
दिल्ली में हनी ट्रैप का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पुलिस और जनता को चौंका दिया। डॉक्टर से 9 लाख रुपये ऐंठने के लिए अपराधियों ने ऐसा जाल बुना कि वो उसमें फंस गए। मामला तब खुला जब दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने फर्जी पुलिसकर्मियों के एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया।
कैसे हुआ शिकार?
सब कुछ अगस्त 2024 में शुरू हुआ, जब 60 वर्षीय डॉक्टर को एक अनजान लड़की ने कॉल की। मीठी-मीठी बातों के बाद लड़की ने डॉक्टर को अपने बीमार मां की मदद के बहाने घर बुलाया। डॉक्टर मानवीयता के नाते जनकपुरी मेट्रो स्टेशन के पास स्थित उसके घर पहुंचे। वहां माहौल सामान्य दिखा। लड़की ने डॉक्टर का स्वागत किया, नाश्ता परोसा, और बातचीत के दौरान उनका भरोसा जीत लिया।
लेकिन खेल यहीं से शुरू हुआ। लड़की ने अचानक डॉक्टर की शर्ट के बटन खोल दिए। इससे पहले कि डॉक्टर कुछ समझ पाते, पुलिस की वर्दी पहने चार लोग कमरे में घुस गए। उनकी एंट्री ने पूरे सीन को खौफनाक बना दिया। लड़की चुपके से वहां से भाग निकली।
खौफ और फिरौती का खेल
फर्जी पुलिसवालों ने डॉक्टर पर नैतिक अपराध का झूठा इल्जाम लगाकर उन्हें फंसाने की धमकी दी। डॉक्टर को पुलिस स्टेशन ले जाने का डर दिखाया। नतीजा? घबराए डॉक्टर ने 9 लाख रुपये देकर किसी तरह अपनी इज्जत बचाई।
अपराधियों का गिरोह और पुलिस की कार्रवाई
दिल्ली पुलिस ने बुध विहार नाला, मेन कंझावला रोड पर छापेमारी कर गिरोह के तीन सदस्यों—नीरज त्यागी (42), आशीष माथुर (31), और दीपक (30)—को गिरफ्तार किया। इनके पास से दिल्ली पुलिस के फर्जी पहचान पत्र और हेड कॉन्स्टेबल रैंक की वर्दी बरामद हुई।
पुलिस हिरासत से भागने की कोशिश
गिरफ्तारी के बाद, आरोपियों ने क्राइम ब्रांच ऑफिस से भागने की कोशिश की, लेकिन पुलिस की सतर्कता के चलते उन्हें फिर से दबोच लिया गया। जांच में पता चला कि ये गिरोह पहले भी कई लोगों को इसी तरह ठग चुका है।
सबक और सतर्कता
यह घटना उन लोगों के लिए एक चेतावनी है जो किसी अनजान व्यक्ति के बहकावे में आ जाते हैं। पुलिस ने जनता से अपील की है कि किसी भी अनजान कॉल से सावधान रहें और ऐसी घटनाओं की तुरंत सूचना दें।
हनी ट्रैप का ये मामला बताता है कि इंसानियत के नकाब में छिपे धोखेबाज कैसे किसी की ज़िंदगी बर्बाद कर सकते हैं। सतर्क रहिए, सुरक्षित रहिए।