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IAS संतोष वर्मा फर्जीवाड़ा कांड: आरोपियों को जमानत देने वाले जज का तबादला, पुलिस अब बेल निरस्त कराने की तैयारी में

2025-12-24  Editor Shubham Jain  284 views

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भोपाल/इंदौर: मध्य प्रदेश के बहुचर्चित आईएएस (IAS) संतोष वर्मा फर्जी आदेश मामले में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। इस हाई-प्रोफाइल मामले में आरोपियों को राहत देने वाले इंदौर जिला न्यायालय के सेशन जज प्रकाश कसेरा का अचानक तबादला कर दिया गया है। जबलपुर हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल द्वारा जारी आदेश के अनुसार, जज कसेरा को इंदौर से हटाकर सीधी जिले के रामपुर सेशन कोर्ट में पदस्थ किया गया है।

क्या है पूरा मामला? (The Background)

यह पूरा मामला साल 2021 का है, जब इंदौर की एमजी रोड थाना पुलिस ने आईएएस संतोष वर्मा के खिलाफ फर्जी न्यायिक आदेश तैयार करने के गंभीर आरोपों में केस दर्ज किया था। आरोप है कि संतोष वर्मा ने अपनी पदोन्नति और सेवा संबंधी लाभ पाने के लिए कोर्ट के नाम पर कूट रचित (Forged) दस्तावेज तैयार करवाए थे।

इस साजिश में केवल आईएएस अधिकारी ही नहीं, बल्कि न्यायिक जगत से जुड़े लोग भी शामिल पाए गए। पुलिस जांच में पूर्व में इंदौर में पदस्थ जज वीरेंद्र सिंह रावत और उनकी कोर्ट की टाइपिस्ट नीतू सिंह को भी आरोपी बनाया गया है।

जमानत बनी चर्चा का विषय

सेशन जज प्रकाश कसेरा द्वारा इस मामले में दी गई जमानत पर सवाल उठ रहे थे। दरअसल, जज कसेरा ने ही इस केस के मुख्य आरोपियों में से एक, निलंबित जज वीरेंद्र सिंह रावत को 'अग्रिम जमानत' का लाभ दिया था। इसके बाद, हाल ही में 19 दिसंबर 2025 को टाइपिस्ट नीतू सिंह को भी रिमांड अवधि के दौरान जमानत दे दी गई। इन फैसलों के तुरंत बाद हुए तबादले को लेकर अब कानूनी और प्रशासनिक गलियारों में सुगबुगाहट तेज हो गई है।

पुलिस का कड़ा रुख: जमानत निरस्त कराने की तैयारी

इंदौर पुलिस इस मामले में अब आक्रामक रुख अख्तियार कर रही है। मामले की जांच कर रहे एसीपी विनोद दीक्षित ने मीडिया को बताया कि आरोपी पुलिस जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं।

पुलिस के मुख्य तर्क:

 * असहयोग: आईएएस संतोष वर्मा और निलंबित जज वीरेंद्र सिंह रावत जांच के दौरान पूछे गए सवालों के संतोषजनक जवाब नहीं दे रहे हैं।

 * साक्ष्यों से छेड़छाड़: पुलिस को अंदेशा है कि बाहर रहकर आरोपी केस को प्रभावित कर सकते हैं।

 * जमानत रद्द करने का आवेदन: एसीपी दीक्षित के अनुसार, पुलिस जल्द ही कोर्ट में आवेदन दाखिल कर आरोपियों की जमानत निरस्त करने की मांग करेगी ताकि उन्हें हिरासत में लेकर कड़ाई से पूछताछ की जा सके।

प्रशासनिक हलचल और भविष्य की कार्रवाई

हाईकोर्ट के निर्देश पर हुए इस तबादले को एक रुटीन प्रक्रिया बताया जा रहा है, लेकिन समय को देखते हुए इसे 'सख्त संदेश' के रूप में भी देखा जा रहा है। आईएएस संतोष वर्मा से जुड़ा यह मामला मध्य प्रदेश के सबसे चर्चित जालसाजी मामलों में से एक है, क्योंकि इसमें कार्यपालिका (IAS) और न्यायपालिका (Judge) दोनों के स्तर पर मिलीभगत के आरोप लगे हैं।

अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या पुलिस कोर्ट को यह समझाने में सफल होगी कि आरोपियों का बाहर रहना जांच के लिए खतरा है? यदि जमानत निरस्त होती है, तो संतोष वर्मा और वीरेंद्र सिंह रावत की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ सकती हैं।


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