
इंदौर। मध्यप्रदेश के तीन प्रमुख शहरों इंदौर, भोपाल और जबलपुर में आज सुबह प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक साथ बड़ी कार्रवाई करते हुए 71 करोड़ रुपये के आबकारी घोटाले से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों के ठिकानों पर छापेमारी की। इस बड़े फर्जीवाड़े में कई आबकारी अधिकारियों के नाम सामने आ रहे हैं, जिनपर फर्जी बैंक चालान बनाकर सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचाने का आरोप है।
क्या है पूरा मामला?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, आबकारी विभाग के कुछ अधिकारियों ने मिलीभगत कर फर्जी बैंक चालान तैयार किए और उन्हें सरकारी दस्तावेजों में वैध दिखाकर करोड़ों रुपए के राजस्व घोटाले को अंजाम दिया। प्रारंभिक जांच में अनुमान लगाया गया है कि घोटाले की कुल राशि करीब 71 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है।
ED को जब इस घोटाले की जानकारी मिली तो त्वरित कार्रवाई करते हुए अलग-अलग 18 टीमें गठित की गईं, जिन्होंने एक साथ तीनों शहरों में कुल 20 से ज्यादा स्थानों पर दबिश दी। इस छापेमारी के दौरान बड़ी संख्या में नकद राशि, संदिग्ध दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए गए हैं।
किन पर गिरी गाज?
सूत्रों के अनुसार, इस कार्रवाई की जद में कई वरिष्ठ आबकारी अधिकारी, कुछ सहायक आबकारी अधिकारी, क्लर्क्स और बिचौलिए शामिल हैं। कुछ नाम जो सामने आ रहे हैं, उनमें विभाग के पूर्व और वर्तमान वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। ED ने सभी आरोपियों से पूछताछ शुरू कर दी है और जल्द ही कई बड़े चेहरों के सामने आने की संभावना जताई जा रही है।
बताया जा रहा है कि आरोपी अधिकारियों ने बैंक चालानों की फर्जी प्रविष्टियां कर विभागीय रिकॉर्ड में गड़बड़ी की और वास्तविक रूप से जमा न की गई राशि को दिखाकर हेराफेरी की। इससे न केवल सरकारी खजाने को नुकसान हुआ, बल्कि सिस्टम में गहरी पैठी भ्रष्टाचार की जड़ें भी उजागर हुई हैं।
किस तरह से किया गया फर्जीवाड़ा?
ED के अधिकारियों ने प्रारंभिक जांच के आधार पर बताया कि आबकारी शुल्क वसूलने के बाद उसका चालान सरकारी खाते में जमा कराना अनिवार्य होता है। लेकिन कुछ अधिकारियों ने बैंकों के साथ सांठगांठ कर फर्जी चालान बनवाए, जिनमें दर्शाई गई रकम असल में सरकारी खाते में नहीं पहुंची। इस घोटाले में डिजिटल फॉरेंसिक जांच से यह भी पता चला है कि चालान की प्रविष्टि बैंक सर्वर में नहीं थी, केवल दस्तावेजों पर राशि अंकित थी।
ED की कार्रवाई का तरीका
सुबह 6 बजे से कार्रवाई शुरू: आज सुबह ED के अधिकारी पूरी योजना बनाकर संबंधित अधिकारियों के घरों और कार्यालयों पर पहुंचे।
डिजिटल उपकरण जब्त: लैपटॉप, मोबाइल फोन, हार्ड डिस्क और पेन ड्राइव जैसी चीजें जब्त कर उनकी फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है।
बैंक खातों की जांच: आरोपियों के व्यक्तिगत और व्यावसायिक बैंक खातों की गहन जांच की जा रही है, ताकि लेनदेन की असलियत सामने लाई जा सके।
प्रॉपर्टी पर नजर: आरोपियों की अघोषित संपत्तियों की पहचान कर उन्हें अटैच करने की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है।
राजनीतिक हलचल भी तेज
इस कार्रवाई के बाद मध्यप्रदेश की राजनीति में भी हलचल मच गई है। विपक्षी दलों ने सरकार पर भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है, वहीं सरकार ने कहा है कि दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। मुख्यमंत्री कार्यालय ने भी मामले की गंभीरता को देखते हुए अलग से जांच के आदेश दे दिए हैं।
जनता में गुस्सा
आम जनता में इस बड़े घोटाले को लेकर गहरी नाराजगी देखी जा रही है। लोग सवाल कर रहे हैं कि कैसे इतने बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा इतने लंबे समय तक बिना किसी जांच-पड़ताल के चलता रहा। सोशल मीडिया पर भी इस मामले को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की जा रही है।
आगे क्या?
प्रवर्तन निदेशालय अब इस मामले में धनशोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत केस दर्ज करने की तैयारी में है। यदि आरोप साबित होते हैं तो दोषियों पर भारी जुर्माने के साथ लंबी सजा भी हो सकती है। इसके अलावा, विभागीय स्तर पर भी कार्रवाई करते हुए कई अधिकारियों के निलंबन और बर्खास्तगी की संभावना जताई जा रही है।
इंदौर, भोपाल और जबलपुर में ED की यह रेड एक बार फिर दिखाती है कि सरकारी तंत्र में किस तरह से भ्रष्टाचार ने अपनी जड़ें फैला ली हैं। 71 करोड़ के इस घोटाले ने प्रदेशभर में हलचल मचा दी है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि ED की जांच में और कितने बड़े नाम सामने आते हैं और सरकार इस पर क्या ठोस कदम उठाती है।