
वसीम कुरेशी रायसेन, मध्य प्रदेश: भारत छोड़ो आंदोलन की ऐतिहासिक वर्षगांठ पर, मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में किसानों ने सरकार के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद कर दी। संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर किसान जागृति संगठन के नेतृत्व में सैकड़ों किसानों ने खाद्य गोदाम रायसेन पर जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान उन्होंने कलेक्टर के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति को 13 सूत्रीय मांगों का एक ज्ञापन सौंपा। किसानों ने स्पष्ट संदेश दिया कि अब वो अपने अधिकारों के लिए चुप नहीं बैठेंगे।
FTA, MSP और कर्जमाफी: सरकार पर सीधा हमला
किसानों की मांगों में सबसे ऊपर था, देश और खेती को नुकसान पहुँचाने वाले विशेष व्यापार समझौतों (FTA) को तुरंत रोका जाए। उन्होंने अमेरिका द्वारा थोपे गए ऊँचे टैरिफ का भी कड़ा विरोध किया। किसानों ने सरकार से कृषि विपणन और नई सहकारी नीति को रद्द करने की माँग की।
सबसे महत्वपूर्ण मांगों में से एक थी, सभी फसलों के लिए C2+50% फॉर्मूले पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी। किसानों ने साफ कहा कि सिर्फ घोषणाएँ नहीं, बल्कि एक कानून चाहिए जो उनकी मेहनत का सही दाम सुनिश्चित कर सके। इसके अलावा, उन्होंने किसानों की समग्र कर्जमाफी की भी जोरदार माँग की, ताकि वे कर्ज के बोझ से बाहर निकल सकें।
बिजली, पेंशन और पानी: स्थानीय समस्याओं पर भी ध्यान
प्रदर्शन के दौरान, किसानों ने सिर्फ राष्ट्रीय मुद्दों पर ही नहीं, बल्कि स्थानीय समस्याओं पर भी सरकार का ध्यान खींचा। उन्होंने बिजली के निजीकरण, स्मार्ट मीटर और पुराने ट्रैक्टरों पर प्रतिबंध लगाने की नीतियों को वापस लेने की माँग की। किसानों ने अपनी पेंशन बढ़ाकर 10,000 रुपये प्रति माह करने, वनाधिकार कानून को सही ढंग से लागू करने और मछुआरा समुदाय को नदियों में मछली पकड़ने का अधिकार वापस देने की भी माँग रखी।
स्थानीय स्तर पर, किसानों ने देसी धान की खरीदी 3100 रुपये प्रति क्विंटल पर करने की अपील की। इसके साथ ही, खरीफ और रबी फसलों के लिए पर्याप्त खाद, डीएपी और यूरिया की उपलब्धता सुनिश्चित करने की भी माँग की गई। किसानों ने बेतवा नदी पर डेम बनाने और हाल ही में हुई अतिवृष्टि से प्रभावित फसलों के नुकसान का त्वरित सर्वे कराकर मुआवजा देने की भी माँग रखी।
इस प्रदर्शन में किसान जागृति संगठन के प्रमुख इरफान जाफरी के साथ-साथ जिला अध्यक्ष रंजीत यादव और बड़ी संख्या में किसान नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे। किसानों का यह प्रदर्शन एक स्पष्ट चेतावनी है कि अगर सरकार ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया, तो आने वाले समय में यह आंदोलन और भी तेज हो सकता है।