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बौद्ध धम्म सम्मेलन: आखिर क्यों हिंदू देवी-देवताओं की पूजा नहीं करने की दिलाई शपथ

2025-06-10  Editor Shubham Jain  1,070 views

 

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ग्वालियर, मध्य प्रदेश: ग्वालियर के भितरवार स्थित धाकड़ खिरिया में हाल ही में संपन्न हुए तीन दिवसीय बौद्ध धम्म सम्मेलन ने पूरे देश में हलचल मचा दी है. इस सम्मेलन से जुड़ा एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें लोगों को हिंदू देवी-देवताओं की पूजा न करने और उन्हें ईश्वर न मानने की शपथ दिलाई जा रही है. यह वीडियो सामने आने के बाद से ही धार्मिक और सामाजिक हल्कों में तीखी बहस छिड़ गई है.

आखिर क्या है इस वायरल शपथ का सच?

वायरल वीडियो में दिलाई जा रही शपथ के बोल चौंकाने वाले हैं. इसमें कहा जा रहा है कि, “मैं ब्रह्मा, विष्णु और महेश को कभी ईश्वर नहीं मानूंगा, न मैं इनकी पूजा करूंगा. मैं राम और कृष्ण को ईश्वर नहीं मानूंगा और उनकी पूजा कभी नहीं करूंगा. मैं गौरी, गणपति आदि हिंदू धर्म के किसी भी देवी-देवताओं को नहीं मानूंगा और पूजा नहीं करूंगा.”

यह शपथ यहीं नहीं रुकती, इसमें आगे कहा गया है, “मैं, ईश्वर ने अवतार लिया है, इस पर विश्वास नहीं करूंगा. मैं ऐसा कभी नहीं मानूंगा कि भगवान बुद्ध विष्णु के अवतार हैं. ऐसे प्रचार को मैं पागलपन और झूठा प्रचार मानता हूं. मैं कभी श्राद्ध नहीं करूंगा और ना ही पिंडदान करूंगा. मैं बौद्ध धर्म के विरुद्ध कोई भी कार्य नहीं करूंगा. मैं कोई भी क्रिया कर्म ब्राह्मणों के हाथ से नहीं कराऊंगा.”

यह शपथ सीधे तौर पर हिंदू धर्म की मान्यताओं और देवी-देवताओं का खंडन करती दिख रही है, जिसने बड़े पैमाने पर लोगों को अचंभित किया है.

किसने किया आयोजन और कौन था मुख्य धम्मोपदेशक?

यह तीन दिवसीय बौद्ध धम्म सम्मेलन 96 गांव जाटव समाज सुधार समिति द्वारा 6 से 8 जून तक धाकड़ खिरिया में आयोजित किया गया था. इस आयोजन के मुख्य धम्मोपदेशक भदंत शाक्यपुत्र सागर महाथेरो (अध्यक्ष, द बुद्ध भूमि धम्मदूत संघ भोपाल) थे, जिन्होंने लोगों को यह शपथ दिलाई. भदंत शाक्यपुत्र सागर महाथेरो बौद्ध धर्म के जाने-माने प्रचारक हैं और उनके अनुयायी देशभर में फैले हुए हैं.

आयोजकों का दावा: “हमारा उद्देश्य किसी धर्म का अनादर करना नहीं”

हालांकि, इस विवाद के बाद 96 गांव जाटव सुधार समिति के अध्यक्ष रूपेंद्र वर्मा ने अपनी सफाई पेश की है. उन्होंने कहा कि, “आयोजन का उद्देश्य समाज की कुरीतियों को दूर करना था. सोशल मीडिया पर फैल रही डेढ़ लाख लोगों के धर्म परिवर्तन की खबर गलत है. सम्मेलन का उद्देश्य किसी धर्म का अनादर करना नहीं था और समिति इस तरह की गतिविधियों से सहमत नहीं है.”

वर्मा के इस बयान से यह स्पष्ट नहीं हो पाता कि यदि उनका उद्देश्य किसी धर्म का अनादर करना नहीं था, तो फिर इस तरह की शपथ क्यों दिलाई गई? यह बयान विवाद को कम करने की कोशिश तो करता है, लेकिन सवालों के घेरे में अभी भी है.

पुलिस का रुख: “शिकायत मिलने पर होगी कार्रवाई”

इस मामले में अभी तक किसी भी पक्ष ने पुलिस में शिकायत दर्ज नहीं कराई है. एसडीओपी जितेंद्र नगाइच का कहना है कि, "इस मामले में किसी प्रकार की कोई अभी शिकायत नहीं आई है. शिकायत मिलने पर कार्रवाई की जाएगी." पुलिस की निष्क्रियता पर भी सवाल उठ रहे हैं कि क्या ऐसे संवेदनशील मामले में स्वसंज्ञान से कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए?

विवाद के मायने: सामाजिक सुधार या धार्मिक विद्वेष?

यह घटना सिर्फ एक वीडियो या एक शपथ तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके गहरे सामाजिक और धार्मिक निहितार्थ हैं. एक तरफ, कुछ लोग इसे दलित समुदाय द्वारा अपनी पहचान और आत्म-सम्मान की तलाश में उठाया गया कदम मान रहे हैं, जो हिंदू धर्म में व्याप्त जातिगत भेदभाव से मुक्ति पाना चाहते हैं. बौद्ध धर्म, जिसमें जातिवाद का कोई स्थान नहीं है, उन्हें एक वैकल्पिक मार्ग प्रदान करता है.

दूसरी ओर, हिंदू संगठनों और धर्मगुरुओं का आरोप है कि यह धार्मिक भावनाओं को आहत करने और समाज में विद्वेष फैलाने का जानबूझकर किया गया प्रयास है. उनका मानना है कि इस तरह की शपथें धार्मिक सहिष्णुता के खिलाफ हैं और सामाजिक सद्भाव को बिगाड़ सकती हैं.

आगे क्या?

इस मामले में अभी कई परतें खुलनी बाकी हैं. क्या आयोजकों के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई होगी? क्या यह घटना दलित समुदाय में बौद्ध धर्म अपनाने की प्रवृत्ति को और बढ़ाएगी? या फिर यह एक क्षणिक विवाद बनकर रह जाएगा? इन सभी सवालों के जवाब आने वाले समय में ही मिलेंगे.

यह घटना हमें धार्मिक स्वतंत्रता, सामाजिक सुधार और धार्मिक सहिष्णुता के बीच के नाजुक संतुलन पर सोचने पर मजबूर करती है. भारत जैसे बहुधार्मिक देश में, जहां विभिन्न आस्थाएं सह-अस्तित्व में हैं, ऐसे मुद्दों को संवेदनशीलता और सावधानी से निपटाना अत्यंत आवश्यक है.

आपकी क्या राय है?

यह विवादित घटना आपको क्या सोचने पर मजबूर करती है? क्या यह सामाजिक सुधार की पहल है या धार्मिक विद्वेष फैलाने का प्रयास? अपनी राय हमें कमेंट सेक्शन में बताएं!


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