
जबलपुर (मध्य प्रदेश) । जबलपुर पुलिस महकमे में भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं, इसका खुलासा एक बार फिर सामने आया है। लोकायुक्त टीम ने सोमवार को बड़ा एक्शन लेते हुए ओमती थाना में पदस्थ आरक्षक नितेश शुक्ला को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। यह कार्रवाई अंधेरदेव निवासी शिवम चौरसिया की शिकायत के आधार पर की गई।
शिकायतकर्ता का आरोप था कि उसकी बुलेट मोटरसाइकिल और जेवर एक लेनदेन विवाद के चलते थाने में जमा थे। इनकी वापसी और केस निपटारे के एवज में आरक्षक ने 55 हजार रुपये की रिश्वत की मांग की। लोकायुक्त टीम ने मामले की जांच कर जाल बिछाया। जैसे ही आरक्षक ने पहली किस्त के तौर पर 5 हजार रुपये लिए, टीम ने तत्काल दबिश देकर उसे गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तारी के बाद आरोपी को सर्किट हाउस ले जाया गया, जहां पीड़ित के बयान दर्ज किए गए। लोकायुक्त पुलिस ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।
🚨 थानों में ट्रांसफर पॉलिसी की उड़ रही धज्जियाँ
सूत्रों के अनुसार, जिले के कई थानों में ऐसे आरक्षक, प्रधान आरक्षक, ASI और SI वर्षों से एक ही स्थान पर पदस्थ हैं, जिनका नियमानुसार 6 साल में ट्रांसफर होना अनिवार्य है। लेकिन प्रभावशाली पकड़ और आंतरिक गठजोड़ के चलते इन्हें न तो हटाया गया और न ही स्थानांतरित किया गया है।
हाल ही में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने आदेश जारी किया था कि 6 वर्ष से अधिक समय से एक ही थाने में पदस्थ सभी कर्मियों का तत्काल ट्रांसफर किया जाए। लेकिन इस आदेश को लेकर अमल होता नहीं दिख रहा है। अब देखना होगा कि रिश्वत कांड के बाद पुलिस महकमा क्या ठोस कदम उठाता है।