
जबलपुर, मध्य प्रदेश – "माँ" एक ऐसा शब्द जिसे सुनकर ही मन में ममता और स्नेह की भावना जाग जाती है। लेकिन जब वही माँ अपने ही बेटे और बहू के अत्याचारों का शिकार हो जाए, तो यह समाज के लिए एक बड़ा सवाल बन जाता है। जबलपुर से आई एक दिल दहला देने वाली घटना ने इंसानियत को शर्मसार कर दिया है।
विजयनगर थाना क्षेत्र की रहने वाली 65 वर्षीय वृद्धा सपना गुप्ता आज न्याय के लिए दर-दर भटक रही हैं। जनसुनवाई में एसपी और कलेक्टर के सामने अपनी आपबीती सुनाते हुए उनकी आंखें छलक पड़ीं। उनका आरोप है कि उनका इकलौता बेटा अभिषेक गुप्ता और बहू रितु गुप्ता उन्हें घर से निकाल चुके हैं। इतना ही नहीं, उन्होंने उनके गहने, वाहन और अन्य मूल्यवान वस्तुएं भी जबरन हड़प ली हैं।
24 साल पुराना घर अब पराया हो गया
सपना गुप्ता ने बताया कि वर्ष 2000 से वे अपने पति के साथ विजयनगर स्थित मकान में रह रही थीं। पति के निधन के बाद वह अकेली पड़ गईं। बेटे-बहू को अपने साथ रखने की उम्मीद में उन्होंने दोनों को अपने घर में शरण दी, लेकिन यह फैसला उनके लिए काल बन गया।
बेटा-बहू ने पहले तो उनके साथ दुर्व्यवहार शुरू किया, फिर धीरे-धीरे मारपीट और मानसिक प्रताड़ना तक बात पहुंच गई। सपना देवी ने बताया कि पूरा मकान उनके नाम पर है और सरकारी रिकॉर्डों में यह स्पष्ट रूप से दर्ज है। बावजूद इसके, अभिषेक और रितु ने घर पर कब्जा जमाने के लिए उन्हें प्रताड़ित करना शुरू कर दिया।
8 दिसंबर 2024: जीवन का सबसे काला दिन
इस दिन को सपना गुप्ता कभी नहीं भूल सकतीं। 8 दिसंबर 2024 को उनके बेटे और बहू ने मिलकर उनके साथ बर्बरता की सारी हदें पार कर दीं। उन्होंने वृद्धा को बेरहमी से पीटा, उनके गहने छीन लिए, कार और स्कूटी पर भी कब्जा कर लिया। यही नहीं, उन्हें घर से बाहर निकालते हुए धमकी दी गई कि अब ये तेरा घर नहीं है, और वापसी की कोई गुंजाइश नहीं है।
दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर
घर से निकाले जाने के बाद सपना देवी के पास न तो सिर छुपाने को ठिकाना था, न ही किसी का सहारा। जीवन यापन के लिए वे रिश्तेदारों और सामाजिक संस्थाओं की मदद की आस में भटक रही हैं। इस उम्र में जहां उन्हें बेटे के सहारे की जरूरत थी, वहीं उन्हें अपनों से ही जान का खतरा है।
उन्होंने एसपी और कलेक्टर से गुहार लगाई है कि उन्हें उनकी संपत्ति वापस दिलाई जाए और बेटे-बहू के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही, उन्होंने मुख्यमंत्री से भी न्याय की अपील की है।
संपत्ति वृद्धा के नाम, फिर भी कब्जा
शिकायत में सपना गुप्ता ने स्पष्ट किया है कि मकान सहित चल-अचल संपत्ति उनके नाम पर है। शिकायत के साथ उन्होंने संपत्ति के दस्तावेजों की प्रतियां भी सौंपी हैं। इसके बावजूद बेटे-बहू का इस प्रकार कब्जा जमाना कानून की खुलेआम धज्जियाँ उड़ाने जैसा है।
प्रशासन से न्याय की उम्मीद
वृद्धा ने अपने आवेदन में प्रशासन से अपील की है कि उन्हें न्याय दिलाया जाए। एसपी और कलेक्टर ने मामले को गंभीरता से लेने का आश्वासन दिया है। कलेक्टर कार्यालय से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि "वरिष्ठ नागरिकों के साथ दुर्व्यवहार के मामलों को प्राथमिकता के साथ देखा जाता है, और पुलिस विभाग से समन्वय कर उचित कदम उठाए जाएंगे।"
कानून क्या कहता है?
भारत में वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए "माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण और कल्याण अधिनियम, 2007" लागू है। इस कानून के तहत माता-पिता अपने बच्चों से भरण-पोषण की मांग कर सकते हैं, और यदि बच्चे उन्हें प्रताड़ित करते हैं या संपत्ति से बेदखल करते हैं, तो उन्हें कानूनी संरक्षण प्राप्त है। इस कानून के तहत संपत्ति लौटाई जा सकती है और आरोपियों पर मुकदमा चलाया जा सकता है।
समाज के लिए एक चेतावनी
यह घटना केवल एक महिला की त्रासदी नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए एक आईना है। जब बेटा-बहू जैसे नजदीकी रिश्ते ही स्वार्थ के चलते टूट जाएं, तो सामाजिक मूल्यों और संस्कारों की दुर्गति सामने आती है। ऐसी घटनाएं यह सोचने पर मजबूर करती हैं कि हम किस दिशा में जा रहे हैं?
डिजिटल मीडिया में हो रही चर्चा
यह मामला जैसे ही जनसुनवाई से बाहर आया, सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल होने लगा। आम लोग बेटे-बहू के कृत्य की कड़ी निंदा कर रहे हैं और प्रशासन से तत्काल न्यायिक हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं। ट्विटर, फेसबुक जैसे प्लेटफार्मों पर #JusticeForSapnaGupta ट्रेंड करने लगा है।