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ग्यारसपुर के किस गांव में बिना अनुमति चल रहा अवैध उत्खनन, खेत में चल रही पोकलेन मशीन ने मचाया हड़कंप

2025-05-22   826 views

ImgResizer_20250522_2003_46611 ग्यारसपुर, विदिशा। मध्य प्रदेश के ग्यारसपुर जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत मड़िया धामनोद में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां सिंदुरिया रोड के किनारे एक किसान के खेत में अवैध रूप से पोकलेन मशीन से उत्खनन का कार्य किया जा रहा है। इस मामले ने स्थानीय प्रशासन से लेकर ग्रामीणों तक में हलचल मचा दी है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, खेत में तालाब निर्माण का कार्य चल रहा है, लेकिन इसकी न तो किसी प्रकार की आधिकारिक अनुमति ली गई है और न ही संबंधित विभाग से कोई स्वीकृति प्राप्त की गई है। सूत्रों की मानें तो यह कार्य महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के अंतर्गत दर्शाया जा रहा है, जबकि जमीन पर कार्य मशीनों से कराया जा रहा है – जो कि पूरी तरह नियम विरुद्ध है।

मनरेगा में मजदूरों के बजाय मशीनों का इस्तेमाल – नियमों की खुली उड़ाई जा रही धज्जियाँ

मनरेगा एक ऐसी सरकारी योजना है जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में मजदूरों को सौ दिनों का रोजगार देना है। इस योजना के अंतर्गत जितने भी निर्माण कार्य होते हैं, वे श्रमिकों के माध्यम से कराना अनिवार्य होता है। लेकिन ग्राम पंचायत मड़िया धामनोद में स्थिति पूरी तरह इसके उलट दिखाई दे रही है। खेत में पोकलेन मशीन धड़ल्ले से मिट्टी की खुदाई कर रही है, जबकि दर्जनों ग्रामीण मजदूरी के लिए भटक रहे हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि इस तरह से मशीनों से काम कराना न केवल मनरेगा के मूल उद्देश्यों के खिलाफ है, बल्कि यह ग्रामीण गरीब मजदूरों के साथ सीधा अन्याय है। एक तरफ सरकार रोजगार देने के लिए योजना चला रही है, दूसरी ओर जिम्मेदार अधिकारी मशीनों से काम करवा कर योजना का मज़ाक उड़ा रहे हैं।

पंचायत सचिव ने झाड़ा पल्ला, किसान पर फोड़ा ठीकरा

जब इस मामले में ग्राम पंचायत सचिव गोविंद ठाकुर से संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि “यह कार्य पंचायत के माध्यम से नहीं कराया जा रहा है, बल्कि किसान खुद ही कोपरा (मिट्टी/मुरम) निकलवा कर सड़क पर डलवा रहा है।” लेकिन सवाल यह उठता है कि यदि यह कार्य निजी है, तो भी बिना अनुमति इतनी बड़ी मशीन का प्रयोग कैसे हो सकता है? क्या प्रशासन की नजर से यह बचा हुआ था या फिर जानबूझकर अनदेखा किया गया?

नायब तहसीलदार ने दिए जांच के आदेश

इस संदर्भ में जब नायब तहसीलदार राजेंद्र सेन से बात की गई तो उन्होंने स्पष्ट कहा कि “यदि क्षेत्र में कहीं भी बिना अनुमति के पोकलेन मशीन से उत्खनन किया जा रहा है, तो उसकी जांच कर कार्रवाई की जाएगी।” उनका बयान दर्शाता है कि प्रशासन अब इस अवैध गतिविधि को गंभीरता से ले रहा है।

ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से किया जा रहा कोपरे का परिवहन

उत्खनन के दौरान कोपरे को ट्रैक्टर-ट्रॉली से परिवहन किया जा रहा है। यह भी स्पष्ट करता है कि कार्य सिर्फ एक किसान की निजी ज़रूरत तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें किसी बड़े उद्देश्य या लाभ का संकेत है। यदि कार्य पंचायत के माध्यम से नहीं हो रहा, तो यह और भी गंभीर मामला बन जाता है क्योंकि तब यह खुलेआम सरकारी जमीन, मशीनरी और संसाधनों के दुरुपयोग की श्रेणी में आता है।

ग्रामीणों में आक्रोश, मांग की निष्पक्ष जांच की

ग्रामवासियों में इस घटना को लेकर रोष व्याप्त है। उनका कहना है कि स्थानीय प्रशासन और पंचायत की मिलीभगत से यह अवैध कार्य किया जा रहा है। लोगों ने इस बात की मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए। ग्रामीणों ने यह भी कहा कि यदि कार्रवाई नहीं हुई तो वे जन आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे।

क्या यह माफिया से जुड़ा मामला है?

इस घटना के पीछे कहीं खनन माफिया की भूमिका तो नहीं, यह सवाल भी अब उठने लगा है। ग्रामीण क्षेत्रों में मशीनों से बिना अनुमति खुदाई करना और कोपरा जैसी सामग्रियों का व्यावसायिक परिवहन करना, सीधे तौर पर खनन माफिया और भ्रष्ट तंत्र की मिलीभगत को दर्शाता है।

कब जागेगा प्रशासन?

ग्राम पंचायत मड़िया धामनोद में खेत में चल रही यह पोकलेन मशीन सिर्फ मिट्टी नहीं खोद रही, बल्कि यह हमारे सिस्टम में छिपे भ्रष्टाचार की परतों को भी उजागर कर रही है। जरूरत है कि इस तरह के मामलों पर प्रशासन त्वरित संज्ञान ले और दोषियों को चिन्हित कर कानूनी कार्रवाई करे, ताकि भविष्य में सरकारी योजनाओं के साथ खिलवाड़ न हो और ग्रामीणों को उनका हक मिल सके।


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