VIDISHA BHARTI

collapse
...
Home / Politics/राजनीति / हेल्थ स्कैंडल: अस्पताल के बोर्ड पर 'डॉक्टर' निकला पेंटर, मरीज की मौत के बाद खुली पोल

हेल्थ स्कैंडल: अस्पताल के बोर्ड पर 'डॉक्टर' निकला पेंटर, मरीज की मौत के बाद खुली पोल

2025-05-24  Editor Shubham Jain  662 views

ImgResizer_20250524_1615_13727

जबलपुर, मध्य प्रदेश – जबलपुर के नेपियर टाउन इलाके में स्थित मार्बल सिटी हॉस्पिटल में ऐसा चौंकाने वाला फर्जीवाड़ा सामने आया है जिसने मध्य प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। अस्पताल के बोर्ड पर दर्ज जिस डॉक्टर के नाम और तस्वीर को देखकर मरीज इलाज के लिए आते थे, वो दरअसल कोई डॉक्टर नहीं बल्कि एक पेंटर निकला।

इस हैरान कर देने वाले मामले की परतें तब खुलीं जब एक रेल अधिकारी ने अपनी मां की मौत के बाद इलाज करने वाले ‘डॉक्टर’ की पड़ताल खुद शुरू की। जांच के दौरान जो सामने आया, उसने न सिर्फ परिवार को झकझोर दिया, बल्कि पूरे शहर को सकते में डाल दिया।

कैसे हुआ फर्जीवाड़े का खुलासा?

यह सनसनीखेज मामला सितंबर 2024 में शुरू हुआ, जब पश्चिम मध्य रेलवे में कार्यरत अधिकारी मनोज कुमार महावर ने अपनी 70 वर्षीय मां शांति देवी महावर को तबीयत बिगड़ने पर जबलपुर के मार्बल सिटी हॉस्पिटल में भर्ती कराया। अस्पताल में इलाज के दौरान बुजुर्ग महिला की मौत हो गई।

इलाज के दस्तावेजों में एक नाम लगातार सामने आया — डॉ. बृजराज उइके। बताया गया कि इलाज उसी की निगरानी में हुआ और उसी के निर्देश पर मरीज को वेंटिलेटर पर भी रखा गया।

मां की मौत से सदमे में आए मनोज महावर ने जब डॉक्टरी प्रक्रिया और रिपोर्ट्स की गहन जांच की तो कई बातें संदिग्ध लगीं। जब उन्होंने अस्पताल से डॉक्टर बृजराज उइके से मिलने की इच्छा जताई, तो अस्पताल प्रशासन ने गोलमोल जवाब देना शुरू कर दिया।

"डॉक्टर" से मिलने पहुंचे तो सामने आया सच

अस्पताल प्रशासन के रवैये से असंतुष्ट मनोज कुमार महावर ने खुद अपने स्तर पर डॉक्टर बृजराज उइके की खोज शुरू की। उन्होंने अस्पताल के नर्सिंग स्टाफ, सुरक्षा कर्मियों और अन्य कर्मचारियों से पूछताछ की। आखिरकार, जो "डॉ. बृजराज उइके" के नाम से सामने आया, उसने बताया कि वह पेशे से डॉक्टर नहीं, बल्कि एक पेंटर है।

इतना ही नहीं, अस्पताल के बोर्ड पर जिस व्यक्ति की तस्वीर लगी है, वह भी उस पेंटर का दोस्त निकला — नाम है सत्येंद्र, जो कि स्कूल का पुराना साथी है। यानी न तो नाम असली डॉक्टर का था और न ही तस्वीर।

एफआईआर दर्ज, पुलिस जांच में जुटी

इस खुलासे के बाद मनोज महावर ने तत्काल ओमती थाने में एफआईआर दर्ज कराई। पुलिस ने धोखाधड़ी, जालसाजी और फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल जैसी धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

ओमती पुलिस थाने के प्रभारी के अनुसार, यह एक गंभीर आपराधिक मामला है क्योंकि इसमें सीधे तौर पर मरीज की जान के साथ खिलवाड़ किया गया है। शुरुआती जांच में पुष्टि हुई है कि अस्पताल प्रशासन ने पंजीकृत डॉक्टर की आड़ में झूठी पहचान का इस्तेमाल कर मरीजों का इलाज कराया।

स्वास्थ्य विभाग की भूमिका भी संदिग्ध

इस घटना ने राज्य के स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठा दिए हैं। यह जांच का विषय है कि आखिर कैसे एक फर्जी डॉक्टर अस्पताल में सक्रिय रहा और स्वास्थ्य विभाग को इसकी भनक तक नहीं लगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला सिर्फ एक अस्पताल तक सीमित नहीं है। दमोह के मिशन अस्पताल में सात लोगों की मौत और अब जबलपुर का यह मामला संकेत देते हैं कि मध्य प्रदेश में निजी अस्पतालों में बगैर किसी नियंत्रण के गोरखधंधा चल रहा है।

सवाल जो उठ रहे हैं:

क्या अस्पताल में और भी ऐसे फर्जी डॉक्टर कार्यरत हैं?

क्या यह एक संगठित रैकेट का हिस्सा है?

स्वास्थ्य विभाग की निरीक्षण प्रक्रिया इतनी कमजोर क्यों है?

क्या अब अन्य अस्पतालों की भी जांच होगी?


परिजनों की मांग: न्याय और मुआवजा

मनोज महावर और उनके परिवार का कहना है कि न सिर्फ उन्हें इंसाफ चाहिए बल्कि ऐसे अस्पतालों की लाइसेंसिंग प्रक्रिया में भी पारदर्शिता लाई जानी चाहिए। उनका कहना है, “हमने अपनी मां को भरोसे के साथ अस्पताल में भर्ती कराया, लेकिन वहां मौत का सौदा हुआ।”

क्या कहता है कानून?

भारतीय दंड संहिता के तहत धारा 420 (धोखाधड़ी), 467, 468, 471 (फर्जी दस्तावेज बनाना और इस्तेमाल करना) और 304A (लापरवाही से मृत्यु) के तहत कार्रवाई की जा सकती है। अगर आरोप सिद्ध हुए, तो दोषियों को कई वर्षों की जेल हो सकती है।

 जांच से साफ-सफाई जरूरी

जबलपुर की यह घटना स्वास्थ्य सेवा में चल रहे भ्रष्टाचार और लापरवाही की जीती-जागती मिसाल बन चुकी है। इस केस ने साफ कर दिया है कि नियमों की धज्जियां उड़ाकर सिर्फ मुनाफे के लिए कैसे मरीजों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।

अब देखना यह है कि क्या पुलिस और स्वास्थ्य विभाग इस मामले में त्वरित और कड़ी कार्रवाई करते हैं या फिर यह भी दमोह जैसे मामलों की तरह सिर्फ खबरों तक ही सीमित रह जाएगा।


Share:

ब्लैक टाइगर