
सांची। ऐतिहासिक और पावन नगरी सांची ने रविवार को एक ऐसा जनसैलाब देखा, जिसकी भव्यता वर्षों तक याद रखी जाएगी। सांची महोत्सव में उमड़ी भीड़ ने इस नगरी के हर रास्ते, हर मोड़ और चौक को श्रद्धा, उल्लास और संस्कृति की तरंगों से भर दिया। अवकाश का दिन होने और टिकट मुक्त प्रवेश की घोषणा ने पर्यटकों की भीड़ को रिकॉर्ड स्तर पर पहुँचा दिया। देश-विदेश से आए आगंतुकों ने विश्व प्रसिद्ध स्तूप और मेले की भव्यता का भरपूर आनंद लिया।
भोर होते ही सांची में उत्सव की ध्वनि गूंज उठी। ठीक प्रातः 7 बजे महाबोधि धर्मशाला से निकली पारंपरिक पालकी यात्रा ने माहौल को और पावन बना दिया। ढोल-नगाड़ों, भक्तिमय धुनों और नृत्य की लय के साथ जब यह पालकी स्तूप परिसर पहुँची, तो हर कोई इस ऐतिहासिक पल को अपने कैमरे में कैद करने को आतुर दिखा।
मानवता का संगम: 5000 लोगों को निशुल्क भोजन
उत्सव के केंद्र में मानवता का एक अनुपम उदाहरण भी सामने आया। संत रविदास समिति ने गरीब और बेसहारा लोगों के लिए निशुल्क भोजन की व्यवस्था की। लगभग 5000 लोगों को प्रेमपूर्वक भोजन कराया गया। नगर परिषद अध्यक्ष पप्पू रेवाराम और समिति के सदस्यों की उपस्थिति में हुए इस सेवा कार्य ने महोत्सव को और भी सार्थक बना दिया। भोजन पंडाल में उमड़ी भीड़ और संतुष्ट लोगों की मुस्कानें सेवा भाव की सफलता को स्वयं बयां कर रही थीं।
शाम ढलते ही महोत्सव का मंच रोशनियों से जगमगा उठा। शुरू हुए सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने लोक नृत्यों और संगीत की तरंगों से दर्शकों को देर रात तक मंत्रमुग्ध रखा। चारों दिशाओं से उमड़ी भीड़ के कारण नगर की सड़कों पर देर तक जाम की स्थिति बनी रही, लेकिन इस अव्यवस्था में भी लोग उत्सव की ऊर्जा और आनंद से भरे दिखाई दिए। सांची महोत्सव ने सिद्ध कर दिया कि यह नगरी सिर्फ इतिहास नहीं, बल्कि परंपरा, संस्कृति और आस्था का जीवंत संगम है।