
ग्वालियर, मध्य प्रदेश: केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के दशहरा पूजन कार्यक्रम में गुरुवार को उस समय तनाव की स्थिति बन गई जब उनके निजी सुरक्षाकर्मी और सिंधिया समर्थक भाजपा पार्षद मोहित जाट के बीच तीखी बहस हो गई। यह पूरा मामला ग्वालियर के मांडरे की माता मंदिर स्थित सिंधिया राजवंश के पारंपरिक दशहरा पूजन समारोह के प्रवेश द्वार पर हुआ।
सुरक्षा के घेरे ने खड़ा किया विवाद
घटना उस वक्त हुई जब केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया अपने पैतृक दशहरा पूजन के लिए पहुंचे थे। उनके काफिले में शामिल चल रहे पार्षद मोहित जाट जब कार्यक्रम स्थल के अंदर जाने लगे, तो कथित तौर पर सिंधिया के निजी सुरक्षाकर्मी ने उन्हें सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए रोक दिया।
पार्षद मोहित जाट को यह रोक नागवार गुजरी। खुद को सिंधिया समर्थक और स्थानीय जनप्रतिनिधि बताते हुए उन्होंने सुरक्षाकर्मी पर रौब गांठने की कोशिश की, लेकिन सुरक्षाकर्मी अपने ड्यूटी पर अटल रहा।
भड़के पार्षद ने दी 'देख लेने' की धमकी?
सुरक्षाकर्मी द्वारा रोके जाने पर पार्षद मोहित जाट तुरंत भड़क उठे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, वह गुस्से में लाल हो गए और उन्होंने सुरक्षाकर्मी के साथ तीखी बहस शुरू कर दी। यह बहस जल्द ही तनातनी में बदल गई, और पार्षद ने कथित तौर पर अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया।
उनके इस व्यवहार से कार्यक्रम स्थल पर कुछ देर के लिए अराजकता का माहौल बन गया। दोनों पक्षों के बीच चल रही तू-तू, मैं-मैं ने माहौल को तनावपूर्ण कर दिया। एक तरफ केंद्रीय मंत्री का निजी सुरक्षा स्टाफ था, जो अपनी जिम्मेदारी निभा रहा था, दूसरी तरफ सत्ताधारी पार्टी का एक स्थानीय पार्षद था जो खुद को रोके जाने से अपमानित महसूस कर रहा था।
पुलिस हस्तक्षेप से शांत हुआ मामला
स्थिति की गंभीरता को समझते हुए मौके पर मौजूद पुलिस जवानों ने तुरंत हस्तक्षेप किया। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए दोनों पक्षों को अलग किया और बीच-बचाव कर मामले को शांत कराया। पुलिस की समय पर कार्रवाई के चलते एक बड़ा विवाद होने से बच गया, जिससे ज्योतिरादित्य सिंधिया के पारंपरिक कार्यक्रम की गरिमा बनी रही।
यह घटना दर्शाती है कि वीआईपी मूवमेंट के दौरान सुरक्षा व्यवस्था कितनी संवेदनशील हो जाती है और कैसे छोटे मनमुटाव भी बड़े टकराव का रूप ले सकते हैं। एक जनप्रतिनिधि और एक सुरक्षाकर्मी के बीच हुई यह बहस सत्ता और सुरक्षा की सीमाओं पर भी सवाल खड़े करती है।
फिलहाल, केंद्रीय मंत्री का कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो गया, लेकिन इस घटना ने स्थानीय राजनीति में एक नई सुगबुगाहट पैदा कर दी है। देखना होगा कि इस मामले पर पार्टी या सिंधिया खेमे की ओर से आगे क्या प्रतिक्रिया आती है।