
भोपाल: संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागरजी महामुनिराज के परम प्रभावी शिष्य, भावनायोग शंका समाधान प्रवर्तक मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज और मुनि श्री संधान सागर महाराज ससंघ के पावन सान्निध्य में, राजधानी भोपाल में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और आध्यात्मिक आयोजन होने जा रहा है। 21 अक्टूबर मंगलवार को, अवधपुरी स्थित विद्याप्रमाण गुरुकुलम् के विशाल प्रांगण में 1008 भगवान महावीर स्वामी का निर्वाण कल्याणक महोत्सव बड़े उल्लास और श्रद्धा के साथ मनाया जाएगा। प्रातः 9 बजे सामूहिक रूप से निर्वाण लाड़ू चढ़ाकर इस पवित्र दिवस को यादगार बनाया जाएगा।
चातुर्मास निष्ठापन और मुनि श्री का प्रेरणादायी संदेश
यह दिवस इसलिए भी विशेष है क्योंकि इसी के साथ मुनिसंघ के इस वर्ष के चातुर्मास का भी निष्ठापन हो जाएगा। इस अवसर पर धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज ने जीवन की एक अत्यंत मार्मिक और गहन सत्यता को उजागर किया। उन्होंने कहा, “मेरा यदि कर्तव्य के साथ जुड़ता है, तो जीवन उच्चता को प्राप्त होता है, वहीं 'मेरा' यदि अहंकार के साथ जुड़ता है तो जीवन तहस-नहस हो जाता है।”
मुनिश्री ने स्पष्ट किया कि जिस मनुष्य के मन में यह बोध जाग्रत हो जाता है कि जगत का एक परमाणु भी उसका नहीं है, वह अपने घर-परिवार में सहज ही प्रेम और सद्भाव स्थापित करता है। उसके जीवन से दोष और दुर्बलताएँ दूर हो जाती हैं और उसके संबंध सभी से मधुर बने रहते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि कर्तव्य की भावना से किया गया कोई भी कार्य, चाहे वह कार्यालय में हो या घर में, समस्याओं का हल निकालता है और व्यक्ति को प्रशंसा का पात्र बनाता है।
"मेरा-तेरा" की भावना से उपजा विनाश
मुनिश्री ने वर्तमान पारिवारिक विवादों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज पति-पत्नी के बीच भी "मेरा-तेरा" की भावना इतनी हावी हो गई है कि स्थिति भयावह होकर तलाक तक पहुंच जाती है। उन्होंने कहा, “एक होकर के भी यदि भाव एक नहीं हो रहे हैं, तो जीवन तो तहस-नहस होना ही है।”
उन्होंने मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम और भरत के आदर्श संबंध का उदाहरण दिया। मंथरा ने कैकेयी के कान भरकर "मेरा-तेरा" का भाव जगाया, यह कहकर कि 'भरत तेरा पुत्र है, राम तेरा नहीं।' मंथरा की बातों में आकर कैकेयी के मन में विभाजन की दीवार खड़ी हो गई। किंतु, श्रीराम और भरत के मन में कोई भेद नहीं था। राम के वन जाने पर भी, भरत ने राजगद्दी पर बैठने से इनकार कर दिया और राम की खड़ाऊँ रखकर नंदीग्राम में एक साधक की तरह रहे। यह भाईचारे का वह आदर्श है, जिसकी प्रेरणा लेने से सभी पारिवारिक विवाद समाप्त हो सकते हैं।
मुनि श्री ने हास्य व्यंग्य करते हुए कहा कि आजकल तो पति-पत्नी एक-दूसरे से मोबाइल के पासवर्ड भी छिपाते हैं। यह 'डिवाइडेशन' (विभाजन) की दीवारें "मेरा-तेरा" का दुष्परिणाम हैं, जिससे समर्पण की भावना समाप्त हो गई है और हमारे जीवन का सौंदर्य तहस-नहस हो रहा है।
आगामी मंगल विहार और महत्वपूर्ण कार्यक्रम
प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया कि मुनिसंघ का चातुर्मास निष्ठापन के बाद आगामी कार्यक्रम निर्धारित हैं।
* 7-9 नवंबर (भोपाल): विद्याप्रमाण गुरुकुलम् में तीन दिवसीय अंतिम विशेष कार्यक्रम होंगे:
* 7 नवंबर (शुक्रवार): विद्याप्रमाण गुरुकुलम् का शिलान्यास समारोह।
* 8 नवंबर (शनिवार): गुणायतन का राष्ट्रीय अधिवेशन, जिसमें देश-विदेश के सदस्य भाग लेंगे।
* 9 नवंबर (रविवार): मुनिसंघ का पिच्छिका परिवर्तन समारोह संपन्न होगा।
* मंगल विहार: पिच्छिका परिवर्तन के पश्चात मुनिसंघ का मंगल विहार सागर जिले के राहतगढ़ की ओर हो सकता है।
* 27 नवंबर - 2 दिसंबर: सागर जिले के राहतगढ़ में चतुर्थ नवीन जिनालय के जिन बिंबों का पंचकल्याणक मुनिसंघ के सान्निध्य में होगा।
* जनवरी माह: मुनिसंघ द्वारा भिण्डर (राजस्थान) के पंचकल्याणक हेतु स्वीकृति दी जा चुकी है।
भोपाल और आसपास के सभी महानुभावों से इन विशेष कार्यक्रमों में भाग लेकर पुण्य अर्जित करने का आह्वान किया गया है।