
साँची। जब बर्फीली हवाएं शरीर को सुन्न करने लगें और पारा गिरकर हड्डियों को कंपाने लगे, तब इंसानियत की असली परीक्षा होती है। साँची की सड़कों पर इन दिनों कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला। एक तरफ जहाँ लोग अपने घरों में रजाई के भीतर दुबके हुए थे, वहीं नगर परिषद अध्यक्ष पप्पूरेवाराम अहिरवार किसी मसीहा की तरह सड़कों पर उतरे।
आधी रात के सन्नाटे में, जब सर्द हवाएं कहर बरपा रही थीं, अध्यक्ष अहिरवार ने शहर के अलग-अलग वार्डों का दौरा किया। उन्होंने फुटपाथ पर ठिठुर रहे बुजुर्गों, असहायों और बेसहारा परिवारों को गर्म कंबल बांटे। यह नजारा सिर्फ सरकारी औपचारिकता नहीं, बल्कि 'मानवता की गर्माहट' का साक्षात उदाहरण था।
"यह दान नहीं, सुकून का अहसास है"
कंबल वितरण के दौरान पप्पूरेवाराम अहिरवार का एक बेहद मानवीय चेहरा सामने आया। बुजुर्गों के पैर छूकर और उनके हालचाल जानकर उन्होंने जब कंबल ओढ़ाए, तो कई आंखें भर आईं।
भावुक होते हुए उन्होंने कहा— "यह सिर्फ ऊन का एक टुकड़ा नहीं है, बल्कि किसी बेसहारा के लिए सुकून की नींद और जीने की नई उम्मीद है। हम शायद रातों-रात दुनिया की सारी गरीबी खत्म नहीं कर सकते, लेकिन हमारा एक छोटा सा कदम किसी मजबूर इंसान की सर्द रात को आसान जरूर बना सकता है।"
दुआओं से भीगी सांची की रात
इस कड़ाके की ठंड में जब खुले आसमान के नीचे रात बिताने वाले परिवारों को गर्म कंबलों का सहारा मिला, तो उनके चेहरों पर जो राहत दिखी, वह अनमोल थी। शहर के बुद्धिजीवियों और आम नागरिकों का कहना है कि पद की गरिमा तब बढ़ जाती है जब व्यक्ति अपनी सुख-सुविधा छोड़कर पीड़ित मानवता की सेवा के लिए जमीन पर उतरता है। राजनीति से ऊपर उठकर किए गए इस सेवा कार्य की आज पूरे साँची में चर्चा है।
एक मार्मिक अपील: इंसानियत से बड़ी कोई दौलत नहीं
पप्पूरेवाराम अहिरवार ने केवल कंबल ही नहीं बांटे, बल्कि शहर के संपन्न लोगों को एक संदेश भी दिया। उन्होंने कहा कि— “कुदरत ने अगर हमें दूसरों की मदद के काबिल बनाया है, तो हमें पीछे नहीं हटना चाहिए। अपने घर की अलमारी में रखे पुराने या नए कपड़े किसी जरूरतमंद को दें। आपकी एक छोटी सी पहल किसी की जान बचा सकती है।”
नगर परिषद की इस पहल ने यह साबित कर दिया है कि सत्ता का असली मकसद जनसेवा ही है। कड़कड़ाती ठंड में शुरू हुआ यह अभियान न केवल लोगों को राहत दे रहा है, बल्कि समाज में भाईचारे और संवेदना की नई अलख जगा रहा है।