
भोपाल: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से न्याय की एक बड़ी जीत सामने आई है। तंत्र-मंत्र और जादू-टोना का खौफ दिखाकर एक 14 साल की मासूम नाबालिग के साथ डेढ़ साल तक दरिंदगी करने वाले पाखंडी तांत्रिक निहाल बेग को कोर्ट ने अंतिम सांस तक जेल में रहने की सजा सुनाई है। विशेष न्यायाधीश कुमुदिनी पटेल की अदालत ने इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए आरोपी को उम्रकैद और 11 हजार रुपये के जुर्माने की सजा से दंडित किया है।
व्यापार में घाटे का फायदा उठाकर घर में घुसा ‘भेड़िया’
इस रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना की शुरुआत तब हुई जब पीड़िता के पिता ने 'डिजिटल एजुकेशन' का एक नया बिजनेस शुरू किया था। कारोबार में लगातार हो रहे घाटे से परेशान होकर पिता आरोपी निहाल बेग के संपर्क में आए। निहाल बेग इलाके में फल का ठेला लगाता था, लेकिन वह खुद को तंत्र-मंत्र का जानकार बताता था।
उसने परिवार को अपने विश्वास में लिया और दावा किया कि बिजनेस में रुकावट का कारण उनके ऊपर किया गया 'बधेज' और 'जादू-टोना' है। इस अंधविश्वास के जाल में फंसकर परिवार ने निहाल बेग को घर में पूजा-पाठ और तंत्र क्रिया करने की अनुमति दे दी।
'पवित्र पानी' के नाम पर की हैवानियत
7 सितंबर 2021 को हबीबगंज थाना क्षेत्र में आरोपी ने पूजा के बहाने घर के सदस्यों को बारी-बारी से अलग कमरे में ले जाना शुरू किया। जब वह 14 साल की नाबालिग को कमरे में ले गया, तो उसने तंत्र-मंत्र और खौफ का डर दिखाकर उसके साथ दुष्कर्म किया। आरोपी उसे 'तंत्र वाला पानी' पिलाता था और डराता था कि अगर किसी को बताया तो परिवार पर भारी विपत्ति आ जाएगी। यह सिलसिला करीब डेढ़ साल तक चलता रहा।
जमानत पर बाहर आकर भी नहीं रुका जुल्म
हैरानी की बात यह है कि जब मामला पुलिस तक पहुंचा और आरोपी जेल गया, तो जमानत पर बाहर आने के बाद भी उसकी फितरत नहीं बदली। उसने पीड़िता का मानसिक उत्पीड़न करने के लिए नीचता की सारी हदें पार कर दीं। आरोपी ने भोपाल की मनुआभान टेकरी पर पीड़िता का मोबाइल नंबर लिख दिया और उसके नीचे 'कॉल गर्ल' लिख दिया। इसके बाद पीड़िता को अनजान नंबरों से अश्लील कॉल आने लगे, जिसकी शिकायत पीड़िता ने दोबारा पुलिस में दर्ज कराई थी।
अदालत का ऐतिहासिक फैसला: 5 लाख का मुआवजा
अदालत ने मामले की गंभीरता और आरोपी की आपराधिक मानसिकता को देखते हुए उसे उम्रकैद की सजा सुनाई। कोर्ट ने शासन को यह आदेश भी दिया कि पीड़िता को 5 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति राशि (मुआवजा) प्रदान की जाए। न्यायाधीश ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि समाज में ऐसे पाखंडी लोगों के लिए कोई जगह नहीं है जो आस्था और मजबूरी का फायदा उठाकर मासूमों का भविष्य बर्बाद करते हैं।
यह मामला समाज के लिए एक बड़ा सबक है कि अंधविश्वास के चक्कर में पड़कर किसी भी अनजान व्यक्ति पर भरोसा करना कितना घातक हो सकता है। भोपाल पुलिस और न्यायपालिका के इस त्वरित फैसले ने पीड़ित परिवार को न्याय की उम्मीद दी है।