
उमरिया/बिरसिंहपुर पाली। मध्य प्रदेश के उमरिया जिले के बिरसिंहपुर पाली ब्लॉक में एक बार फिर जंगली हाथियों का झुंड पहुंच गया है, जिससे पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल है। चार साल के अंतराल के बाद बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से भटककर आए इस दल ने पाली ब्लॉक के करकटी बीट में डेरा डाल दिया है और किसानों की फसलों को जमकर तबाह कर रहा है।
हाथियों के इस दल की वापसी ने ग्रामीणों की चिंता को कई गुना बढ़ा दिया है, क्योंकि यह वही क्षेत्र है जहां बीते वर्ष कोदो की फसल खाने से 10 हाथियों की दुखद मौत हो गई थी। इस नए दल में एक 10 दिन का छोटा बच्चा भी शामिल है, जिससे वन विभाग की निगरानी और भी संवेदनशील हो गई है।
किसानों की मेहनत पर फिर रहा पानी
स्थानीय किसानों के लिए यह खबर किसी आसमानी आफत से कम नहीं है। हाथियों का झुंड खेतों में घुसकर धान, मक्का और अन्य खड़ी फसलों को रौंद रहा है और उन्हें अपना निवाला बना रहा है। एक तरफ जहां किसान फसल की अच्छी पैदावार की उम्मीद लगाए बैठे थे, वहीं अब उन्हें भारी आर्थिक नुकसान का डर सता रहा है।
हाथियों के इस उत्पात की आधिकारिक पुष्टि वन विभाग के अधिकारियों ने कर दी है। विभाग ने अपने अमला सहित पूरे इलाके की सघन निगरानी शुरू कर दी है। ग्रामीणों और हाथियों के बीच टकराव को रोकने और वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विशेष टीम को मौके पर तैनात किया गया है। अधिकारियों ने ग्रामीणों से सतर्क रहने और हाथियों के नजदीक न जाने की अपील की है।
बीते वर्ष की भयावह यादें ताजा
हाथियों के दल का चार साल बाद इस संवेदनशील क्षेत्र में लौटना कई गंभीर सवाल खड़े करता है। स्थानीय लोगों को बीते वर्ष हुई 10 हाथियों की मौत की घटना आज भी याद है, जब कोदो की जहरीली फसल खा लेने से इतने हाथियों ने दम तोड़ दिया था। इस घटना के बाद वन विभाग और प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठे थे।
इस बार हाथियों के झुंड में मासूम 10 दिन के बच्चे का होना इस पूरे मामले को और भी भावनात्मक और चुनौतीपूर्ण बना देता है। वन विभाग के सामने यह बड़ी चुनौती है कि वह हाथियों को बिना कोई नुकसान पहुंचाए सुरक्षित रूप से वापस जंगल के कोर एरिया में कैसे भेजे और साथ ही किसानों की फसलों और जान-माल की रक्षा भी सुनिश्चित करे।
हाथियों के दल का बांधवगढ़ से भटककर इस रिहायशी इलाके तक पहुंचना यह दर्शाता है कि शायद उनके प्राकृतिक भोजन और आवागमन के रास्ते में कोई रुकावट आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि पर्यावास (habitat) के नुकसान और मानव-वन्यजीव संघर्ष बढ़ने के कारण ऐसी घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। प्रशासन को चाहिए कि वह हाथियों के लिए सुरक्षित गलियारे (Corridors) सुनिश्चित करे और किसानों को तत्काल उचित मुआवजा प्रदान करे, ताकि उनके घावों पर मरहम लगाया जा सके।
जल्द ही वन विभाग और स्थानीय प्रशासन को मिलकर इस समस्या का स्थायी समाधान तलाशना होगा, ताकि बिरसिंहपुर पाली के किसानों को हर साल हाथियों के आतंक से मुक्ति मिल सके।