
इंदौर। मध्यप्रदेश की आर्थिक राजधानी और स्मार्ट सिटी कहलाने वाला इंदौर एक बार फिर चौंकाने वाली खबर से सुर्खियों में है। शहर के पॉश और व्यस्ततम इलाकों में से एक सुपर कॉरिडोर ओवरब्रिज पर आधी रात को नाबालिग छात्राएं खुलेआम गांजा पीती नजर आईं। वायरल हो रहे वीडियो में ये छात्राएं बंसी और चिलम से धुआं उड़ाती दिख रही हैं, और उनके साथ कुछ युवक भी खड़े हैं जो उन्हें माचिस जलाकर "दम" मारने में मदद कर रहे हैं।
यह वीडियो न सिर्फ शहर की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है, बल्कि समाज की गिरती नैतिकता और युवाओं में बढ़ती नशे की लत का भी भयानक चित्र पेश करता है। सवाल उठ रहा है कि आखिर पुलिस और प्रशासन की जिम्मेदारी कहां है?
वीडियो वायरल होने के बाद मचा हड़कंप
सोशल मीडिया पर जैसे ही यह वीडियो सामने आया, पूरे शहर में सनसनी फैल गई। सुपर कॉरिडोर जैसे हाई-प्रोफाइल इलाके में रात के 2:30 बजे के करीब, ये युवतियां और युवक नशे की हालत में ब्रिज के डिवाइडर पर बैठे थे। जहां आमतौर पर ट्रैफिक और सुरक्षा के लिहाज से पेट्रोलिंग टीमों की मौजूदगी होनी चाहिए, वहां एक भी पुलिसकर्मी नजर नहीं आया।
वीडियो में देखा जा सकता है कि एक युवक चिलम जलाता है, और फिर बारी-बारी से लड़कियों को पकड़ाकर दम मारने देता है। लड़कियां धुएं के छल्ले बनाते हुए दिखाई दे रही हैं, जैसे कि वे इस लत की आदि हों।
छात्राएं कैसे पहुंची बाहर? जवाब चौंकाने वाला
जब पत्रकारों की टीम ने मौके पर जाकर युवकों और युवतियों से बातचीत की, तो एक छात्रा ने चौंकाने वाला खुलासा किया। उसने बताया कि वो सुखलिया इलाके के मार्थोमा स्कूल में 11वीं कक्षा की छात्रा है। रात को माता-पिता के सोने के बाद वह चुपचाप घर से निकल जाती है। युवक ने भी खुद को 11वीं का छात्र बताया।
बाकी लड़के-लड़कियों से पूछताछ में पता चला कि वे सभी 11वीं और 12वीं कक्षा के विद्यार्थी हैं। यानी यह सिर्फ एक किशोरवय का नशे की गिरफ्त में आना नहीं है, बल्कि यह एक सामाजिक संकट बनता जा रहा है।
सुपर कॉरिडोर: स्मार्ट सिटी का अंधेरा चेहरा
इंदौर का सुपर कॉरिडोर क्षेत्र आमतौर पर टेक्नोलॉजी, ट्रैफिक और विकास के मॉडल के तौर पर प्रस्तुत किया जाता है। लेकिन यह मामला इस पूरे दावे पर सवालिया निशान लगा रहा है। जहां टेक्नोलॉजी और स्मार्टनेस होनी चाहिए थी, वहां अब 'गांजा पार्टी' हो रही है।
ये घटनाएं इंदौर की छवि को देशभर में प्रभावित कर सकती हैं, खासकर तब जब इंदौर लगातार स्वच्छता में नंबर वन बनता आया है। लेकिन क्या अब समय नहीं आ गया है कि नैतिक स्वच्छता और सामाजिक सुरक्षा पर भी उतना ही ध्यान दिया जाए?
प्रशासन की नाकामी या लापरवाही?
इंदौर के पुलिस कमिश्नर संतोष सिंह ने हाल ही में रात की पेट्रोलिंग बढ़ाने के निर्देश दिए थे, लेकिन सुपर कॉरिडोर जैसे संवेदनशील इलाके में एक भी पुलिस वाहन नजर नहीं आया। न तो बीट पुलिस की कोई गतिविधि थी, और न ही आसपास कोई सुरक्षा व्यवस्था।
अगर यह वायरल वीडियो नहीं आता, तो शायद यह पूरी घटना अनदेखी ही रह जाती। सवाल है कि क्या अब प्रशासन ऐसे मामलों में संज्ञान लेकर कार्रवाई करेगा या केवल बयानबाज़ी तक सीमित रहेगा?
नशे की लत: युवाओं का भविष्य संकट में
विशेषज्ञों का कहना है कि गांजा जैसे पदार्थों का सेवन किशोर अवस्था में मानसिक विकास पर गहरा प्रभाव डालता है। एक बार आदत लग जाए तो इससे निकल पाना बेहद मुश्किल हो जाता है। जब स्कूली छात्राएं नशे में डूब जाएं, तो यह एक पीढ़ी के बर्बाद होने की शुरुआत हो सकती है।
मनोचिकित्सकों और शिक्षकों का मानना है कि इस उम्र में यदि उचित मार्गदर्शन नहीं मिले और घर-परिवार की निगरानी कमजोर हो, तो युवा गिरोह, नशा और अपराध की ओर तेजी से खिंचते हैं।
माता-पिता और स्कूल की भूमिका पर सवाल
क्या स्कूल और माता-पिता बच्चों की गतिविधियों पर पर्याप्त नजर रख रहे हैं? यदि एक छात्रा रात 2 बजे घर से निकल जाती है और गांजा पीते हुए पकड़ी जाती है, तो यह केवल उसका दोष नहीं है, बल्कि समाज, परिवार और शिक्षा तंत्र की सामूहिक असफलता है।
माता-पिता को अब डिजिटल ट्रैकिंग, संवाद और काउंसलिंग की मदद से बच्चों पर ध्यान देना होगा। स्कूलों को भी नैतिक शिक्षा और नियमित काउंसलिंग सेशन को गंभीरता से लागू करना चाहिए।
क्या होगी कार्रवाई?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या पुलिस इन युवतियों और युवकों के खिलाफ कार्रवाई करेगी? क्या नशे के इस नेटवर्क को उजागर किया जाएगा, जो संभवतः कई और किशोरों को अपनी चपेट में ले चुका है?
वायरल वीडियो ने तो सच्चाई सामने ला दी है, लेकिन अब जरूरत है प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई की ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं पर रोक लग सके।
समाज को अब जागना होगा
इंदौर की इस घटना ने सिर्फ एक शहर नहीं, बल्कि पूरे समाज को झकझोर दिया है। जब किशोर नशे के दलदल में फंसते दिखें, तो यह सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि समाजिक पतन का संकेत है। अगर हम आज भी नहीं चेते, तो आने वाली पीढ़ी को संभालना बहुत मुश्किल हो जाएगा।
प्रशासन को सख्ती दिखानी होगी, माता-पिता को सजग होना होगा, और समाज को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी।