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भोपाल पुलिस में हड़कंप: खाकी पर लगा 'काले कारोबार' का दाग

2026-04-04  Editor Shubham Jain  45 views

ImgResizer_1775304777683भोपाल। राजधानी के नजीराबाद थाने से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने पुलिस महकमे की साख पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। न्याय और कानून की रक्षा करने वाली 'खाकी' पर गांजा तस्करों से सांठगांठ करने और मोटी घूस लेकर उन्हें आजाद करने का गंभीर आरोप लगा है। इस मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए थाना प्रभारी अरुण शर्मा को तत्काल प्रभाव से लाइन अटैच कर दिया गया है, वहीं एक आरक्षक पर भी गाज गिरी है।

क्या है पूरा मामला?

घटना की शुरुआत 30 मार्च 2026 को हुई थी। जानकारी के अनुसार, नजीराबाद पुलिस के आरक्षक मनोज धाकड़ ने दो संदिग्धों— सीताराम यादव उर्फ राधे यादव और जितेन्द्र यादव को घेराबंदी कर पकड़ा था। तलाशी के दौरान इनके पास से 430 ग्राम अवैध गांजा बरामद किया गया था। नियमानुसार इन पर एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज होना चाहिए था, लेकिन थाने पहुँचते ही 'खाकी' का ईमान डोल गया।

1.70 लाख में हुआ 'ईमान' का सौदा

सूत्रों का दावा है कि पकड़े गए तस्करों को जेल भेजने के बजाय उन्हें छोड़ने के लिए थाने के अंदर ही सौदेबाजी शुरू हो गई। आरोप है कि तस्करों को बिना किसी कानूनी कार्रवाई के रिहा करने के बदले 1.70 लाख रुपये की भारी-भरकम रिश्वत मांगी गई। डील पक्की हुई, रकम का भुगतान हुआ और रसूख व पैसे के दम पर तस्कर थाने के मुख्य दरवाजे से शान से बाहर निकल गए। इस पूरे खेल में आरक्षक मनोज धाकड़ की भूमिका एक 'बिचौलिये' (सेटिंगबाज) के रूप में सामने आई है।

SDOP की जांच में खुला राज

पुलिस की इस मिलीभगत की खबर जैसे ही उच्च अधिकारियों तक पहुँची, विभाग में खलबली मच गई। एसडीओपी (SDOP) वैशाली करहालिया ने मामले की गंभीरता को देखते हुए फौरन गोपनीय जांच शुरू की। जांच में पाया गया कि नजीराबाद पुलिस ने गांजा तस्करों को पकड़ा तो था, लेकिन रिकॉर्ड में उनकी गिरफ्तारी या जब्ती का कोई जिक्र नहीं किया गया।

जांच रिपोर्ट में भ्रष्टाचार की पुष्टि होते ही इसे पुलिस अधीक्षक (SP) को प्रेषित किया गया, जिसके बाद कड़ा एक्शन लिया गया है।

थाना प्रभारी लाइन अटैच, विभागीय जांच शुरू

भोपाल पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने अनुशासनहीनता और भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए थाना प्रभारी अरुण शर्मा को लाइन हाजिर कर दिया है। इसके साथ ही आरक्षक मनोज धाकड़ और थाना प्रभारी के खिलाफ विभागीय जांच (DE) खोल दी गई है।

अहम सवाल:

इस घटना ने यह साबित कर दिया है कि अपराध को रोकने वाली पुलिस के कुछ नुमाइंदे ही अपराधियों के मददगार बने हुए हैं। 430 ग्राम गांजा भले ही कम मात्रा हो, लेकिन जिस तरह से कानून की धज्जियां उड़ाकर सौदा किया गया, उसने भोपाल पुलिस की छवि को गहरा धक्का पहुँचाया है।


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