
भोपाल/कानपुर
"आपके खिलाफ शिकायत है, आप चाइल्ड पोर्न देख रहे हैं। दिल्ली क्राइम ब्रांच से बोल रहा हूँ... अभी आपकी डिजिटल गिरफ्तारी की जाएगी!"
ऐसा कहते हुए जो शख्स फोन पर डर फैलाता था, वह कोई अधिकारी नहीं, बल्कि साइबर अपराध की दुनिया का ऐसा शिकारी निकला जिसने सैकड़ों लोगों को ठगकर करोड़ों की कमाई कर ली थी। लेकिन अब उसका खेल खत्म हो गया है। भोपाल साइबर सेल ने उसे उत्तर प्रदेश के कानपुर से गिरफ्तार कर लिया है।
ठगी का मास्टरमाइंड निकला आठवीं पास मजदूर
गिरफ्तार आरोपी की पहचान आजाद खान, उम्र 38 वर्ष, के रूप में हुई है। वह कानपुर के रठीगांव, थाना रेऊना का निवासी है। पुलिस जांच में सामने आया है कि आजाद आठवीं पास है और कभी गांव में मजदूरी करता था। लेकिन गरीबी से परेशान आजाद ने पैसे कमाने का शॉर्टकट ढूंढा और बन गया साइबर अपराधी।
उसका पूरा परिवार ही ठगी के धंधे में लिप्त है। आजाद ने यह ‘कला’ अपने बड़े भाई रईस से सीखी, जो इस समय देशभर की पुलिस के लिए सिरदर्द बना हुआ है। रईस पर देश के कई राज्यों में साइबर ठगी के सैकड़ों मामले दर्ज हैं और वह लंबे समय से फरार है। पुलिस को जानकारी मिली है कि वह अब नासिक में छिपा हुआ है।
दिल्ली क्राइम ब्रांच का फर्जी अफसर बनकर डराता था
आजाद का तरीका बेहद शातिर था। वह हिंदी भाषी राज्यों – जैसे मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ – के लोगों को कॉल करता और खुद को दिल्ली क्राइम ब्रांच का अफसर बताता। फिर कहता कि उनके मोबाइल या लैपटॉप से चाइल्ड पोर्न देखा गया है और उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होने वाली है।
लोग जब घबराते, तो वह उन्हें 'डिजिटल अरेस्ट' के नाम पर मोबाइल पर ही 'जुर्म कबूल' कराने लगता। इसके बाद कहता – जुर्माना भरें नहीं तो जेल जाना पड़ेगा। डर के मारे लोग उसे पेटीएम, फोनपे, गूगल पे या बैंक ट्रांसफर के ज़रिए हजारों से लेकर लाखों रुपये तक भेज देते थे।
सिर्फ भोपाल में ही नहीं, कई राज्यों में शिकार
हाल ही में आजाद ने भोपाल के एक व्यक्ति से भी इसी स्क्रिप्ट के तहत लाखों रुपये ठग लिए थे। जब वह शख्स किसी से सलाह लेने गया, तो उसे शक हुआ और साइबर सेल में रिपोर्ट दर्ज करवाई गई। तकनीकी जांच के बाद साइबर एक्सपर्ट्स ने लोकेशन ट्रेस की और आजाद को कानपुर से गिरफ्तार किया।
एसआई देवेंद्र साहू के अनुसार, आजाद पिछले छह महीने से लगातार चाइल्ड पोर्न और दिल्ली क्राइम ब्रांच के नाम पर ठगी कर रहा था। लेकिन उसके पहले वह सरकारी योजनाओं में लाभ दिलाने के नाम पर, लोन दिलाने, बीमा योजनाएं एक्टिवेट करने और नौकरी लगवाने जैसे बहानों से भी ठगी करता रहा है।
बैंक खातों में करोड़ों और मोबाइल में सबूतों का खजाना
पुलिस के मुताबिक, आजाद के बैंक खातों में करीब एक करोड़ रुपये का लेनदेन मिला है। साथ ही उसके मोबाइल से कई ऐसे दस्तावेज, फर्जी आईडी, सिम कार्ड, और सैकड़ों बैंक अकाउंट्स की जानकारी बरामद हुई है। पुलिस ने उन सभी खातों को सीज कर दिया है और जांच जारी है कि किन-किन लोगों से पैसे लिए गए।
ठगी के पैसों से आलीशान जिंदगी
गांव में आजाद खान और उसके भाई के नाम पर तीन आलीशान मकान हैं। उनके पास लग्जरी गाड़ियां भी हैं, जिन्हें देखकर कोई यकीन नहीं कर सकता कि वे कभी मजदूर थे। ग्रामीणों के मुताबिक, आजाद और उसका परिवार अब अमीर बनने के घमंड में जीता है और किसी से मेल-जोल भी नहीं रखता।
अब सख्त कार्रवाई की तैयारी
भोपाल साइबर सेल अब आजाद खान के नेटवर्क की तह तक जाने की तैयारी में है। पुलिस को शक है कि इस गैंग से कई और लोग जुड़े हुए हैं जो कॉल सेंटर जैसे सिस्टम से काम करते हैं। इसके लिए मल्टी स्टेट इंवेस्टिगेशन की योजना बनाई जा रही है।
एसआई साहू ने बताया कि इस मामले में IT एक्ट, IPC की धारा 419 (व्यक्तित्व की छल), 420 (धोखाधड़ी), 468 (फर्जीवाड़ा), 471 (फर्जी दस्तावेज का प्रयोग) और अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।