
सिंगरौली। मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले में प्रशासनिक अमला अब गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ 'फुल एक्शन मोड' में नजर आ रहा है। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) ने कर्तव्य में लापरवाही बरतने और भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते एक पंचायत सचिव को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है, वहीं धान चोरी के मामले में घिरे एक ग्राम रोजगार सहायक (GRS) को जनपद पंचायत कार्यालय अटैच कर दिया गया है।
केस 1: PMAY सर्वे के नाम पर वसूले 500-500 रुपये, सचिव सुमन्त दुबे सस्पेंड
जनपद पंचायत बैढ़न के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत रौहाल के सचिव सुमन्त दुबे पर गाज गिरी है। उन पर आरोप है कि उन्होंने 'प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण 2.0' के सर्वे के दौरान हितग्राहियों से अनुचित लाभ लेने की कोशिश की।
क्या था मामला: जांच में पाया गया कि सचिव ने ग्राम पंचायत लंघाडोल के निवासी रोकाईया खातून, तबरेज खान और इन्द्रीस खान से 26 और 27 दिसंबर 2025 को 500-500 रुपये अपने खाते में डलवाए थे।
लापरवाही की हद: सचिव महोदय ने 15 से 22 जनवरी तक अपना मोबाइल बंद रखा और महत्वपूर्ण सेक्टर बैठक से भी नदारद रहे।
कार्रवाई: मध्य प्रदेश पंचायत सेवा नियम 2011 के तहत, CEO जिला पंचायत ने इसे गंभीर कदाचरण मानते हुए 5 फरवरी 2026 को उन्हें निलंबित कर दिया।
केस 2: धान चोरी के वीडियो ने फंसाया, रोजगार सहायक का मानदेय आधा
दूसरी बड़ी कार्रवाई ग्राम पंचायत उर्ती के ग्राम रोजगार सहायक देवदत्त जायसवाल पर हुई है। उन पर सेवा सहकारी समिति से धान चोरी कराने का गंभीर आरोप है।
वायरल वीडियो का सच: शिकायतकर्ता मनोज कुमार वैष्य ने कलेक्टर गौरव बैनल को साक्ष्य सौंपे थे, जिसमें 94 बोरी धान चोरी होने का वीडियो वायरल हुआ था। इस चोरी में रोजगार सहायक की संलिप्तता की बात सामने आई थी।
पक्ष रखने में रहे नाकाम: प्रशासन द्वारा कारण बताओ नोटिस जारी किए जाने के बाद भी देवदत्त जायसवाल संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए।
कार्रवाई: राज्य रोजगार गारंटी परिषद के मार्गदर्शिका नियमों के तहत, उन्हें तत्काल प्रभाव से ग्राम पंचायत से हटाकर जनपद पंचायत बैढ़न में अटैच कर दिया गया है। आगामी आदेश तक उन्हें केवल 50% मानदेय ही दिया जाएगा।
प्रशासन की चेतावनी: भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं
सिंगरौली जिला प्रशासन की इस दोहरी कार्रवाई से सरकारी महकमों में हड़कंप मच गया है। कलेक्टर और जिला पंचायत CEO ने स्पष्ट कर दिया है कि जनहित की योजनाओं में वसूली या सरकारी संपत्ति के नुकसान में शामिल किसी भी कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा।