
प्रतापगढ़/चंदौली: उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक गलियारों में इस वक्त एक ऐसी खबर चर्चा का विषय बनी हुई है, जिसने रिश्तों और मर्यादा की तमाम सीमाओं को लांघ दिया है। यह कहानी किसी फिल्मी ड्रामे से कम नहीं है, जहां आमने-सामने कोई आम इंसान नहीं, बल्कि कानून की रक्षा की शपथ लेने वाले दो डिप्टी कलेक्टर (SDM) हैं। चंदौली में तैनात SDM दिव्या ओझा और SDM अनुपम मिश्रा के बीच का घरेलू विवाद अब थाने की चौखट पार कर FIR तक पहुंच गया है।
करोड़ों का दहेज और 'अश्लील वीडियो' का खेल
SDM दिव्या ओझा के पिता ने प्रतापगढ़ के महिला थाने में दामाद अनुपम मिश्रा के खिलाफ बेहद गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया है। आरोपों की फेहरिस्त इतनी लंबी और चौंकाने वाली है कि सुनकर हर कोई हैरान है। शिकायत के मुताबिक, दिव्या के ससुराल पक्ष की ओर से शादी के बाद से ही करोड़ों रुपये की मांग की जा रही थी।
आरोप है कि शुरुआत 20 करोड़ रुपये की मांग से हुई, जो बाद में 'सेटलमेंट' के नाम पर 5 करोड़ तक आ गई। दिव्या के पिता का दावा है कि उन्होंने अब तक 10 लाख रुपये बैंक ट्रांसफर, 28 लाख रुपये नकद और करीब 40 लाख रुपये के जेवरात दामाद को दिए हैं, लेकिन लालच की आग शांत नहीं हुई।
FIR में 'नपुंसकता' और ब्लैकमेलिंग का जिक्र
इस केस में सबसे सनसनीखेज मोड़ तब आया जब FIR में अनुपम मिश्रा पर "जन्मजात नपुंसक" होने का आरोप लगाया गया। दिव्या ओझा की ओर से कहा गया है कि उनके पति ने अपनी इस कमी को छिपाने के लिए उनके साथ न केवल मारपीट की, बल्कि अश्लील वीडियो बनाकर उन्हें ब्लैकमेल भी किया। जान से मारने की कोशिश और मानसिक प्रताड़ना के आरोपों ने इस मामले को और भी संगीन बना दिया है।
सासू मां ने भी खोला मोर्चा: ‘बहू ने मुझे पीटा’
यह लड़ाई केवल एक तरफा नहीं है। जहां दिव्या ओझा ने प्रतापगढ़ में मोर्चा खोला है, वहीं अनुपम मिश्रा की मां ने चंदौली के अलीनगर थाने में तहरीर दी है। अनुपम की मां का आरोप है कि उनकी बहू दिव्या और उनके मायके वालों ने उनके साथ मारपीट की और बदसलूकी की है।
> शादी का इतिहास: बता दें कि दिव्या ओझा और अनुपम मिश्रा की शादी साल 2020 में हुई थी। अनुपम मिश्रा मूल रूप से प्रयागराज के रहने वाले हैं। शादी के चार साल बाद यह रिश्ता अब कानूनी लड़ाई के उस मोड़ पर है, जहां से वापसी नामुमकिन नजर आ रही है।
प्रशासनिक महकमे में हड़कंप
दो एसडीएम स्तर के अधिकारियों के बीच इस तरह की कानूनी जंग ने शासन-प्रशासन की छवि पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। एक तरफ जहां सरकार महिला सशक्तिकरण और दहेज उन्मूलन की बात करती है, वहीं तंत्र का हिस्सा रहे दो बड़े अधिकारियों के बीच दहेज और प्रताड़ना का यह मामला चर्चा का केंद्र बना हुआ है। फिलहाल पुलिस दोनों पक्षों के आरोपों की जांच कर रही है।