भोपाल। राजधानी भोपाल स्थित प्रदेश कार्यालय में रविवार (4 जनवरी, 2026) को भारतीय किसान संघ, मध्यभारत प्रांत की एक महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। इस बैठक में किसानों की सुलगती समस्याओं और संगठन की भविष्य की रणनीति पर विस्तार से मंथन किया गया। बैठक का मुख्य केंद्र गेहूं का समर्थन मूल्य रहा, जिसे लेकर संगठन ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
समर्थन मूल्य पर असंतोष: ₹2700 से कम कुछ भी मंजूर नहीं
बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि सरकार द्वारा घोषित ₹2600 प्रति क्विंटल का गेहूं समर्थन मूल्य किसानों के साथ न्याय नहीं है। संगठन के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि चुनाव के समय घोषणा पत्र में ₹2700 प्रति क्विंटल का वादा किया गया था। भारतीय किसान संघ अब इस वादे को पूरा कराने के लिए प्रदेश भर में व्यापक जन जागरण अभियान चलाएगा। यदि मांग पूरी नहीं होती है, तो संगठन ने बड़े आंदोलन की चेतावनी भी दी है।
खाद-बिजली और राजस्व की समस्याओं पर मंथन
बैठक के दौरान प्रांत की कार्यकारिणी ने पिछले तीन महीनों के कार्यक्रमों का जिलावार लेखा-जोखा (वृत्त) प्रस्तुत किया। इस दौरान जमीन से जुड़ी कई गंभीर समस्याओं पर चर्चा हुई, जिनमें शामिल हैं:
* खाद की किल्लत: रबी सीजन में खाद की उपलब्धता और वितरण में आ रही बाधाएं।
* बिजली और पानी: सिंचाई के लिए बिजली की सुचारू आपूर्ति और जल संसाधन प्रबंधन।
* मंडी और भावांतर: मंडियों में किसानों को मिलने वाली सुविधाएं और भावांतर योजना का क्रियान्वयन।
* राजस्व मामले: किसानों के लंबित राजस्व प्रकरणों का निराकरण।
आगामी कार्ययोजना: भारत माता पूजन और तहसील प्रवास
संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने के लिए आगामी समय में प्रदेश की सभी तहसीलों में सघन प्रवास कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसके साथ ही, संगठन के प्रमुख उत्सव 'भारत माता पूजन' को भी भव्य स्तर पर मनाने की योजना बनाई गई है, ताकि किसानों के भीतर राष्ट्रवाद और संगठन की विचारधारा को और अधिक प्रभावी ढंग से पहुंचाया जा सके।
वरिष्ठ पदाधिकारियों का मार्गदर्शन
बैठक में क्षेत्रीय संगठन मंत्री महेश चौधरी और प्रांत संगठन मंत्री भरत पटेल का विशेष मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। उन्होंने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे किसानों की आवाज बनकर मैदान में उतरें और गांव-गांव जाकर जन जागरण करें। बैठक में मध्यभारत प्रांत की संपूर्ण कार्यकारिणी, प्रदेश एवं अखिल भारतीय स्तर के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
बैठक का समापन 'जय बलराम' के जयघोष के साथ हुआ, जिसने कार्यकर्ताओं में नया उत्साह फूंक दिया है। अब नजरें सरकार पर टिकी हैं कि वह किसानों की इस मांग पर क्या रुख अपनाती है।