
भोपाल: 6जुलाई 2025 ग्वालियर की धरती पर "सामाजिक समरसता सम्मेलन" का भव्य आयोजन हुआ, जहां मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने समाज में समानता और सद्भाव का संदेश दिया। इस कार्यक्रम में उनके साथ केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर सहित कई दिग्गज शामिल हुए।
CM यादव का बड़ा बयान: “समरसता हमारी हजारों साल पुरानी गौरवशाली परंपरा”
राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय के दत्तोपंत ठेंगड़ी सभागार में आयोजित इस खास सम्मेलन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जोर देकर कहा कि हमारी भारतीय संस्कृति समरसता और ज्ञान की एक प्राचीन और गौरवशाली परंपरा रही है। उन्होंने संत रविदास, कबीर, भगवान गौतम बुद्ध और अन्य ऋषि-मुनियों का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे इन महापुरुषों ने समरसता की ज्योति जलाई, जिससे देश में मानवता के मूल सिद्धांत स्थापित हुए।
मुख्यमंत्री ने भारत रत्न बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर को याद करते हुए कहा कि उन्होंने हमें समरसता और समता का सिद्धांत दिया और संविधान में सभी को समान अधिकार प्रदान किए। डॉ. यादव ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि ग्वालियर से सामाजिक समरसता का एक नया सवेरा आया है, जो पूरे प्रदेश में सद्भाव का वातावरण और मजबूत करेगा।
दिग्गजों की मौजूदगी, सम्मान और सामूहिक सहभोज
इस महत्वपूर्ण अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, केंद्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर और अन्य विशिष्ट अतिथियों ने मिलकर संतजनों और ग्वालियर व प्रदेश का नाम रोशन कर रही छह प्रमुख हस्तियों को "समरसता सम्मान" से सम्मानित किया।
इसके अलावा, सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ उठाकर आत्मनिर्भर बने समाज के वंचित वर्ग के हितग्राहियों को भी सहायता वितरित की गई। सम्मेलन में मौजूद सभी प्रतिभागियों को सामाजिक समरसता की शपथ दिलाई गई। कार्यक्रम का समापन सामूहिक सहभोज के साथ हुआ, जिसमें मुख्यमंत्री सहित सभी अतिथि शामिल हुए। इससे पहले, भारत माता के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलन कर सम्मेलन का औपचारिक शुभारंभ किया गया।
“भेदभाव से दूर रहकर ही बनेंगे संगठित और आजाद”
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपने संबोधन में महाभारत काल में भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की अद्वितीय मित्रता का उदाहरण देते हुए कहा कि लंबे समय तक संगठित और आजाद रहने के लिए हमें भेदभाव से दूर रहना बेहद जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि भगवान गौतम बुद्ध द्वारा चलाया गया बौद्ध धर्म आज विश्व के सबसे बड़े धर्मों में से एक है, जो हम सभी देशवासियों के लिए स्वाभिमान की बात है।
उन्होंने प्रसिद्ध गीत की पंक्तियों "कुछ बात है हस्ती मिटती नहीं हमारी, सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-जमां हमारा" का उल्लेख करते हुए कहा कि सामाजिक समरसता और सद्भाव की बदौलत ही हजारों वर्षों से विपरीत परिस्थितियों के बावजूद हमारा देश मजबूती से खड़ा है।
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