
देवास (मध्यप्रदेश):
सरकारी दफ्तरों में बैठी कुछ काली भेड़ों के हौसले किस कदर बुलंद हैं, इसका ताज़ा उदाहरण देवास जिले के टोंकखुर्द में देखने को मिला। शुक्रवार को भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई करते हुए, उज्जैन लोकायुक्त पुलिस की टीम ने जनपद पंचायत टोंकखुर्द के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) राजेश सोनी को 20,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। यह चौंकाने वाली घटना सीईओ के अपने ही दफ्तर में हुई, जब वह एक रोजगार सहायक से तबादला करने के एवज में रिश्वत की रकम ले रहा था।
भ्रष्टाचार की 'डील' और शिकायत
मामला एक रोजगार सहायक से जुड़ा है, जिसका नाम कृष्णपाल बताया जा रहा है। कृष्णपाल काफी समय से अपना तबादला करवाना चाह रहे थे, लेकिन जनपद सीईओ राजेश सोनी ने उनके काम को करने के लिए रिश्वत की डिमांड कर दी। सूत्रों के अनुसार, सीईओ सोनी ने तबादला करने के लिए सीधे-सीधे 25,000 रुपये की माँग की थी।
जब एक सरकारी कर्मचारी ही दूसरे कर्मचारी से काम के बदले इतनी मोटी रकम की माँग करे, तो भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं, इसका अंदाज़ा लगाया जा सकता है। हालाँकि, रोज़गार सहायक कृष्णपाल ने इस अवैध माँग के आगे घुटने टेकने के बजाय, भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज़ उठाने का फैसला किया।
लोकायुक्त का जाल और 'रंगे हाथों' गिरफ्तारी
कृष्णपाल ने इस पूरी 'डील' की जानकारी तुरंत उज्जैन लोकायुक्त पुलिस को दी। लोकायुक्त टीम ने मामले की गंभीरता को समझते हुए, सबसे पहले गोपनीय तरीके से शिकायत का सत्यापन किया। जब यह पुष्टि हो गई कि सीईओ राजेश सोनी वास्तव में रिश्वत की माँग कर रहे हैं, तो लोकायुक्त टीम ने भ्रष्टाचार के खिलाफ़ अपने जाल को बिछाना शुरू कर दिया।
शुक्रवार को, लोकायुक्त पुलिस की एक टीम सादे लिबास में टोंकखुर्द जनपद कार्यालय पहुँची। योजना के मुताबिक, रोजगार सहायक कृष्णपाल रिश्वत की तयशुदा रकम 20,000 रुपये लेकर सीईओ राजेश सोनी के दफ्तर पहुँचे। जैसे ही सीईओ सोनी ने रिश्वत की रकम अपने हाथ में ली, लोकायुक्त टीम ने तेज़ एक्शन लिया और उन्हें रंगे हाथों दबोच लिया।
दफ्तर के अंदर इस कार्रवाई से हड़कंप मच गया। लोकायुक्त अधिकारियों ने तुरंत ही सीईओ राजेश सोनी को हिरासत में ले लिया और उनके हाथों को रासायनिक पाउडर से धुलवाया, जिससे रिश्वत के पैसों का लेना-देना साबित हो गया।
क्यों ज़रूरी है यह कार्रवाई?
यह घटना एक कड़ा संदेश देती है कि सरकारी पदों पर बैठकर भ्रष्टाचार करने वालों को अब बख्शा नहीं जाएगा। जनपद सीईओ जैसे महत्वपूर्ण पद पर बैठा व्यक्ति अगर छोटे कर्मचारियों से तबादले के नाम पर रिश्वत लेता है, तो यह दिखाता है कि ज़मीनी स्तर पर पारदर्शिता और ईमानदारी की कितनी कमी है।
लोकायुक्त पुलिस की यह त्वरित और सफल कार्रवाई भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत की गई है। आरोपी सीईओ राजेश सोनी पर अब नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जा रही है, जिसके तहत उन्हें जेल की सज़ा भी हो सकती है।
इस पूरे मामले में रोजगार सहायक कृष्णपाल की साहसिक पहल की सराहना की जानी चाहिए, जिन्होंने डरने के बजाय भ्रष्ट अधिकारी को सबक सिखाने का फैसला लिया। उनकी यह हिम्मत ही भ्रष्टाचार-मुक्त समाज की दिशा में एक बड़ा कदम है।
सरकारी दफ्तरों में पारदर्शिता की माँग
देवास जिले में हुई इस कार्रवाई के बाद, एक बार फिर यह सवाल उठता है कि आख़िर कब तक सरकारी दफ्तरों में छोटे-छोटे कामों के लिए लोगों को रिश्वत देनी पड़ेगी? सरकार को चाहिए कि वह ऐसे मामलों में जीरो-टॉलरेंस की नीति अपनाए और भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ मिसाल कायम करने वाली कठोर कार्रवाई करे।
इस ख़बर ने पूरे जिले में हड़कंप मचा दिया है और यह दिखाता है कि भले ही भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी भी गहरी क्यों न हों, कानून के हाथ उन तक पहुँच ही जाते हैं।