VIDISHA BHARTI

collapse
...
Home / Politics/राजनीति / बदहाली की पाठशाला: शौचालय में शराब की बोतलें, बच्चे खुले में शौच को मजबूर!

बदहाली की पाठशाला: शौचालय में शराब की बोतलें, बच्चे खुले में शौच को मजबूर!

2025-12-14  Editor Shubham Jain  383 views

ImgResizer_20251214_1627_54714

ग्यारसपुर तहसील के ग्राम पीपलखेड़ी स्थित एकीकृत प्राथमिक शाला की डरावनी तस्वीर, जहाँ गंदगी का है साम्राज्य और बच्चों का स्वास्थ्य दांव पर है।

ग्यारसपुर शुभम् जैन। क्या यही है शिक्षा का मंदिर? एकीकृत प्राथमिक शाला पीपलखेड़ी की स्थिति देखकर यह सवाल मन में उठना लाजिमी है। स्कूल परिसर में कदम रखते ही चारों ओर गंदगी का अंबार दिखाई देता है, लेकिन इससे भी भयावह है यहाँ के शौचालयों का हाल। वर्षों से सफाई और देखरेख के अभाव में शौचालय पूरी तरह से जर्जर और अनुपयोगी हो चुके हैं।

 

अनुपयोगी शौचालय, मासूमों की मजबूरी

बच्चों के लिए बने ये शौचालय आज सिर्फ कूड़ेदान बनकर रह गए हैं। गेटों की चद्दरें उखड़ चुकी हैं, कुंडियां टूटी हैं, और परिसर में कचरे के ढेर जमा हैं। तीसरी कक्षा के बच्चों ने दर्द बयाँ करते हुए बताया कि "शौचालय की सफाई सिर्फ 26 जनवरी को हुई थी, उसके बाद कभी नहीं।" इस बदहाली का नतीजा यह है कि छोटे-छोटे बच्चे खुले में शौच करने को विवश हैं, जो उनके स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर खतरा है।

 

 बालिका शौचालय में मिली 'शराब की बोतल'!

स्कूल की सुरक्षा व्यवस्था पर सबसे बड़ा सवाल तब खड़ा हुआ जब निरीक्षण के दौरान बालिका शौचालय के अंदर शराब का क्वार्टर (बोतल) पड़ा मिला। एक सरकारी शिक्षण संस्थान के भीतर इस तरह की वस्तु का मिलना स्कूल प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन की घोर लापरवाही को दर्शाता है। क्या रात के समय यह परिसर असामाजिक तत्वों का अड्डा बन जाता है?

 

 सिर्फ एक शिक्षक और तीन बच्चे

स्कूल में दो शिक्षक पदस्थ हैं—गोपाल सिंह रघुवंशी और मनीष शर्मा। लेकिन निरीक्षण के दौरान मौके पर सिर्फ एक शिक्षक मनीष शर्मा और केवल तीन बच्चे ही उपस्थित मिले! दूसरे शिक्षक गोपाल सिंह रघुवंशी को अटारी खेड़ा जन शिक्षण केंद्र में जन शिक्षक के पद पर तैनात किया गया है। बच्चों की कम उपस्थिति और शिक्षकों की गैर-मौजूदगी भी शिक्षा की गुणवत्ता पर प्रश्नचिन्ह लगाती है।

 

 पुताई का पैसा निकला, काम नहीं हुआ

स्कूल भवन की रंगाई-पुताई के लिए राशि निकाले जाने के बावजूद आज तक भवन को पुताया नहीं गया है। इस गंभीर मामले पर जब बीआरसी (ब्लॉक रिसोर्स कोऑर्डिनेटर) ज्ञान सिंह अहिरवार से संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा, “हमारे स्तर से स्कूल के लिए राशि जारी की जा चुकी है। यदि पुताई-सफाई नहीं हुई है तो मामले की जांच कराकर संबंधितों पर उचित कार्रवाई की जाएगी।”

बच्चों के भविष्य से जुड़ी इस लापरवाही पर प्रशासन कब सख्त कदम उठाता है, यह देखना बाकी है।


Share:

ब्लैक टाइगर