
राघवेंद्र दांगी विदिशा पुलिस ने 'ऑपरेशन मुस्कान' के तहत एक बड़ी कामयाबी हासिल की है। गंजबासौदा शहर पुलिस ने दो अलग-अलग जगहों से दो अपहृत नाबालिग लड़कियों को सुरक्षित ढूंढ निकाला है। पुलिस ने अपनी तकनीकी कुशलता और अथक प्रयासों से इन दोनों गुमशुदा लड़कियों को उनके परिवारों से फिर मिला दिया, जिससे परिवारों में खुशी की लहर दौड़ गई।
तकनीकी साक्ष्यों और लगातार प्रयास से मिली कामयाबी
पुलिस अधीक्षक रोहित काशवानी के निर्देशन और वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में, गंजबासौदा शहर थाना पुलिस ने इन दोनों मामलों पर काम शुरू किया। पहला मामला 15 जुलाई 2025 का था, और दूसरा 15 सितंबर 2025 का। दोनों मामलों में लड़कियों के अपहरण की रिपोर्ट दर्ज की गई थी। पुलिस टीम ने तुरंत कार्रवाई शुरू की। उन्होंने तकनीकी साक्ष्यों का सहारा लिया, जिसमें मोबाइल फोन की लोकेशन, कॉल रिकॉर्ड और सोशल मीडिया की जानकारी शामिल थी।
लगातार जांच और कई दिनों की कड़ी मेहनत के बाद, पुलिस को सफलता मिली। पहली लड़की को भोपाल के इमलिया चोपड़ा इलाके से 19 सितंबर 2025 को सुरक्षित बरामद कर लिया गया। उसे उसके परिवार के हवाले कर दिया गया।
दूसरी लड़की की तलाश भी लगातार जारी थी। पुलिस टीम ने पूरे क्षेत्र में छानबीन की। आखिरकार, दूसरी लड़की को गंजबासौदा रेलवे स्टेशन के पास से उसी दिन यानी 19 सितंबर 2025 को ढूंढ निकाला गया। उसे भी उसके परिजनों को सौंप दिया गया।
बदले की भावना के साथ काम करती है विदिशा पुलिस
इस सफलता के पीछे थाना प्रभारी संजय वेदिया और उनकी टीम का विशेष योगदान रहा। टीम में उप-निरीक्षक बी.एल. मालवीय, सहायक उप-निरीक्षक दुर्गसिंह रघुवंशी, प्रधान आरक्षक सुरेश रघुवंशी, और आरक्षक शिवप्रताप, सरमन साहू, अरुण छारी, महिला आरक्षक द्रोपती तिवारी, शिवानी और रानी कन्नौजिया शामिल थीं। इन सभी ने मिलकर इस मुश्किल मिशन को अंजाम दिया और बच्चियों को सुरक्षित वापस लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
विदिशा पुलिस के लिए यह कोई नई बात नहीं है। वर्ष 2025 में अब तक 280 से ज्यादा गुमशुदा या अपहृत नाबालिगों को सुरक्षित ढूंढकर उनके परिवारों को सौंपा जा चुका है। यह आंकड़ा दिखाता है कि पुलिस कितनी तत्परता और संवेदनशीलता के साथ ऐसे मामलों को देखती है।
'ऑपरेशन मुस्कान' क्या है?
'ऑपरेशन मुस्कान' भारत सरकार द्वारा चलाया गया एक विशेष अभियान है, जिसका मकसद गुमशुदा और अपहृत बच्चों को ढूंढकर उनके परिवारों से मिलाना है। इस अभियान के तहत, पुलिस टीमें विशेष रूप से बच्चों की गुमशुदगी के मामलों पर ध्यान केंद्रित करती हैं। यह अभियान न केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखने में मदद करता है, बल्कि समाज में विश्वास और सुरक्षा की भावना भी पैदा करता है।
गंजबासौदा पुलिस की यह कार्रवाई एक बार फिर साबित करती है कि पुलिस जनता के साथ है। ऐसे मामले, जहां बच्चों की जिंदगी दांव पर होती है, पुलिस की संवेदनशीलता और मानवता को दर्शाते हैं। पुलिस का काम सिर्फ अपराधियों को पकड़ना नहीं है, बल्कि समाज के सबसे कमजोर तबके की रक्षा करना भी है।
भरोसे और संवेदनशीलता का उदाहरण
यह घटना उन परिवारों के लिए एक सबक है, जो अपने बच्चों को खोने का डर रखते हैं। विदिशा पुलिस ने दिखाया है कि वे हर हाल में जनता के भरोसे पर खरी उतरती है। ऐसे मामलों में पुलिस की सक्रियता और उनका मानवीय चेहरा सामने आता है, जो समाज को यह भरोसा दिलाता है कि जब भी कोई मुश्किल आएगी, पुलिस उनकी मदद के लिए हमेशा तैयार है।
इस सफलता के लिए विदिशा पुलिस टीम को बधाई दी जा रही है। उम्मीद है कि यह अभियान भविष्य में भी इसी तरह जारी रहेगा और कई और परिवारों को उनकी खोई हुई खुशियां लौटाएगा।