VIDISHA BHARTI

collapse
...
Home / Politics/राजनीति / छात्राएं बोलीं – पूजा नहीं करने देती वॉर्डन: दमोह छात्रावास में बाल आयोग का छापा, धार्मिक किताबें और राष्ट्रीय ध्वज कचरे में मिलने से मचा बवाल

छात्राएं बोलीं – पूजा नहीं करने देती वॉर्डन: दमोह छात्रावास में बाल आयोग का छापा, धार्मिक किताबें और राष्ट्रीय ध्वज कचरे में मिलने से मचा बवाल

2025-04-29  Baby jain  612 views

ImgResizer_20250429_1646_31446
दमोह, मध्यप्रदेश। शिक्षा के मंदिर में अगर बच्चों की आस्था और मूलभूत अधिकारों पर चोट हो, तो सवाल सिर्फ प्रशासन पर नहीं, पूरे सिस्टम पर उठते हैं। दमोह जिले के टौरी गांव में संचालित बालिका छात्रावास में कुछ ऐसा ही हुआ, जब मध्यप्रदेश राज्य बाल संरक्षण आयोग की टीम ने अचानक निरीक्षण किया। यह दौरा एक सामान्य जांच की तरह शुरू हुआ, लेकिन खुलासे चौंकाने वाले थे।

धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला? छात्राओं के गंभीर आरोप

आयोग की जांच टीम को छात्राओं से जो बातें पता चलीं, वह न सिर्फ संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है, बल्कि बच्चों की मानसिक आज़ादी पर भी सीधा आघात है। छात्राओं ने आरोप लगाया कि वॉर्डन यशवंती महोबे उन्हें पूजा-पाठ करने की अनुमति नहीं देतीं। यह आरोप उस देश में गंभीर है जहां हर नागरिक को धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार है।

धार्मिक किताबें: इरादा शिक्षा या प्रचार?

निरीक्षण के दौरान जब आयोग की टीम ने प्यून के कमरे की तलाशी ली, तो वहां से मुस्लिम, ईसाई और बौद्ध धर्म से संबंधित धार्मिक पुस्तकें बरामद हुईं। टीम ने इन किताबों को संदिग्ध और छात्रावास में असंवैधानिक रूप से मौजूद बताया। सवाल यह उठता है कि क्या यह किताबें छात्राओं के बीच धार्मिक विचारधारा फैलाने के लिए रखी गई थीं?

छात्रावास बना निजी दुकान का अड्डा?

आयोग की जांच में यह भी सामने आया कि वॉर्डन छात्राओं को किराने का सामान एक विशेष दुकान से जबरन खरीदने के लिए मजबूर करती हैं, जो कि प्यून द्वारा संचालित है। इसका मतलब यह हुआ कि छात्रावास की जरूरतों को व्यापार में बदल दिया गया, जो साफ तौर पर शोषण और भ्रष्टाचार का संकेत है।

खाने में रोज एक ही सब्जी – मुनगा की पत्तियां!

छात्राओं की शिकायतों में एक और बात सामने आई कि उन्हें रोजाना सिर्फ मुनगा (सहजन) की पत्तियों की सब्जी ही परोसी जाती है, जिससे उनकी सेहत और पोषण पर विपरीत असर पड़ रहा है। यह मिड-डे मील और छात्रावास की आहार योजना के नियमों का खुला उल्लंघन है।

राष्ट्रीय ध्वज कचरे में – देशभक्ति या लापरवाही?

इस निरीक्षण में सबसे चौंकाने वाला दृश्य तब सामने आया, जब आयोग की टीम को राष्ट्रीय ध्वज (तिरंगा) कचरे में पड़ा मिला। यह न केवल राष्ट्र के गौरव का अपमान है, बल्कि विद्यार्थियों के मन में देशभक्ति की भावना को कुचलने जैसा कृत्य है। क्या एक सरकारी संस्थान में ऐसा होना लापरवाही है या जानबूझकर की गई अनदेखी?

वॉर्डन गायब, कोई जवाबदेही नहीं

निरीक्षण के समय वॉर्डन यशवंती महोबे अनुपस्थित थीं। खास बात यह रही कि उनका कोई अवकाश आवेदन भी नहीं मिला। ऐसे में यह सवाल उठना लाज़मी है कि क्या वॉर्डन को इस निरीक्षण की पहले से जानकारी थी? या वे जानबूझकर अनुपस्थित रहीं ताकि जवाबदेही से बच सकें?

लैब की जगह स्टोर रूम – स्कूल की हकीकत

निरीक्षण के दौरान आयोग की टीम ने पास के उच्चतर माध्यमिक विद्यालय का भी निरीक्षण किया। वहां पर लैब की जगह स्टोर रूम पाया गया। यह दिखाता है कि शिक्षा के नाम पर सिर्फ ढांचे खड़े हैं, लेकिन बुनियादी सुविधाएं अब भी नदारद हैं।

बाल सुरक्षा आयोग ने जताई कड़ी आपत्ति

राज्य बाल संरक्षण आयोग की सदस्य डॉ. निवेदिता शर्मा ने साफ कहा कि, "यह पूरा मामला शिक्षा और संरक्षण की आड़ में अनुशासनहीनता और धार्मिक हस्तक्षेप का प्रतीक है।" वहीं आयोग के सदस्य ओंकार सिंह ने कहा कि “छात्रावास एक कम पढ़े-लिखे प्यून के भरोसे चल रहा था। यह गंभीर लापरवाही है और वॉर्डन की भूमिका की गहराई से जांच होनी चाहिए।”

आयोग की सिफारिशें और आगे की कार्यवाही

राज्य बाल आयोग ने पूरे मामले की तत्काल जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की सिफारिश की है। उन्होंने संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को आदेश दिए हैं कि वे छात्राओं की सुरक्षा, भोजन, धार्मिक स्वतंत्रता और शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित करें।

 बच्चों के अधिकारों पर न हो राजनीति

यह मामला सिर्फ एक छात्रावास का नहीं, बल्कि हमारे शिक्षा और सामाजिक तंत्र की गहराई से जांच का दर्पण है। जब छात्राएं पूजा नहीं कर पाने की शिकायत करती हैं, धार्मिक साहित्य कक्षों से मिलता है, और तिरंगा कचरे में फेंका जाता है—तो सवाल उठता है कि क्या हम भविष्य की पीढ़ी को सही दिशा दे पा रहे हैं?


Share:

ब्लैक टाइगर