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'इंडिया नहीं भारत बोलो': विदिशा की धरा से आचार्य विद्यासागर जी ने फूंका था स्वदेशी का शंखनाद - मुनि श्री संभवसागर

2025-12-20  Baby jain  498 views

ImgResizer_20251220_1720_54659विदिशा। आज जब देश में 'इंडिया' बनाम 'भारत' की चर्चा जोरों पर है, तब दिगंबर जैन मुनि श्री संभवसागर महाराज ने एक बड़ा खुलासा किया है। विदिशा में आयोजित प्रवचन सभा के दौरान मुनि श्री ने बताया कि "इंडिया नहीं, भारत कहो" का ऐतिहासिक नारा राष्ट्रसंत आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज ने वर्ष 2014 के विदिशा चातुर्मास के दौरान ही दे दिया था।

मुनि श्री ने कहा कि आचार्य श्री का चिंतन सदैव राष्ट्रहित की परिधि में घूमता था। उनका स्पष्ट मानना था कि जब तक राष्ट्र सुरक्षित है, तभी तक हमारे धर्म और परंपराएं सुरक्षित रहेंगी।

रविंद्र जैन ने विदिशा में ही रचा था मशहूर गीत

मुनि श्री ने पुरानी स्मृतियों को ताजा करते हुए बताया कि 2014 में जब एक बड़े न्यूज़ चैनल को साक्षात्कार देते हुए आचार्य श्री ने भारत नाम की महिमा बताई, तो वहां उपस्थित सुप्रसिद्ध संगीतकार और गायक रविंद्र जैन भावविभोर हो गए थे। आचार्य श्री के विचारों से प्रेरित होकर उन्होंने तत्काल विदिशा की धरती पर ही "इंडिया नहीं भारत कहो-भारत कहो भाई" गीत की रचना की और पहली बार उसका गायन भी वहीं किया।

जब आधुनिक चिकित्सा 'शीर्षासन' कर रही थी, तब आयुर्वेद ने बचाया

मुनि श्री संभवसागर जी ने आचार्य श्री के दूरदर्शी दृष्टिकोण पर प्रकाश डालते हुए बताया कि वे भारतीय चिकित्सा पद्धति (आयुर्वेद) के प्रबल समर्थक थे। उन्हें भविष्य का पूर्वाभास था, इसीलिए उन्होंने 2019 में जबलपुर में 'पूर्णायु अनुसंधान चिकित्सा केंद्र' की शुरुआत कराई।

> “कोरोना काल में जब आधुनिक चिकित्सा प्रणाली (एलोपैथी) एक तरह से 'शीर्षासन' कर रही थी और महामारी का कोई ठोस उपचार नहीं था, तब पूर्णायु की औषधियों ने हजारों लोगों की जान बचाई।”

मुनि श्री ने बताया कि इंदौर हाईकोर्ट की बेंच के जजों और स्टाफ ने भी पूर्णायु की दवाओं का लाभ लिया और स्वस्थ होने के बाद आचार्य श्री के प्रति आभार व्यक्त किया। ऑनलाइन माध्यम से घर-घर तक पहुंची इन औषधियों ने उस कठिन समय में सुरक्षा कवच का काम किया।

घर-घर की 'महाभारत' रोकने का दिया मंत्र

पारिवारिक जीवन पर चर्चा करते हुए मुनि श्री ने कहा कि आज हर घर में सास-बहू या भाइयों के बीच जो 'महाभारत' मची है, उसका कारण एक-दूसरे के प्रति ईर्ष्या है। उन्होंने अयोध्या नरेश भरत चक्रवर्ती और बाहुबली का उदाहरण देते हुए कहा कि जब तक इच्छाएं और अहंकार रहेगा, संघर्ष बना रहेगा। जैसे ही बाहुबली के मन में समता का भाव आया, उन्होंने राजपाट त्याग दिया और सुखी हो गए।

मुनि श्री ने जोर देकर कहा, “हम अपने सुख और दुख के लेखक स्वयं हैं। यदि हम कर्म सिद्धांत और अनेकांत को समझ लें, तो घर की अशांति को आसानी से सुलझाया जा सकता है।”

स्कूलों में पहुंचेगा 'स्वर्ण प्राशन' का सुरक्षा चक्र

प्रवक्ता अविनाश जैन 'विद्यावाणी' ने बताया कि प्रवचन के बाद विभिन्न अशासकीय शिक्षण संस्थाओं के प्राध्यापक और प्राचार्य मुनि श्री का आशीर्वाद लेने पहुंचे। इस दौरान संजय पांडे और उनके साथियों ने संकल्प लिया कि वे आचार्य श्री के आशीर्वाद से निर्मित 'स्वर्ण प्राशन' (बच्चों की इम्यूनिटी बढ़ाने वाली आयुर्वेदिक औषधि) को घर-घर पहुंचाने में अपना पूर्ण सहयोग देंगे।


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