शिवपुरी (करैरा): राजनीति में जब 'अपने' ही 'बेगाने' हो जाएं, तो राह मुश्किल हो जाती है। कुछ ऐसा ही नजारा आज करैरा में देखने को मिला, जहां भाजपा से लड़ने निकले कांग्रेस जिलाध्यक्ष को अपने ही कार्यकर्ताओं के भारी विरोध का सामना करना पड़ा। कार्यकर्ताओं का गुस्सा इस कदर फूटा कि उन्होंने अपनी ही पार्टी के जिलाध्यक्ष को काले झंडे दिखाए और जमकर नारेबाजी की।
ज्ञापन देने पहुंचे थे जिलाध्यक्ष, झेलना पड़ा जबरदस्त विरोध
दरअसल, कांग्रेस जिलाध्यक्ष मोहित अग्रवाल आज करैरा में एक तय कार्यक्रम के तहत एसडीएम को ज्ञापन सौंपने पहुंचे थे। कांग्रेस का यह प्रदर्शन शिवपुरी जिले में लगाए जा रहे स्मार्ट मीटरों और इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों के विरोध में आयोजित किया गया था। लेकिन, जिलाध्यक्ष जैसे ही कॉलेज तिराहे पर पहुंचे, वहां पहले से मौजूद असंतुष्ट कार्यकर्ताओं ने उन्हें घेर लिया।
'मुरदाबाद' के नारों से गूंजा कॉलेज तिराहा
उम्मीद के उलट, वहां स्वागत के बजाय जिलाध्यक्ष का सामना काले झंडों से हुआ। कार्यकर्ताओं ने न केवल काले झंडे लहराए, बल्कि मोहित अग्रवाल के खिलाफ 'मुरदाबाद' के नारे भी लगाए। स्थानीय कार्यकर्ताओं के इस आक्रोश ने पूरे कार्यक्रम की रूपरेखा ही बदल दी। जो शक्ति प्रदर्शन प्रशासन के खिलाफ होना था, वह कांग्रेस की आपसी गुटबाजी और कलह की भेंट चढ़ गया।
पुलिस ने संभाला मोर्चा, जिलाध्यक्ष ने फेरा मुंह
विरोध इतना उग्र था कि मौके पर मौजूद पुलिस प्रशासन को हस्तक्षेप करना पड़ा। पुलिसकर्मियों ने घेराबंदी कर काले झंडे दिखाने वाले कार्यकर्ताओं को खदेड़ने का प्रयास किया और जिलाध्यक्ष के लिए रास्ता साफ कराया। हालांकि, अपने ही कार्यकर्ताओं के इस तीखे विरोध को देखकर मोहित अग्रवाल असहज नजर आए और वे बिना किसी से बात किए, अपना मुंह फेरकर वहां से गुजर गए।
अंदरूनी कलह आई सतह पर
करैरा की इस घटना ने साफ कर दिया है कि कांग्रेस में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। स्थानीय कार्यकर्ताओं की नाराजगी ने पार्टी की एकजुटता पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। चर्चा है कि संगठन में नियुक्तियों या स्थानीय नेताओं की अनदेखी के चलते यह गुबार फूटा है। अब देखना यह होगा कि पार्टी आलाकमान इस गुटबाजी को कैसे शांत करता है।