
साहिल अरोरा विदिशा: निजी स्कूलों की मनमानी और अभिभावकों की जेब पर पड़ने वाले बोझ को लेकर प्रशासन अब 'एक्शन मोड' में आ गया है। विदिशा जिले के सीबीएसई (CBSE) स्कूलों द्वारा नियमों को ताक पर रखकर चलाए जा रहे 'शिक्षा के कारोबार' पर लगाम कसने के लिए कलेक्टर अंशुल गुप्ता ने कड़े निर्देश जारी किए हैं।
कलेक्ट्रेट के बेतवा सभागार में आयोजित एक हाई-प्रोफाइल बैठक में जिले के 24 स्कूलों के संचालकों और प्राचार्यों की क्लास ली गई। इस बैठक का संदेश साफ था— “सुधर जाइए, वरना कार्रवाई के लिए तैयार रहिए।”
फीस का खेल अब पोर्टल पर होगा ‘एक्सपोज’
अक्सर देखा जाता है कि सत्र शुरू होते ही स्कूल मनमाने ढंग से फीस बढ़ा देते हैं। कलेक्टर ने आदेश दिया है कि हर विद्यालय को 31 मार्च तक निर्धारित सरकारी पोर्टल पर अपनी फीस का पूरा ब्यौरा दर्ज करना होगा। शासन के नियमों के बाहर एक रुपया भी अतिरिक्त वसूला गया, तो स्कूल प्रबंधन पर कानूनी गाज गिरना तय है। पारदर्शिता लाने के लिए अब हर खर्च का हिसाब सार्वजनिक करना अनिवार्य होगा।
ड्रेस और किताबों की 'मोनोपोली' खत्म
अभिभावकों की सबसे बड़ी शिकायत यह रहती है कि स्कूल उन्हें किसी खास दुकान से ही महंगी ड्रेस या किताबें खरीदने के लिए मजबूर करते हैं। प्रशासन ने इस पर पूर्णतः प्रतिबंध लगा दिया है।
यूनिफॉर्म: निर्धारित समय सीमा से पहले स्कूल अपनी ड्रेस नहीं बदल पाएंगे।
कमीशनखोरी: किसी विशेष वेंडर या दुकान का नाम लेने वाले स्कूलों पर कड़ी नजर रखी जाएगी।
कीमतें: पाठ्यपुस्तकों के दाम न्यायसंगत होने चाहिए। अगर किताबों पर छपे रेट और बाजार भाव में बड़ा अंतर पाया गया, तो वेंडर्स के खिलाफ भी एक्शन होगा।
स्कूल बस बनी 'यमदूत' तो खैर नहीं
विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर कलेक्टर ने आरटीओ (RTO) और यातायात पुलिस को सख्त चेकिंग के निर्देश दिए हैं। अब हर स्कूल बस और ऑटो चालक का चरित्र सत्यापन (Police Verification) अनिवार्य होगा।
वाहनों में स्पीड गवर्नर होना अनिवार्य है।
बसों के फिटनेस सर्टिफिकेट और बीमा दस्तावेज अपडेट रखने होंगे।
स्कूल परिसर में फायर अलार्म और सुरक्षा उपकरणों की मौजूदगी की रैंडम चेकिंग होगी।
महिला सुरक्षा के लिए ‘आंतरिक परिवाद समिति’
महिला कर्मचारियों और छात्राओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एक महत्वपूर्ण फैसला लिया गया है। जिन स्कूलों में 10 से अधिक महिला कर्मचारी हैं, वहां आंतरिक परिवाद समिति (Internal Complaints Committee) का गठन करना अनिवार्य होगा। यह समिति किसी भी अप्रिय घटना या शिकायत का समयबद्ध निपटारा करेगी।
सिर्फ किताबी कीड़ा नहीं, खिलाड़ी भी बनेंगे बच्चे
कलेक्टर ने निर्देश दिए कि हर स्कूल को 'स्पोर्ट्स एक्सीलेंस सेंटर' के रूप में विकसित किया जाए। बच्चों को केवल क्लासरूम तक सीमित न रखकर उन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए विशेष मार्गदर्शन और खेलकूद के बेहतर संसाधन उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है।
निष्कर्ष: विदिशा प्रशासन की इस सख्ती ने उन स्कूलों के पसीने छुड़ा दिए हैं जो शिक्षा को केवल कमाई का जरिया मानते थे। अब देखना यह है कि जमीनी स्तर पर ये निर्देश कितनी जल्दी लागू होते हैं।