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चिकली पंचायत में 'बड़ा खेल': रेत पर 35% GST और निजी खाते में भुगतान से मचा हड़कंप!

2025-09-13  Editor Shubham Jain  415 views

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शुभम् जैन ग्यारसपुर, विदिशा: मध्य प्रदेश के विदिशा जिले की ग्यारसपुर जनपद पंचायत के अंतर्गत आने वाली चिकली पंचायत में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने सरकारी व्यवस्था और वित्तीय पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां पंचायत ने रेत खरीद के नाम पर न केवल नियमों को ताक पर रखा, बल्कि केंद्र सरकार के GST कानून की भी सरेआम धज्जियां उड़ा दीं। यह पूरा मामला वित्तीय अनियमितताओं और मनमानी का एक जीता-जागता उदाहरण बन गया है, जिसने पंचायत के कामकाज पर गहरा संदेह पैदा कर दिया है।

नियमों की 'धज्जियां': 35% GST और व्यक्तिगत खाते में भुगतान

पूरे मामले की जड़ 'विश्वकर्मा बिल्डिंग मटेरियल सप्लायर' नामक फर्म से जुड़ी है। इस फर्म के एक बिल में रेत पर 35% GST लगाया गया, जबकि केंद्र सरकार के नियमों के अनुसार, रेत जैसी निर्माण सामग्री पर केवल 5% GST ही तय है। यह सीधी-सीधी 30% की अतिरिक्त वसूली है, जो नियमों का खुला उल्लंघन है। यह न केवल एक बड़ी गलती है, बल्कि यह भी संदेह पैदा करता है कि क्या यह जानबूझकर किया गया ताकि किसी तरह के वित्तीय लेनदेन को छुपाया जा सके।ImgResizer_20250913_1135_35751
 

मामले को और भी चौंकाने वाला बनाने वाली बात यह है कि इस फर्म का भुगतान, जिसे एक व्यावसायिक फर्म के खाते में जाना चाहिए था, उसे सीधे फर्म के मालिक नंदकिशोर विश्वकर्मा के व्यक्तिगत खाते में भेजा गया। सरकारी नियमों के अनुसार, किसी भी व्यावसायिक लेन-देन का भुगतान सीधे फर्म के बैंक खाते में ही किया जाना चाहिए ताकि पारदर्शिता बनी रहे और लेनदेन का सही रिकॉर्ड रखा जा सके। व्यक्तिगत खाते में भुगतान करना वित्तीय नियमों की गंभीर लापरवाही है और यह इस बात का स्पष्ट संकेत है कि यहां नियमों का पालन करने के बजाय उन्हें तोड़ने में ही सुविधा देखी जा रही है।

क्या यह सिर्फ एक गलती है या बड़े घोटाले का हिस्सा?

इस घटना ने चिकली पंचायत की कार्यप्रणाली पर गहरा संदेह पैदा कर दिया है। कई सवाल खड़े हो गए हैं, जिनका जवाब मिलना बेहद जरूरी है:

 * क्या पंचायत के अधिकारियों को GST के नियमों की जानकारी नहीं है, या फिर वे जानबूझकर इन्हें नजरअंदाज कर रहे हैं?

 * रेत पर 35% GST क्यों काटा गया और वह अतिरिक्त पैसा कहां गया?

 * फर्म के व्यावसायिक खाते के बजाय मालिक के निजी खाते में भुगतान क्यों किया गया?

स्थानीय लोगों और विशेषज्ञों का मानना है कि इस मामले की तुरंत जांच होनी चाहिए। इस तरह की वित्तीय लापरवाही और मनमानी से सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचता है और यह जनता के पैसे का सीधा-सीधा दुरुपयोग है। यह सिर्फ चिकली पंचायत का मामला नहीं है, बल्कि यह पूरे सिस्टम की कमजोरी को उजागर करता है, जहां बिना किसी रोक-टोक के इस तरह की अनियमितताएं चल रही हैं। इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि निचले स्तर पर भ्रष्टाचार और नियमों की अनदेखी कितनी आम हो गई है।

प्रशासन पर टिकी निगाहें: क्या होगी कार्रवाई?

यह मामला अब प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। अगर समय रहते अधिकारियों ने कार्रवाई नहीं की तो यह न केवल जनता के विश्वास को तोड़ेगा, बल्कि अन्य पंचायतों को भी ऐसा ही करने के लिए प्रोत्साहित करेगा। यह मामला सिर्फ एक बिल से जुड़ा नहीं है, बल्कि यह पारदर्शिता, जवाबदेही और जनता के पैसे के सही इस्तेमाल से जुड़ा है। देखना यह है कि प्रशासन इस मामले पर क्या कार्रवाई करता है और क्या दोषियों को सजा मिलेगी?


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