा, “क्षमा में ही महानता प्रकट होती है, क्योंकि दुर्बल व्यक्ति बदला लेता है और महान व्यक्ति क्षमा करता है।”

उत्तम क्षमा धर्म हमें सिखाता है कि:

 * अपनी गलतियों को स्वीकारें।

 * दूसरों की कमजोरियों को समझें।

 * बदले की भावना को छोड़ें और शांति से जिएं।

परिवार और समाज की कड़वाहट का समाधान

आज घर-घर में रिश्ते टूट रहे हैं। पति-पत्नी, माता-पिता, भाई-बहन और दोस्तों के बीच 'मैं क्यों झुकूँ?' और 'मैं सही हूँ' जैसी भावनाएँ दीवार खड़ी कर रही हैं। मुनि श्री ने कहा कि जो सबसे पहले क्षमा मांगता है, वह कमज़ोर नहीं, बल्कि सबसे महान होता है। क्षमा माँगना अहंकार की हार नहीं, आत्मा की विजय है।

मनोवैज्ञानिक लाभ: क्षमा से मिलता है मानसिक स्वास्थ्य

मुनि श्री ने क्षमा के वैज्ञानिक और मनोवैज्ञानिक पहलुओं पर भी बात की। उन्होंने बताया कि जो लोग माफ़ नहीं करते, उन्हें तनाव, अनिद्रा और ब्लड प्रेशर जैसी समस्याएं अधिक होती हैं। वहीं, क्षमाशील व्यक्ति अधिक शांत, केंद्रित और प्रसन्न रहते हैं। उनकी जीवन शक्ति और आत्मविश्वास भी बेहतर होता है। इस तरह, उत्तम क्षमा केवल एक आध्यात्मिक नियम नहीं, बल्कि एक प्रभावी मनोवैज्ञानिक उपचार भी है।

'भावना योग' से क्षमा का अभ्यास

मुनि श्री प्रमाण सागर ने क्षमा को जीवन का हिस्सा बनाने के लिए 'भावना योग' का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि हमें अपनी भावनाओं को दबाना नहीं, बल्कि उन्हें सही दिशा देनी चाहिए। रोज़ कुछ देर ध्यान करके हम अपने भीतर के क्रोध और पीड़ा को देख सकते हैं और क्षमा का अभ्यास कर सकते हैं। उन्होंने एक सरल मंत्र भी दिया: “मैं आत्मा हूँ, शुद्ध और शांत। किसी के भी व्यवहार से मेरी आत्मा आहत नहीं हो सकती। मैं सबके प्रति क्षमाशील हूँ।”

उपसंहार: एक जीवन शैली, एक संकल्प

दशलक्षण पर्व सिर्फ एक परंपरा नहीं है, यह हर दिन की जीवनशैली बननी चाहिए। मुनि श्री ने कहा कि जब हम खुद भी गलतियाँ करते हैं, तो हमें दूसरों को माफ़ करना क्यों मुश्किल लगता है? उन्होंने सभी से यह संकल्प लेने का आह्वान किया: “मैं न किसी से द्वेष रखूँगा, न अपने भीतर क्रोध पालूँगा। मैं क्षमा करूँगा – क्योंकि मैं आत्मा हूँ, शांत और विशाल।”

कार्यक्रम की जानकारी:

दशलक्षण पर्व के दौरान सभी कार्यक्रम प्रमाणिक ऐप के माध्यम से लाइव देखे जा सकते हैं। कार्यक्रम में भगवान का अभिषेक, नित्य नियम पूजन, मुनि श्री के प्रवचन, त्वार्थसूत्र की बाचना और शंका-समाधान के सत्र शामिल हैं।


Share:

ब्लैक टाइगर