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DJ का शोर बना नागरिकों के 'जीवन के अधिकार' का हनन, सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों पर 15 दिन में माँगी गई रिपोर्ट

2025-11-16  Editor Shubham Jain  609 views

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नई दिल्ली/विदिशा: एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने देश भर में डीजे के अत्यधिक शोर को नागरिकों के मौलिक अधिकारों का गंभीर हनन मानते हुए एक बड़ा कदम उठाया है। मध्य प्रदेश के विदिशा से उठी इस आवाज़ का असर अब देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों पर पड़ेगा। NHRC ने सभी राज्यों के मुख्य सचिवों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासकों को सख्त नोटिस जारी कर 15 दिनों के भीतर कार्यवाही रिपोर्ट माँगी है।


क्या है पूरा मामला?
अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत के प्रांतीय सदस्य विनोद के शाह ने NHRC में याचिका दायर कर जानलेवा बन रहे डीजे के शोर, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मानकों का उल्लंघन, और मॉडिफाई डीजे वाहनों की चमकती लाइटों से होने वाली सड़क दुर्घटनाओं को रोकने की मांग की थी।


NHRC के सदस्य माननीय प्रियंक कानूनगो की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस मामले को मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम 1993 की धारा 12 के तहत 'आम नागरिकों को प्राप्त जीवन के अधिकार (Article 21) का हनन' माना।


NHRC के निर्देश और सख्ती के बिंदु:
आयोग ने अपने नोटिस में साफ कहा है कि स्वच्छ, स्वस्थ और शांतिपूर्ण पर्यावरण का अधिकार भारतीय संविधान में जीवन के अधिकार के रूप में शामिल है। अत्याधिक शोर को नियंत्रित न कर पाना नागरिकों के मौलिक अधिकारों का सीधा उल्लंघन है।
* पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 और ध्वनि प्रदूषण नियम-2000 के अनुपालन में प्रशासनिक निष्क्रियता।
* मोटर वाहन अधिनियम की धारा 52 और 190 का उल्लंघन।


* माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों और संविधान के अनुच्छेद-21 के अनुपालन पर शासन-प्रशासन की कार्यवाही रिपोर्ट।
याचिकाकर्ता विनोद के शाह ने चिंता जताई है कि डीजे का शोर और चमकदार लाइटें अराजकता और मौत का कारण बन रही हैं। शोर के कारण हृदयाघात, गर्भपात और बहरेपन के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, लेकिन स्थानीय प्रशासन शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं कर पा रहा है। अब NHRC की इस सख्ती के बाद, देश भर के DJ संचालकों और स्थानीय प्रशासन पर बड़ी कार्रवाई की तलवार लटक गई है।


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