
अशोकनगर, मध्य प्रदेश | 29 मई 2025
अशोकनगर जिले से कांग्रेस पार्टी के लिए एक शर्मनाक मामला सामने आया है। जिले के विधायक हरिबाबू राय के निजी सहायक (PA) मनोज नामदेव पर CHO (कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर) के ट्रांसफर के नाम पर रिश्वत लेने का गंभीर आरोप लगा है। इस मामले की खास बात यह रही कि खुद विधायक ने अपने PA को रंगेहाथ पकड़ते हुए प्रशासन को शिकायत सौंपी और रिश्वत की रकम वापस कराई।
गुना ट्रांसफर के एवज में मांगी गई थी घूस
गुना निवासी अंकित जाटव ने आरोप लगाया है कि उसकी बहन अशोकनगर जिले में CHO पद पर कार्यरत है और वह चाहता था कि उसका ट्रांसफर गुना जिले में हो जाए। इसी सिलसिले में उसकी मुलाकात कांग्रेस विधायक हरिबाबू राय के PA मनोज नामदेव से हुई। आरोप है कि मनोज ने ट्रांसफर के लिए कुल 50 हजार रुपये की रिश्वत मांगी।
पहले किस्त में दिए थे 30 हजार रुपये
कुछ दिन पहले मनोज नामदेव ने अंकित जाटव को अशोकनगर के विवेक टॉकीज के पास बुलाया और 30 हजार रुपये की पहली किस्त के रूप में रिश्वत ले ली। इसके बाद बचे हुए 20 हजार रुपये की मांग की गई। अंकित ने जब यह रकम देने की तैयारी की, तभी इस पूरे मामले की सूचना किसी ने विधायक हरिबाबू राय को दे दी।
विधायक ने खुद बुलाकर किया खुलासा
29 मई को अंकित जाटव जब बचे हुए पैसे देने आया, तो विधायक हरिबाबू राय ने उसे अपने पास बुलाया और पूछताछ शुरू की। उन्होंने स्पष्ट पूछा कि पैसे किसके लिए और क्यों दिए जा रहे हैं। युवक ने बेझिझक बताया कि ये पैसे उनके PA मनोज नामदेव के लिए हैं, जिन्होंने ट्रांसफर के बदले घूस मांगी थी।
PA ने पहले किया इनकार, फिर मानी रिश्वत
विधायक हरिबाबू राय ने बिना देर किए अपने PA मनोज को तलब किया। शुरुआत में मनोज ने पैसे लेने की बात से साफ इनकार कर दिया। लेकिन जब अंकित ने पूरा घटनाक्रम विधायक को विस्तार से बताया और साक्ष्य भी सामने रखे, तब विधायक ने सख्ती से पूछताछ की। इसके बाद मनोज नामदेव ने आखिरकार स्वीकार कर लिया कि उसने ट्रांसफर के एवज में 50 हजार रुपये मांगे थे, जिनमें से 30 हजार वह पहले ही ले चुका था।
विधायक ने दिखाई सख्ती, प्रशासन से की शिकायत
इस पूरे घटनाक्रम के बाद कांग्रेस विधायक हरिबाबू राय ने स्थिति को बेहद गंभीरता से लिया। उन्होंने तुरंत जिला कलेक्टर को लिखित शिकायत सौंपी और अपने PA के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की। विधायक ने यह भी सुनिश्चित किया कि रिश्वत में ली गई पूरी रकम पीड़ित को वापस लौटाई जाए।
कांग्रेस की छवि पर पड़ा असर
यह मामला न केवल स्थानीय प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है, बल्कि कांग्रेस पार्टी की छवि पर भी गहरा प्रभाव डालता है। एक ओर जहां पार्टी भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई की बात करती है, वहीं पार्टी के ही विधायक के दफ्तर में इस तरह की गतिविधियों से जनता का विश्वास डगमगाता है। हालांकि विधायक द्वारा खुद पहल कर इस मामले को उजागर करना एक साहसिक और सराहनीय कदम माना जा रहा है।
राजनीतिक हलकों में हलचल
इस घटना के सामने आने के बाद अशोकनगर सहित आसपास के राजनीतिक क्षेत्रों में चर्चाओं का बाजार गर्म है। कुछ लोग इसे विधायक की ईमानदारी बता रहे हैं, तो कुछ इसे पार्टी के भीतर फैले भ्रष्ट तंत्र की झलक के रूप में देख रहे हैं। वहीं प्रशासनिक हलकों में भी अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या ऐसे मामलों में केवल कार्रवाई की मांग पर्याप्त है, या भ्रष्टाचार के खिलाफ एक ठोस और पारदर्शी प्रणाली विकसित करना आवश्यक हो गया है।
सवाल भी उठे, उदाहरण भी बना
इस मामले ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जनप्रतिनिधियों को अपने आसपास के तंत्र पर कड़ी निगरानी रखने की आवश्यकता है। विधायक हरिबाबू राय का यह कदम प्रशंसनीय तो है, लेकिन यह घटना यह भी दर्शाती है कि भ्रष्टाचार किस हद तक नीचे तक फैल चुका है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या ठोस कार्रवाई करता है और क्या इस घटना के बाद अन्य जनप्रतिनिधि भी अपने दफ्तरों में चल रही गतिविधियों पर सतर्कता बढ़ाएंगे।