
मुरैना (सबलगढ़/रामपुरकलां) |
मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में 'नल से जल' का सपना भ्रष्टाचार और लापरवाही की भेंट चढ़ गया है। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन योजना बामसोली और रामपुरकलां में चार साल बाद भी दम तोड़ती नजर आ रही है। आलम यह है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी ग्रामीणों की प्यास नहीं बुझी है और वे आज भी बूंद-बूंद पानी के लिए निजी ट्यूबवेल या हैंडपंपों पर निर्भर हैं।
4.30 करोड़ की टंकी: भ्रष्टाचार की 'जीती-जागती' मिसाल
रामपुरकलां में 4.30 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से पानी की टंकी का निर्माण किया गया था। शिव कंस्ट्रक्शन कंपनी द्वारा बनाई गई इस टंकी को 6 साल बीत चुके हैं, लेकिन यह आज भी अधूरी है। निरीक्षण में जो तथ्य सामने आए, वे चौंकाने वाले हैं:
* घटिया गुणवत्ता: टंकी के फाउंडेशन में सीसी (कंक्रीट) का काम तक नहीं किया गया।
* अधूरा ढांचा: टॉपडोम, सीढ़ी और बालकनी का काम अधूरी हालत में लटका है।
* लीकेज का खतरा: पाइपलाइन पूरी न होने और स्ट्रक्चर में खामियों के कारण कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
हैरानी की बात यह है कि 6 साल की देरी के बावजूद विभाग ने न तो ठेकेदार से वसूली की और न ही उसे ब्लैकलिस्ट किया।
बामसोली: 7 नलकूपों में पानी, फिर भी सूखी पाइपलाइन
बामसोली पंचायत की स्थिति भी इससे अलग नहीं है। यहाँ 12 नलकूप खनन किए गए थे, जिनमें से 7 में पर्याप्त पानी उपलब्ध है। इसके बावजूद पीएचई विभाग ने आज तक इनमें मोटर नहीं डाली। ग्रामीणों का आरोप है कि उन्हें हर महीने 400 से 500 रुपये खर्च कर निजी स्रोतों से पानी खरीदना पड़ रहा है।
दबंगों का 'जल' पर पहरा: सरकारी नलकूप से हो रही निजी सिंचाई
निरीक्षण के दौरान बातेड़ गांव में एक गंभीर मामला सामने आया। यहाँ दो सरकारी नलकूपों पर दबंगों ने अवैध कब्जा कर रखा है। जनता के पीने के पानी का उपयोग दबंग अपनी फसलों की सिंचाई के लिए कर रहे हैं। प्रशासन की नाक के नीचे चल रहे इस खेल ने विभागीय सतर्कता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
एक्शन में प्रशासन: कलेक्टर की सख्ती के बाद पहुंची टीम
20 जनवरी को ग्राम पंचायतों द्वारा नव-नियुक्त कलेक्टर को शिकायत दिए जाने के बाद प्रशासन हरकत में आया। बुधवार को लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) की एसडीओ शालिनी सिंह ने टीम के साथ दोनों गांवों का दौरा किया।
> अधिकारियों का पक्ष:
> "बामसोली के अधूरे कामों का नया एस्टीमेट बनाकर शासन को भेजा जा रहा है। रामपुरकलां के मामले में ठेकेदार को नोटिस जारी किया जाएगा। बातेड़ में नलकूपों से अतिक्रमण हटाने और पाइपलाइन जोड़ने के सख्त निर्देश दिए गए हैं।" > — शालिनी सिंह, एसडीओ, पीएचई विभाग
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ग्रामीणों में आक्रोश
बामसोली और रामपुरकलां के सरपंचों का कहना है कि यह जनता के पैसों की खुली बर्बादी है। अगर जल्द ही जलापूर्ति शुरू नहीं हुई, तो ग्रामीण उग्र आंदोलन के लिए विवश होंगे। अब देखना यह है कि नए कलेक्टर के आने के बाद इन प्यासे गांवों की तकदीर बदलती है या फाइलें फिर से धूल फांकती रहेंगी।