
सांची: विश्व प्रसिद्ध बौद्ध स्तूपों की नगरी सांची इन दिनों पूरी तरह से राममय हो चुकी है। नगर में आयोजित हो रहे भव्य रामलीला महोत्सव के दौरान वह क्षण भी आया, जिसका हर श्रद्धालु को बेसब्री से इंतजार था। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की भव्य और अलौकिक बारात जब सांची की गलियों में निकली, तो ऐसा लगा मानो त्रेतायुग की अयोध्या साक्षात धरती पर उतर आई हो।
भक्ति और भव्यता का अद्भुत संगम
रामलीला मैदान से शुरू हुई इस दिव्य बारात का नजारा देखते ही बनता था। गगनभेदी जयघोष, मधुर बैंड-बाजे और आसमान को छूती रंग-बिरंगी आतिशबाजी ने उत्सव को ऐतिहासिक बना दिया। बारात में शामिल भगवान राम के स्वरूप की एक झलक पाने के लिए सड़कों के दोनों ओर श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। फूलों की वर्षा और "जय श्री राम" के नारों से पूरा वातावरण गुंजायमान हो उठा।
नगर भ्रमण: जहां से गुजरी बारात, वहां हुई पुष्पवर्षा
यह ऐतिहासिक बारात रामलीला मैदान से प्रारंभ होकर नगर के मुख्य मार्गों से गुजरी। बस स्टैंड और कानाखेड़ा स्थित हनुमान मंदिर तक का सफर भक्ति की पराकाष्ठा का गवाह बना। बारात जब कानाखेड़ा के अंतिम छोर तक पहुंची, तो वहां भक्तों ने आरती और पूजन कर प्रभु का अभिनंदन किया। इसके पश्चात बारात पुनः नगर भ्रमण करते हुए पूरे वैभव के साथ वापस रामलीला मैदान पहुंची।
जगह-जगह हुआ पलक-पावड़े बिछाकर स्वागत
सांची नगर परिषद कार्यालय के समक्ष नगर परिषद अध्यक्ष पप्पू रेवाराम, उपाध्यक्ष राजेंद्र राजपूत और सभी पार्षदों ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर बारात का स्वागत किया। बस स्टैंड पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं सहित स्थानीय व्यापारियों और आम नागरिकों ने पुष्पवर्षा कर बारात की अगवानी की। बारात के स्वागत में जगह-जगह तोरण द्वार सजाए गए थे और प्रसाद वितरण का सिलसिला भी चलता रहा।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने मोहा मन
बारात के दौरान पारंपरिक वेशभूषा में सजे युवाओं ने अपनी कलात्मक प्रस्तुतियों से सबका मन मोह लिया। झांकियों के माध्यम से भारतीय संस्कृति की अनुपम छटा बिखेरी गई। रामलीला मैदान पर जब बारात पहुंची, तो वहां विवाह का भावपूर्ण मंचन किया गया। कलाकारों की जीवंत प्रस्तुति ने दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया और देर रात तक लोग भक्ति रस में डूबे रहे।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम
रामलीला समिति के तत्वावधान में आयोजित इस विशाल कार्यक्रम को सुव्यवस्थित बनाए रखने के लिए स्थानीय प्रशासन ने मुस्तैदी दिखाई। बड़ी संख्या में पुलिस बल बारात के साथ तैनात रहा, जिससे यातायात व्यवस्था सुचारू बनी रही और श्रद्धालुओं को किसी असुविधा का सामना नहीं करना पड़ा।
आस्था और परंपरा की अमिट छाप
भगवान श्रीराम की इस दिव्य बारात ने न केवल सांची में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार किया, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी समृद्ध संस्कृति और गौरवशाली परंपराओं से भी जोड़ा। सांची का यह रामलीला महोत्सव क्षेत्र के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय की तरह दर्ज हो गया है