
विदिशा : क्षेत्र में चल रहा विकसित कृषि संकल्प अभियान अब अपने चरम पर है और इसके परिणाम किसानों के लिए नई उम्मीदें जगा रहे हैं। पिछले तेरह दिनों से जारी यह अभियान, किसानों को न केवल उन्नत कृषि तकनीकों से रूबरू करा रहा है, बल्कि उनके खेतों की सेहत का भी राज खोल रहा है। क्या मिट्टी की जांच से सच में किसानों की आय दोगुनी हो सकती है?
आज,हैदरगढ़ के धामनोद,मढ़िया धामनोद और खिरिया जागीर में आयोजित कृषि शिविरों में किसानों की भारी भीड़ उमड़ी। यहां किसान उत्साहपूर्वक अपनी मिट्टी के नमूने लेकर पहुंचे, वहीं जिन किसानों की मिट्टी की जांच पहले ही हो चुकी थी, उन्हें उनके मृदा स्वास्थ्य कार्ड सौंपे गए। अब तक इन गांवों में 450 किसान इस अभियान से जुड़ चुके हैं, जिसमें से 120 मिट्टी के नमूने लिए गए हैं और 50 किसानों को कार्ड वितरित किए गए हैं। यह आंकड़ा बताता है कि किसान अब अपनी ज़मीन को बेहतर तरीके से समझने के लिए उत्सुक हैं।
मिट्टी का विज्ञान, किसानों का भविष्य!
धामनोद में आयोजित शिविर में जनपद उपाध्यक्ष श्रीमती प्रीति शंकर दयाल शर्मा, जनपद सदस्य फारुख अली, सरपंच निरंजन सिंह कुशवाह सहित कई गणमान्य व्यक्तियों ने शिरकत की। कृषि वैज्ञानिक डॉ. आशा साहू ने मिट्टी के स्वास्थ्य के महत्व पर जोर देते हुए किसानों से रासायनिक उर्वरकों के बजाय गोबर खाद और वर्मी कम्पोस्ट का उपयोग करने की अपील की। क्या यह बदलाव वाकई हमारी फसलों को नया जीवन दे पाएगा?
केवीके वैज्ञानिक रंजीत सिंह राघव ने किसानों को नई कृषि तकनीकों और क्षेत्रीय समस्याओं के समाधान की जानकारी दी, जबकि पशु वैज्ञानिक डॉ. अतुल पटेरिया ने पशु रोगों से बचाव और टीकाकरण के महत्व पर प्रकाश डाला। जिला खाद्य विभाग से मिताली मेहरा ने कलेक्टर के निर्देशानुसार कार्यक्रम की निगरानी की।
नरवाई जलाने पर लगेगी लगाम? किसानों ने ली शपथ!
इन शिविरों में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है – किसानों को नरवाई न जलाने की शपथ दिलाई जा रही है। क्या यह शपथ वाकई पराली जलाने की समस्या पर लगाम लगा पाएगी, जो हर साल पर्यावरण के लिए एक बड़ी चुनौती बनती है? अब तक ग्यारसपुर विकासखंड के 18 गांवों में यह अभियान सफलतापूर्वक चलाया जा चुका है।
साथ ही, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का प्रचार करने के लिए फसल बीमा रथ और इफको कंपनी द्वारा नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी के प्रचार के लिए रथ भी गांवों का दौरा कर रहे हैं। पटवारियों द्वारा बी-1 वाचन की जिम्मेदारी भी निभाई जा रही है।
यह अभियान किसानों के जीवन में कितना बड़ा बदलाव लाएगा, यह तो आने वाला समय ही बताएगा, लेकिन एक बात तो तय है – ग्यारसपुर के किसान अब अपनी मिट्टी और भविष्य दोनों को लेकर अधिक जागरूक हो रहे हैं।