भोपाल। राजधानी के बहुचर्चित और रोंगटे खड़े कर देने वाले 26 टन गोमांस तस्करी कांड में मुख्य आरोपी असलम कुरैशी उर्फ 'चमड़ा' को अदालत से कोई राहत नहीं मिली है। न्यायिक दण्डाधिकारी प्रथम श्रेणी जयदीप मौर्य की अदालत ने मामले की गंभीरता और साक्ष्यों को देखते हुए असलम की जमानत याचिका को सिरे से खारिज कर दिया। इस फैसले के बाद अब आरोपी को जेल की सलाखों के पीछे ही रहना होगा।
500 पन्नों की चार्जशीट में 'पाप' का कच्चा चिट्ठा
बता दें कि इस पूरे मामले की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (SIT) ने बीते 6 मार्च को कोर्ट में करीब 500 पन्नों का भारी-भरकम आरोप-पत्र (Charge Sheet) पेश किया था। जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि कैसे एक व्यवस्थित सिंडिकेट के जरिए स्लॉटर हाउस में गोवंश का अवैध कत्ल कर उनका मांस मुंबई जैसे महानगरों में सप्लाई किया जा रहा था।
17 दिसंबर की वो रात, जब खुला तस्करी का ‘कंटेनर’
यह पूरा मामला 17 दिसंबर 2025 का है, जब भोपाल के जहांगीराबाद इलाके के पास पुलिस ने एक संदिग्ध कंटेनर को रोका था। तलाशी लेने पर उसमें करीब 26 टन मांस बरामद हुआ। जब इस मांस के नमूने फॉरेंसिक लैब भेजे गए, तो रिपोर्ट में चौंकाने वाली पुष्टि हुई कि बरामद मांस गोवंश (Cow Meat) का ही है। इसके बाद पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए मुख्य आरोपी असलम कुरैशी और उसके ड्राइवर को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
अदालत में जोरदार बहस: 'निर्दोष' बनाम ‘गंभीर अपराधी’
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकील ने दलील दी कि असलम कुरैशी निर्दोष है और उसे झूठा फंसाया गया है, इसलिए उसे जमानत मिलनी चाहिए। वहीं, शासकीय अधिवक्ता ने पुरजोर विरोध करते हुए कहा:
> “यह केवल मांस की तस्करी नहीं, बल्कि सामाजिक सद्भाव को बिगाड़ने और पशु क्रूरता की पराकाष्ठा है। ऐसे अपराध में आरोपी को जमानत देना समाज के लिए गलत संदेश होगा।”
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दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और SIT द्वारा पेश किए गए दस्तावेजी सबूतों का अवलोकन करने के बाद न्यायाधीश जयदीप मौर्य ने अपराध की प्रकृति को बेहद गंभीर मानते हुए जमानत अर्जी खारिज कर दी।
जांच का दायरा और बढ़ा
भोपाल पुलिस अब इस बात की तहकीकात कर रही है कि इस तस्करी नेटवर्क के तार मुंबई के किन बड़े खरीदारों से जुड़े थे। सूत्रों की मानें तो आने वाले दिनों में कुछ और बड़े नामों पर गाज गिर सकती हैl