
तोक्यो, जापान: जापान में 2017 में नौ लोगों की बेरहमी से हत्या करने वाले कुख्यात 'ट्विटर किलर' ताकाहिरो शिराइशी को आखिरकार शुक्रवार को फांसी दे दी गई। यह जापान में पिछले तीन सालों में हुई पहली फांसी की सजा है, जिसने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था। शिराइशी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर का इस्तेमाल कर अपने शिकारों को फंसाया और फिर उन्हें अपने फ्लैट पर बुलाकर मौत के घाट उतार दिया था।
कैसे फंसाता था ताकाहिरो अपने शिकारों को?
ताकाहिरो शिराइशी, जिसे 'ट्विटर किलर' के नाम से जाना जाता है, अपनी वहशी हरकतों के लिए सोशल मीडिया का सहारा लेता था। वह ट्विटर पर ऐसे लोगों की तलाश करता था जो आत्महत्या के बारे में बातें करते थे या मानसिक रूप से परेशान दिखते थे। इन लोगों से सहानुभूति जताकर उन्हें अपने जाल में फंसाता था। एक बार जब वे उसके झांसे में आ जाते, तो वह उन्हें अपने टोक्यो के पास कनागावा स्थित जामा शहर के अपार्टमेंट में मिलने बुलाता था। यहीं पर वह उन 8 महिलाओं और 1 पुरुष का गला घोंटकर हत्या कर देता था, और फिर उनके शवों के टुकड़े-टुकड़े कर ठिकाने लगा देता था। उसकी इस दरिंदगी ने पूरे जापान को सकते में डाल दिया था।
तीन साल बाद पहली फांसी: न्याय मंत्री ने किया कड़ा रुख
शिराइशी को फांसी देने की अनुमति जापान के न्याय मंत्री केसुके सुजुकी ने दी थी। उन्होंने अपने फैसले को सही ठहराते हुए कहा कि अपराधी के 'अत्यंत स्वार्थी' उद्देश्य और समाज को पहुंचाए गए गहरे सदमे को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया। सुजुकी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में साफ किया कि जब तक ऐसे हिंसक अपराध हो रहे हैं, तब तक मृत्युदंड को खत्म करना उचित नहीं है। उन्होंने यह भी बताया कि जापान में फिलहाल 105 कैदी मौत की सजा पाए हुए हैं।
मृत्युदंड पर बहस: मानवाधिकार समूहों की चिंताएं
जापान में मृत्युदंड फांसी पर लटका कर दिया जाता है और कैदियों को फांसी दिए जाने से कुछ घंटे पहले ही इसकी सूचना दी जाती है। मानवाधिकार समूह लंबे समय से इस प्रथा की निंदा करते रहे हैं, क्योंकि उनका मानना है कि इससे मौत की सजा पाने वाले कैदियों को अत्यधिक मानसिक तनाव से गुजरना पड़ता है। हालांकि, सरकार का रुख स्पष्ट है कि गंभीर अपराधों पर लगाम लगाने के लिए मृत्युदंड आवश्यक है।
यह खबर जापान में न्याय प्रणाली और मृत्युदंड को लेकर चल रही बहस को फिर से गरमा सकती है।