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₹90 लाख के मुआवजे पर ₹10 लाख की रिश्वत! पटवारी पर 'करोड़ों की हेराफेरी' के सनसनीखेज आरोप

2025-11-27  Editor Shubham Jain  388 views

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ग्यारसपुर (विदिशा)। नेशनल हाईवे-146 (विदिशा-सागर रोड) के भूमि अधिग्रहण मुआवजे में एक बड़े भ्रष्टाचार का पर्दाफाश हुआ है। ग्यारसपुर तहसील के हल्का नंबर 19 के पटवारी रामचरण मीणा पर गंभीर आरोप लगे हैं। बताया जा रहा है कि पटवारी ने करीब ₹90 लाख के मुआवजे को स्वीकृत कराने के बदले एक किसान से सीधे ₹10 लाख की रिश्वत की मांग की।

करोड़ों की हेराफेरी का ‘पटवारी मॉडल’

मामला सिर्फ रिश्वत की मांग तक सीमित नहीं है, बल्कि पटवारी पर मुआवजे की राशि में करोड़ों की हेराफेरी करने के सुनियोजित आरोप हैं। मिली जानकारी के अनुसार, ग्राम मानोरा में नेशनल हाईवे निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण की अधिसूचना जारी होने के बाद पटवारी रामचरण मीणा ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए बड़े पैमाने पर धांधली की।

आरोप है कि पटवारी ने अपनी पत्नी, भतीजा और अन्य रिश्तेदारों के नाम पर रजिस्ट्री, नामांतरण और डायवर्सन कराकर सरकारी खजाने से करोड़ों रुपए के मुआवजे में हेरफेर किया। ग्रामीणों का कहना है कि इन हरकतों से कई फर्जी और अपात्र लाभार्थियों को मोटी मुआवजे की राशि स्वीकृत करा दी गई, जबकि पात्र किसानों को या तो कम राशि दी गई या उनके भुगतान रोक दिए गए।

न्याय मांगने पर मिली धमकी और कम मुआवजा

इस भ्रष्टाचार की सबसे बड़ी शिकार बनी रघुवंशी परिवार की जमीन। ग्रामीण शिवराज सिंह, नीलम सिंह रघुवंशी और उनके पिता पातीराम रघुवंशी ने बताया कि उनकी करीब पांच बीघा जमीन फोर लेन चौड़ीकरण में अधिग्रहित हुई। इसके बदले उन्हें केवल ₹14 लाख 23,919 का मुआवजा सूचीबद्ध किया गया।

परिवार का दावा है कि उनकी जमीन का वास्तविक मुआवजा करोड़ों में होना था। जब उन्होंने पटवारी द्वारा मांगी गई ₹10 लाख की रिश्वत देने से इनकार कर दिया, तो उनके नाम की राशि रोक दी गई।

ग्रामीणों ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया। उन्होंने बताया कि उसी गांव में पटवारी के भतीजे की उनसे सटी हुई मात्र तीन बिस्वा भूमि के लिए उन्हें ₹18 लाख 92 हजार 518 रुपये का भारी-भरकम मुआवजा दिया गया।

रघुवंशी परिवार अब गहरे मानसिक तनाव में है। कृषक पातीराम रघुवंशी ने चिंता जताते हुए कहा, “हम परिवार के सभी लोग मानसिक टेंशन में हैं। कभी भी कोई अप्रिय घटना घट सकती है, जिसकी जवाबदारी प्रशासन एवं पटवारी की होगी।”

शिकायतें हुईं 'अनसुनी', पटवारी के बोल ‘बेखौफ’

शिकायतकर्ताओं ने न्याय के लिए एसडीएम शशि मिश्रा, तहसीलदार, कलेक्टर और मुख्यमंत्री तक गुहार लगाई है, लेकिन अब तक इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है, जिससे ग्रामीणों में आक्रोश और हताशा है।

जब इस गंभीर आरोप के संबंध में पटवारी रामचरण मीणा से संपर्क किया गया, तो उनका जवाब बेखौफ था। उन्होंने कहा, “मेरे खिलाफ पहले भी शिकायतें की गईं, पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। शिकायत करने से क्या होता है।” पटवारी के इस बयान से साफ पता चलता है कि उन्हें उच्च अधिकारियों या सरकारी कार्रवाई का कोई डर नहीं है।

ग्रामीणों ने अब उच्च अधिकारियों से उच्च-स्तरीय जांच करवाने की मांग की है, ताकि नेशनल हाईवे मुआवजा वितरण में हुई पूरी गड़बड़ियों का खुलासा हो सके और भ्रष्टाचार में लिप्त सभी दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जा सके। यह मामला ग्यारसपुर तहसील में पटवारी के असीमित भ्रष्टाचार को उजागर करता है, जिस पर प्रशासन को तुरंत एक्शन लेने की जरूरत है।


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