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भोपाल पुलिस में हड़कंप: 'अगर न्याय नहीं मिला तो इसे ही सुसाइड नोट समझें', ASI ने SP पर लगाए गाली-गलौज के गंभीर आरोप

2026-02-03  Editor Shubham Jain  321 views

ImgResizer_1770096114202भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के देहात पुलिस महकमे से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने विभाग की कार्यप्रणाली और सीनियर अफसरों के व्यवहार पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सुखी सेवनिया थाने में पदस्थ ASI केसी यादव ने देहात SP रामशरण प्रजापति पर सरेआम बेइज्जती करने और अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने के आरोप लगाए हैं। मामला इतना बढ़ गया है कि ASI ने यहाँ तक कह दिया कि यदि उन्हें न्याय नहीं मिला, तो उनकी इस शिकायत को ही 'सुसाइड नोट' मान लिया जाए।

मीटिंग के दौरान क्या हुआ? (पूरी घटना)

घटना 14 सितंबर 2025 की बताई जा रही है। शिकायत के अनुसार, SP प्रजापति ने आबकारी एक्ट से जुड़ी अपराध फाइलें तलब की थीं। ASI केसी यादव का आरोप है कि मीटिंग खत्म होने के बाद जब उन्होंने हाईकोर्ट भेजने के लिए केस डायरी वापस मांगी, तो SP अचानक आगबबूला हो गए।

ASI का दावा है कि SP ने उन्हें सबके सामने अपशब्द कहे और गालियां दीं। इतना ही नहीं, विरोध करने पर उन्हें धक्के देकर बाहर निकालने की धमकी तक दी गई। पीड़ित अधिकारी ने बताया कि डायरी देने के बजाय उन्हें SDOP मंजू चौहान से संपर्क करने को कहा गया।

‘30 साल की नौकरी में पहली बार मिला ऐसा जख्म’

ASI यादव ने अपनी लिखित शिकायत में भावुक होते हुए लिखा कि उन्होंने विभाग को 30 साल दिए हैं, लेकिन आज तक उनके साथ ऐसा दुर्व्यवहार नहीं हुआ। उन्होंने बताया कि इस घटना से वे इतने व्यथित और अपमानित महसूस कर रहे थे कि उन्होंने आत्महत्या तक का मन बना लिया था। हालांकि, सहकर्मियों की समझाइश और पारिवारिक जिम्मेदारियों के चलते उन्होंने खुद को संभाला और अब न्याय की गुहार लगाई है।

बड़े अधिकारियों और मानवाधिकार आयोग तक पहुंची जंग

ASI यादव ने हार नहीं मानी है। उन्होंने थाने के रोजनामचे में पूरी घटना दर्ज कराने के बाद इसकी लिखित शिकायत आईजी (IG) से लेकर मानवाधिकार आयुक्त तक को भेज दी है। विभाग के भीतर एक अधीनस्थ कर्मचारी द्वारा अपने ही कप्तान के खिलाफ इस तरह का मोर्चा खोलना चर्चा का विषय बना हुआ है।

क्या SP की कार्यशैली से अन्य अधिकारी भी हैं परेशान?

सूत्रों और शिकायत के हवाले से यह भी खबर आ रही है कि यह कोई पहला मामला नहीं है। चर्चा है कि पिछले 4 महीनों से कई कर्मचारी मानसिक रूप से प्रताड़ित महसूस कर रहे हैं।

 बताया जा रहा है कि एक महिला अधिकारी भी SP के व्यवहार से परेशान हैं।

  करीब 2 महीने पहले ईंटखेड़ी थाना प्रभारी (TI) के साथ भी विवाद की खबरें सामने आई थीं।

अब देखना यह होगा कि पुलिस मुख्यालय इस मामले में क्या कदम उठाता है। क्या एक छोटे पद पर तैनात पुलिसकर्मी को उसके स्वाभिमान की लड़ाई में न्याय मिलेगा?


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