ग्यारसपुर: अध्यात्म और श्रद्धा की पावन त्रिवेणी, खरेरा धाम एक बार फिर भक्ति के उल्लास से सराबोर हो उठा है। रविवार को जब ग्यारसपुर तहसील के प्रसिद्ध खरेरा धाम में आयोजित होने वाले 'श्री रूद्र यज्ञ' और 'श्रीमद् भागवत कथा' के शुभारंभ पर कलश यात्रा निकली, तो नजारा देखते ही बन रहा था। हज़ारों श्रद्धालुओं की मौजूदगी और 'जय श्री राम' के उद्घोष से पूरा क्षेत्र गुंजायमान हो गया।
पुष्पवर्षा से हुआ स्वागत, दिखा श्रद्धा का सैलाब
वावना नदी के तट पर स्थित पावन खरेरा धाम, जहाँ साक्षात भगवान पशुपतिनाथ और हनुमान जी महाराज विराजमान हैं, वहाँ आयोजित इस कलश यात्रा का स्वागत पलक-पावड़े बिछाकर किया गया। यात्रा जब धामनोद, दसीपुर, गुंजारी, हैदरगढ़ और कोलुआ जैसे गांवों से गुजरी, तो ग्रामीणों ने छतों और रास्तों से पुष्पवर्षा कर भक्तों का अभिनंदन किया।
यात्रा की भव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें ट्रैक्टर-ट्रालियों, चारपहिया वाहनों और मोटरसाइकिलों का कई किलोमीटर लंबा काफिला शामिल था। सैकड़ों की संख्या में महिलाएं सिर पर मंगल कलश धारण कर मंगल गीत गाती हुई चल रही थीं।
84 गांवों की आस्था का केंद्र: खरेरा धाम
खरेरा धाम में पिछले 7 वर्षों से लगातार धार्मिक अनुष्ठानों की परंपरा चली आ रही है। इस वर्ष भी यहाँ विशाल मेले का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें आसपास के 84 गांवों के श्रद्धालु कथा श्रवण और दर्शन के लिए पहुँच रहे हैं। कलश यात्रा में महंत रामदास जी महाराज, मोहन दास जी महाराज और प्रख्यात कथा वाचक पंडित देवेंद्र भार्गव का विशेष सानिध्य प्राप्त हुआ। मुख्य यजमान भारत सिंह गुर्जर सहित अन्य अतिथियों का ग्रामीणों ने गर्मजोशी से स्वागत किया।
7 दिनों तक बहेगी भक्ति की गंगा
आयोजन समिति के अनुसार, सोमवार से आगामी रविवार तक प्रतिदिन श्री रूद्र यज्ञ एवं श्रीमद् भागवत कथा का प्रवाह होगा। कथा के माध्यम से श्रद्धालु भगवान के विविध स्वरूपों और उनकी लीलाओं का रसपान कर पुण्य लाभ अर्जित करेंगे। इस दौरान विशाल भंडारा और मेले का आकर्षण भी बना रहेगा।
व्यवस्थाओं में जुटा रहा प्रशासन और स्थानीय संगठन
इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में मंडल अध्यक्ष अजय गुर्जर, सरपंच वीरेंद्र राजपूत, निरंजन कुशवाहा, राजवीर गुर्जर, गोकुल बंसल, हैदरगढ़ सरपंच सुनील कुमार विश्वकर्मा और हैदरगढ़ पुलिस प्रशासन ने सक्रिय भूमिका निभाई। साथ ही अनिल शर्मा, भूपेंद्र किरार, माखन सिंह गुर्जर, गोविंद दास बैरागी और अन्य गणमान्य नागरिकों ने व्यवस्थाओं की कमान संभाली ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।