
भोपाल, 3 दिसंबर 2025।
मध्य प्रदेश सिंचाई के क्षेत्र में एक नई क्रांति की ओर कदम बढ़ा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दावा किया है कि पिछले दो वर्षों में राज्य में 7.31 लाख हेक्टेयर नई सिंचाई क्षमता विकसित की गई है। इतना ही नहीं, सरकार ने सिंचित क्षेत्र को बढ़ाकर 100 लाख हेक्टेयर तक ले जाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। यह घोषणा प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा गेम चेंजर साबित हो सकती है, जो हजारों किसानों के जीवन में समृद्धि लाएगी।
✅ मिशन 100 लाख हेक्टेयर: गति और तकनीक का मेल
मंगलवार को विधानसभा समिति कक्ष में जल संसाधन विभाग और नर्मदा घाटी विकास विभाग की गतिविधियों की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आगामी योजनाओं पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2026 तक सिंचाई क्षमता में 8.44 लाख हेक्टेयर की अतिरिक्त वृद्धि होगी। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए सिंचाई परियोजनाओं की समीक्षा में प्रधानमंत्री गतिशक्ति पोर्टल का उपयोग किया जाएगा, जिससे कार्यों में पारदर्शिता और गति आएगी।
🌊 नदियों को जोड़कर बनेगा जल नेटवर्क
राज्य की सिंचाई क्षमता को अधिकतम स्तर पर ले जाने के लिए मुख्यमंत्री ने नदी-जोड़ परियोजना के क्रियान्वयन पर विशेष बल दिया। उन्होंने पार्वती-काली-सिंध और चंबल अंतर्राज्यीय लिंक परियोजना तथा केन-बेतवा अंतर्राज्यीय लिंक परियोजना की स्वीकृति को प्रदेश की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।
जल संसाधन विभाग ने जानकारी दी कि राज्य में कई महत्वपूर्ण नदी जोड़ो परियोजनाओं का सर्वेक्षण पूरा हो चुका है। इनमें प्रमुख हैं:
* कान्ह-गंभीर (उज्जैन)
* कालीसिंध-चंबल (मंदसौर, नीमच)
* केन और मंदाकिनी (सतना)
* शक्कर पेंच और दूधी तामिया (सिवनी, छिंदवाड़ा)
* जामनेर नेवन और नेवन-बीना (रायसेन)
इन परियोजनाओं के धरातल पर उतरने से 5 लाख 97 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में अतिरिक्त सिंचाई संभव हो सकेगी। इन योजनाओं की अनुमानित लागत 9870 करोड़ रुपये है और इनका सीधा लाभ सात जिलों के हजारों किसानों को मिलेगा। नदियों में बाढ़ प्रबंधन, जल का समुचित उपयोग और नदी तटों में पर्याप्त जल उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए 13 नवंबर 2024 को एक तकनीकी बल का भी गठन किया गया है।
🛠️ प्राचीन तकनीक से आधुनिक बांध
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जल प्रबंधन के लिए एक अनूठा दृष्टिकोण अपनाया है। उन्होंने भोपाल झील की प्राचीन तकनीक का अध्ययन करने और इसी तर्ज पर कम लागत में सुरक्षित जलाशय और बांध निर्माण की अवधारणा पर काम करने के निर्देश दिए। यह मॉडल न सिर्फ किफायती होगा, बल्कि जल संरक्षण में भी प्रभावी सिद्ध हो सकता है। उन्होंने निर्देश दिए कि इस मॉडल को भोपाल में प्रदर्शित किया जाए।
सिंचाई सुविधाओं के विस्तार में प्रमुख परियोजनाएं भी तेजी से आगे बढ़ रही हैं:
* सेवरखेड़ी-सिलारखेड़ी परियोजना (उज्जैन): लागत ₹614.53 करोड़, भौतिक प्रगति 48%.
* कान्ह डायवर्सन क्लोज डक्ट परियोजना (उज्जैन): लागत ₹919.94 करोड़, भौतिक प्रगति 42%.
इसके अलावा, सिंहस्थ: 2028 के लिए श्रद्धालुओं की सुविधा हेतु ₹778.91 करोड़ की लागत से घाटों का निर्माण और संबंधित कार्य किए जा रहे हैं।
यह बैठक सिंचाई, जल संसाधन और नर्मदा घाटी विकास विभागों के लिए एक नई दिशा तय करती है। 100 लाख हेक्टेयर के लक्ष्य के साथ, मध्य प्रदेश अब देश के सबसे बड़े सिंचित राज्यों में शामिल होने की ओर अग्रसर है, जो राज्य की कृषि शक्ति को नई ऊंचाई देगा।