
विनोद कुशवाहा लटेरी (विदिशा)। मध्य प्रदेश की लटेरी कृषि उपज मंडी परिसर में मंडी प्रशासन की घोर लापरवाही और अव्यवस्था का बड़ा मामला सामने आया है। किसानों के लिए निर्धारित मूलभूत सुविधाओं की लगातार अनदेखी की जा रही है, जिसका खामियाजा सीधे तौर पर अन्नदाताओं को भुगतना पड़ रहा है। किसानों ने मंडी सचिव और प्रशासन पर 'जानबूझकर उपेक्षा' करने का आरोप लगाते हुए तत्काल सुधार की मांग की है।
टीन शेड पर कब्जा, धूप में खड़े होने को मजबूर किसान
मंडी में मौजूद किसानों का सबसे बड़ा गुस्सा इस बात पर है कि उनकी फसल की नीलामी के लिए बनाए गए टीन शेड पर व्यापारियों ने अवैध कब्जा कर रखा है। नीलामी शेड में व्यापारियों द्वारा बारदाना और खरीदी गई मक्का भरकर रखी गई है, जिसके चलते किसानों को अपनी उपज लेकर खुले आसमान के नीचे और तेज धूप में खड़ा होने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
किसानों का कहना है कि यह केवल सुविधा का उल्लंघन नहीं, बल्कि किसानों के सम्मान का भी हनन है। प्रशासन की ढिलाई के कारण व्यापारी मनमानी कर रहे हैं और किसानों की परेशानी बढ़ती जा रही है।
ताले में बंद विश्रामगृह, न सुरक्षा, न सफाई
मंडी परिसर में अव्यवस्था की इंतहा यह है कि किसानों के लिए बनाया गया सुलभ कॉम्प्लेक्स और किसान विश्राम गृह हमेशा ताले में बंद रहता है। अपनी उपज बेचने दूर-दराज से आए किसानों को घंटों असुविधा झेलनी पड़ती है, लेकिन उन्हें आराम करने या प्राथमिक ज़रूरतों के लिए कोई जगह नहीं मिलती।
अन्य बदहाली के प्रमुख बिंदु:
* सुरक्षा और नियंत्रण का अभाव: मंडी में सुरक्षा गार्ड की कोई व्यवस्था नहीं है। प्रवेश और निकास पर कोई नियंत्रण न होने से अराजकता बनी रहती है।
* अव्यवस्थित भीड़: उपज लेकर पहुंचने पर मंडी कर्मचारी लाइन व्यवस्था नहीं करवाते, जिससे अव्यवस्थित भीड़ और भगदड़ जैसी स्थिति बन जाती है।
* तौल में गड़बड़ी का डर: तोल कांटों की समय-समय पर जांच नहीं की जा रही है, जिससे किसानों को तौल में गड़बड़ी की आशंका बनी रहती है।
* गंदगी का अंबार: मंडी परिसर में स्वच्छता व्यवस्था पूरी तरह बदहाल है। जगह-जगह गंदगी और कचरे का अंबार लगा हुआ है।
* पानी के लिए तरस: परिसर में स्वच्छ पीने के पानी की कोई व्यवस्था नहीं है। किसान मजबूर होकर निजी खर्च पर पानी खरीदने को मजबूर हैं।
भावांतर योजना की जानकारी भी नदारद
किसानों ने इस बात पर भी रोष जताया है कि सरकार की महत्वपूर्ण भावांतर योजना की जानकारी उन्हें नहीं दी जा रही है। मंडी में बना भावांतर सुविधा केंद्र भी केवल फ्लैग लगाकर औपचारिकता निभाने के लिए खाली पड़ा है, जिससे किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
किसानों का स्पष्ट कहना है कि इन सभी गंभीर समस्याओं की ओर मंडी सचिव का ध्यान कई बार दिलाया गया, लेकिन किसी भी शिकायत पर कोई संज्ञान नहीं लिया गया, जिससे उनकी नाराजगी अब आक्रोश में बदल गई है। किसानों ने शासन-प्रशासन से तुरंत हस्तक्षेप कर मंडी की स्थितियों में सुधार लाने की मांग की है, ताकि अन्नदाता सम्मान और सुविधा के साथ अपनी उपज बेच सकें।