
ग्यारसपुर, मध्य प्रदेश: प्रशासन और किसानों के बीच अब 'खाद' को लेकर सीधी लड़ाई शुरू हो गई है. एक तरफ जहां सरकार दावा कर रही है कि किसानों के लिए पर्याप्त खाद स्टॉक में है, वहीं दूसरी तरफ भारतीय किसान संघ (बीकेएस) ने इन दावों को 'झूठ और बेईमानी' करार दिया है. संगठन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि अगर बुवाई का सीजन शुरू होने से पहले किसानों को उचित मात्रा में खाद नहीं मिली, तो एक बड़ा और उग्र आंदोलन शुरू किया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी.
यह पूरा मामला ग्यारसपुर के खरेरा मंदिर में आयोजित भारतीय किसान संघ के तहसील स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम से गरमाया है. इस बैठक में सिर्फ स्थानीय पदाधिकारी ही नहीं, बल्कि बीकेएस के प्रदेश और संभाग स्तर के कई बड़े नेता भी शामिल हुए. उनका मकसद संगठन को मजबूत करना और किसानों की समस्याओं पर रणनीति बनाना था.
प्रशासन के दावों की खुली पोल: क्या है जमीनी हकीकत?
बैठक के मुख्य वक्ता और ग्यारसपुर तहसील अध्यक्ष राजेश यादव ने एक-एक कर प्रशासन के दावों की धज्जियां उड़ा दीं. उन्होंने सीधे तौर पर कहा कि कागजों पर खाद भले ही पर्याप्त दिख रही हो, लेकिन वास्तविकता में किसान इसके लिए दर-दर भटक रहे हैं.
राजेश यादव ने बताया, "हमारे क्षेत्र में डीएपी और यूरिया की भारी किल्लत है. किसान अभी से परेशान होने लगे हैं कि बुवाई के समय उन्हें खाद कैसे मिलेगी. अगर बुवाई से ठीक पहले खाद की कमी बनी रही, तो इसका सीधा असर फसल की पैदावार पर पड़ेगा. एक तरफ किसान पहले से ही महंगी खेती से जूझ रहे हैं, और ऊपर से यह खाद का संकट उनकी कमर तोड़ देगा."
उन्होंने आगे कहा, "प्रशासन के 'पर्याप्त खाद' के दावे हवा-हवाई हैं. ये दावे सिर्फ आंकड़ों में अच्छे लगते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत बिल्कुल उलट है. हम ये सब झूठ और बेईमानी बर्दाश्त नहीं करेंगे."
नकली खाद का खतरा: किसानों की दोहरी मार
खाद की कमी सिर्फ एक समस्या नहीं है, बल्कि यह कई और समस्याओं को भी जन्म देती है. राजेश यादव ने इसी बात पर जोर दिया. उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि जब बाजार में सरकारी दुकानों पर खाद नहीं मिलती है, तो इसका फायदा अमानक और नकली खाद बेचने वाले गिरोह उठाते हैं.
"ये लोग भोले-भाले किसानों को ठगते हैं. वे उन्हें महंगी कीमत पर घटिया और नकली खाद बेचते हैं. इस खाद से न सिर्फ फसल को नुकसान होता है, बल्कि किसान को आर्थिक तौर पर भी भारी चपत लगती है. किसान संघ की प्राथमिकता यह है कि हम अपने किसानों को इन ठगों से बचाएं," राजेश यादव ने अपनी बाइट में कहा.
संगठन की रणनीति: संघर्ष का बिगुल
इस प्रशिक्षण वर्ग का मकसद सिर्फ समस्याओं पर चर्चा करना नहीं था, बल्कि भविष्य की रणनीति तैयार करना भी था. बैठक में मौजूद प्रांत प्रचार प्रमुख राहुल धूत और अन्य पदाधिकारियों ने कार्यकर्ताओं को संगठन की कार्यप्रणाली और नीतियों से अवगत कराया.
यह साफ हो गया है कि किसान संघ अब केवल ज्ञापन देने या बैठकों तक सीमित नहीं रहेगा. उनका रुख अब आक्रामक है. किसानों के हित की रक्षा के लिए वे अब आर-पार की लड़ाई लड़ने को तैयार हैं.
राजेश यादव ने साफ कहा, "हम तब तक चुप नहीं बैठेंगे जब तक किसानों को उनकी जरूरत के हिसाब से खाद नहीं मिल जाती. हम प्रशासन को चेतावनी दे रहे हैं कि समय रहते व्यवस्था सुधार लें. अगर ऐसा नहीं होता है, तो हम एक बड़ा आंदोलन शुरू करेंगे जो पूरे प्रदेश में फैल सकता है. यह हमारे किसानों के सम्मान और उनकी आजीविका की लड़ाई है."
यह घटना सिर्फ ग्यारसपुर तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देशभर के किसानों की परेशानी को दर्शाती है. अगर समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो यह मुद्दा एक बड़े राजनीतिक और सामाजिक संघर्ष का रूप ले सकता है.
राजेश यादव, भारतीय किसान संघ, ग्यारसपुर तहसील अध्यक्ष
“प्रशासन के पर्याप्त यूरिया-डीएपी के दावे सिर्फ झूठ और बेईमानी हैं. क्षेत्र में खाद की भारी कमी है, जिससे किसान परेशान हैं. यदि बुवाई से पहले पर्याप्त खाद नहीं मिलती है, तो हम एक बड़ा आंदोलन करेंगे. हम किसानों को नकली खाद बेचने वालों से भी बचाएंगे.”