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'स्वच्छ भारत' की पोल खुली: विदिशा के स्कूल में बच्चे भूखे, कक्षाएं में कचरा

2025-08-14  Editor Shubham Jain  480 views

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विदिशा, मध्य प्रदेश: जिस 'स्वच्छ भारत अभियान' को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देशव्यापी आंदोलन बना चुके हैं, उसी अभियान की धज्जियां मध्य प्रदेश के विदिशा जिले में सरेआम उड़ाई जा रही हैं। विदिशा के ग्यारसपुर विकासखंड स्थित शासकीय एकीकृत माध्यमिक शाला लखुली का हाल देखकर कोई भी हैरान रह जाएगा। यहां बच्चों को न तो पेट भर खाना मिल रहा है और न ही उन्हें साफ-सुथरे माहौल में पढ़ने को मिल रहा है। यह स्थिति सरकारी योजनाओं और जिम्मेदार अधिकारियों की घोर लापरवाही को उजागर करती है।

मिड-डे-मील गायब, भूखे पेट रहे मासूम

स्कूल में मिड-डे-मील बच्चों की पढ़ाई के साथ-साथ उनके पोषण के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है। लेकिन लखुली के इस स्कूल में बच्चों को आज मिड-डे-मील नहीं मिला। जब इस बारे में शिक्षकों से पूछा गया तो एक चौंकाने वाला जवाब सामने आया। शिक्षक अशोक यादव ने बताया कि आज रसोइया छुट्टी पर था, जिसकी वजह से खाना नहीं बन पाया। यह जवाब उन सरकारी नियमों का सीधा उल्लंघन है, जो कहते हैं कि किसी भी स्थिति में बच्चों को भोजन से वंचित नहीं किया जा सकता। क्या एक दिन रसोइया न होने पर दर्जनों बच्चों को भूखे रखना जायज है? यह सवाल स्कूल प्रबंधन की असंवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

कक्षाओं में गंदगी का अंबार, 'स्वच्छता' हुई शर्मसार

स्कूल की कक्षाएं और परिसर की हालत तो और भी ज्यादा खराब थी। हर तरफ कचरा बिखरा पड़ा था, जो देखकर लगता है कि यहां महीनों से सफाई नहीं हुई है। ऐसी गंदी कक्षाओं में बच्चों का बैठना न सिर्फ उनके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, बल्कि यह सीखने के माहौल को भी बुरी तरह से प्रभावित करता है। सरकार 'स्वच्छ भारत' और 'स्वच्छ विद्यालय' जैसे अभियानों पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका कोई असर दिखाई नहीं देता। यह स्थिति सरकारी तंत्र की लचर व्यवस्था और अधिकारियों की लापरवाही की जीती-जागती मिसाल है।

शाला प्रभारी नदारद, कौन लेगा जिम्मेदारी?

जब इस मामले पर शाला प्रभारी से बात करने की कोशिश की गई तो वह स्कूल से नदारद मिले। प्रभारी का इस महत्वपूर्ण समय पर अनुपस्थित होना, इस बात का प्रमाण है कि स्कूल के प्रबंधन में कितनी घोर लापरवाही बरती जा रही है। यह स्थिति न केवल सरकारी योजनाओं को कमजोर करती है, बल्कि बच्चों के भविष्य के साथ भी खिलवाड़ है। आखिर इन मासूम बच्चों की पढ़ाई और सेहत की जिम्मेदारी कौन लेगा? क्या इस लापरवाही के लिए किसी पर कार्रवाई होगी या फिर यह मामला भी ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा?

इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि बच्चों को उनका हक मिले और सरकारी योजनाएं सिर्फ कागजों तक सीमित न रहें।


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