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किसानों को लूटने वाले 12 खाद विक्रेताओं पर गिरी गाज, कलेक्टर ने लगाया ₹60,000 का जुर्माना

2025-08-02  Editor Shubham Jain  1,063 views

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राघवेंद्र दांगी विदिशा: विदिशा जिले में किसानों को उनकी ज़रूरत से ज़्यादा यूरिया बेचकर बाज़ार में कृत्रिम कमी पैदा करने वाले 12 खाद विक्रेताओं पर बड़ी कार्रवाई की गई है। कलेक्टर Anshul Gupta के निर्देश पर, इन सभी विक्रेताओं पर कुल ₹60,000 का जुर्माना लगाया गया है, जिसे उन्हें अगले 7 दिनों के भीतर सरकारी खजाने में जमा करना होगा। यह सख्त कदम उर्वरकों की कालाबाजारी और अनियमित बिक्री को रोकने के लिए कृषि विभाग के प्रयासों का एक हिस्सा है, ताकि जिले के सभी किसानों को उनकी आवश्यकता के अनुसार यूरिया मिल सके।


जांच में हुआ बड़ा खुलासा
कृषि विभाग के जिला स्तरीय जांच दल ने जून 2025 में जिले भर में उर्वरक विक्रेताओं द्वारा की गई बिक्री का गहन विश्लेषण किया। यह जांच इसलिए की गई थी, क्योंकि पिछले कुछ समय से किसानों को यूरिया खरीदने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। जांच दल ने विभिन्न उर्वरक विक्रेताओं के बिक्री रिकॉर्ड की बारीकी से पड़ताल की, जिसमें चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। यह पाया गया कि 2 डबललॉक केंद्रों, 8 सहकारी समितियों और 2 निजी उर्वरक विक्रेताओं ने एक ही किसान को उसकी ज़मीन के लिए तय मात्रा से कहीं ज़्यादा यूरिया बेचा था।


यह कृत्य सीधे तौर पर उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 (Fertilizer Control Order 1985) और आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 (Essential Commodities Act 1955) की धारा 3 का उल्लंघन है। इन नियमों के अनुसार, उर्वरक विक्रेताओं को यह सुनिश्चित करना होता है कि वे किसी भी किसान को उसकी जरूरत से ज़्यादा मात्रा में खाद न बेचें। अत्यधिक बिक्री से न केवल बाज़ार में असंतुलन पैदा होता है, बल्कि अन्य छोटे किसानों को उनकी फसल के लिए जरूरी खाद से वंचित होना पड़ता है।
कलेक्टर की सख्ती, तुरंत हुई कार्रवाई
जांच दल की रिपोर्ट सामने आने के बाद, कलेक्टर  Anshul Gupta ने इस गंभीर मामले का संज्ञान लिया। उन्होंने तत्काल प्रभाव से इन 12 उर्वरक विक्रेताओं पर ₹5000 प्रति विक्रेता के हिसाब से कुल ₹60,000 का अर्थदंड लगाने का आदेश दिया। यह कार्रवाई यह संदेश देती है कि जिले में किसी भी तरह की कालाबाजारी और अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।


किन विक्रेताओं पर हुई कार्रवाई?
जिन 12 उर्वरक विक्रेताओं पर यह बड़ा जुर्माना लगाया गया है, उनमें ये प्रतिष्ठान शामिल हैं:
* मे. खाद वितरण केंद्र (डबललॉक) कुरवाई: यहाँ किसानों को उनकी जरूरत से अधिक यूरिया बेचा गया, जिससे अन्य किसानों को परेशानी हुई।
* मे. खाद वितरण केंद्र (डबललॉक) विदिशा: इसी तरह, विदिशा के डबललॉक केंद्र पर भी अनियमित बिक्री पाई गई।
* मे. प्राथमिक साख सहकारी समिति मर्यादित करैया: सहकारी समिति होने के बावजूद, यहाँ नियमों का उल्लंघन किया गया।
* मे. प्राथमिक साख सहकारी समिति मर्यादित दीपनाखेड़ा: यहाँ भी अधिक मात्रा में यूरिया बेचा गया।
* मे. प्राथमिक साख सहकारी समिति मर्यादित पैरवासा: जांच में इस समिति का नाम भी सामने आया।
* मे. प्राथमिक साख सहकारी समिति मर्यादित सेऊ: नियमों के उल्लंघन के चलते इस पर भी जुर्माना लगा।
* मे. प्राथमिक साख सहकारी समिति मर्यादित पीपरहूँठा: इस समिति के बिक्री रिकॉर्ड में भी अनियमितता पाई गई।
* मे. प्राथमिक साख सहकारी समिति मर्यादित कॉलिंजा: यहाँ भी एक ही किसान को अधिक मात्रा में यूरिया दिया गया।
* मे. प्राथमिक साख सहकारी समिति मर्यादित अहमदपुर: जांच दल ने पाया कि इस समिति ने भी नियमों का पालन नहीं किया।
* मे. प्राथमिक साख सहकारी समिति मर्यादित निशोबर्री: यह भी उन समितियों में शामिल है जिन पर कार्रवाई हुई है।
* मे. पीतलिया सीड्स एण्ड फर्टिलाईजर्स विदिशा: यह एक निजी विक्रेता है, जिस पर कालाबाजारी का आरोप सिद्ध हुआ।
* मे. मुकेश पंथी, नयागोला नटेरन: इस निजी विक्रेता ने भी किसानों के साथ धोखा किया।
इन सभी विक्रेताओं को यह अर्थदंड 7 दिन के भीतर शासकीय मद में जमा कर इसकी सूचना कृषि विभाग को देनी होगी। ऐसा न करने पर उनके खिलाफ और भी कड़ी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है, जिसमें उनके लाइसेंस रद्द करने तक का प्रावधान है।


किसानों को मिलेगी राहत
इस कार्रवाई से जिले के किसानों में एक सकारात्मक संदेश गया है। कृषि विभाग अब यह सुनिश्चित कर रहा है कि सभी किसानों को उनकी जरूरत के हिसाब से यूरिया उपलब्ध हो और कोई भी उर्वरक विक्रेता मनमानी न कर सके। सरकार का यह कदम साफ दिखाता है कि वह किसानों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। अधिकारियों ने यह भी बताया कि भविष्य में इस तरह की जांच जारी रहेगी, ताकि उर्वरकों की कालाबाजारी पर पूरी तरह से रोक लगाई जा सके। किसानों को भी जागरूक किया जा रहा है कि वे अपनी जरूरत से ज़्यादा खाद न खरीदें और अगर कोई विक्रेता ऐसा करने का दबाव बनाता है, तो उसकी शिकायत तुरंत कृषि विभाग में करें।


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