
भोपाल की शांत रात अचानक गोलियों की गूंज से थर्रा उठी। अयोध्या बायपास रोड स्थित शीतल पैराडाइज अपार्टमेंट में हुई इस फायरिंग की घटना ने न सिर्फ स्थानीय निवासियों की नींद उड़ा दी, बल्कि शहर की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं।
रात के तकरीबन तीन बजे, एक काली थार गाड़ी धड़धड़ाती हुई टनानट ढाबे के पास आकर रुकती है। गाड़ी से 3-4 युवक उतरते हैं, थोड़ी मस्ती के बाद अपार्टमेंट के भीतर घुसते हैं—और फिर जो हुआ, उसने हर किसी को हैरान कर दिया।
मंदिर के सामने गाड़ी रोकते ही युवकों ने बंदूक निकाली और खुलेआम हवा में तीन गोलियां दाग दीं। गोलियों की आवाज ने पूरे इलाके में दहशत फैला दी। लेकिन सबसे चौंकाने वाली बात ये रही—कोई रोकने वाला नहीं था, कोई सतर्क नहीं हुआ।
65 वर्षीय गार्ड गुरु प्रसाद सचान इस भयावह मंजर के चश्मदीद हैं। उन्होंने बताया कि सबकुछ इतनी तेजी से हुआ कि किसी को कुछ समझने का मौका ही नहीं मिला।
क्या अब भोपाल के रिहायशी इलाके भी सुरक्षित नहीं बचे? क्या हमारी रातें अब गोलियों की आवाज़ों में कटेंगी?
पुलिस ने मामले की रिपोर्ट दर्ज कर ली है, कुछ गिरफ्तारी भी हुई है। थार गाड़ी, 12 बोर की बंदूक और तीन खाली कारतूस बरामद किए गए हैं। लेकिन सवाल यह है—क्या ये बाद की कार्रवाई लोगों के दिलों में बैठा डर मिटा पाएगी?
शहर की नींव तब हिलती है जब लोग अपने घरों को भी असुरक्षित महसूस करने लगते हैं। क्या प्रशासन को अब भी किसी बड़ी घटना का इंतजार है?
भोपाल की जनता पूछ रही है:
क्या हमारे बच्चे अब अपार्टमेंट के खेल मैदान में सुरक्षित नहीं?
क्या हमारी माँ-बहनें छत पर खड़ी होकर चैन की सांस नहीं ले सकतीं?
क्या पुलिस की मौजूदगी सिर्फ रिपोर्ट दर्ज करने तक सीमित रह गई है?
अब वक्त है कि प्रशासन नींद से जागे—क्योंकि अगर अब नहीं चेते, तो अगली बार सिर्फ हवाई फायर नहीं होंगे।