
बागली (देवास), मध्य प्रदेश। एक तरफ जहां मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के 14 अक्टूबर को बागली में होने वाले प्रस्तावित दौरे को लेकर प्रशासन तैयारियों में जुटा है, वहीं दूसरी ओर भारतीय किसान संघ के बैनर तले किसानों का गुस्सा सातवें आसमान पर है। सोयाबीन सहित खरीफ फसलों के भारी नुकसान और मुआवजे की लंबित मांग को लेकर किसान विगत तीन दिनों से उप-विभागीय मजिस्ट्रेट (SDM) कार्यालय बागली के बाहर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं।
आज, विरोध प्रदर्शन को एक नई और उग्र दिशा देते हुए, किसानों ने विरोध स्वरूप 'सेटेलाइट सर्वे' और 'भावतर' (सरकारी उदासीनता) की प्रतीकात्मक अर्थी निकाली। पूरे नगर में यह शव यात्रा निकाली गई, जो प्रशासन की अनदेखी और किसानों की पीड़ा को दर्शा रही थी। यह यात्रा थाना चौराहे पर समाप्त हुई, जहां प्रशासन के खिलाफ नारे लगाते हुए दोनों पुतलों का दहन किया गया। यह घटना मुख्यमंत्री के आगमन से ठीक पहले हुई है, जिसने स्थानीय प्रशासन पर भारी दबाव बढ़ा दिया है।
मुआवजे की मांग पर अड़े किसान, CM के आगमन से पहले गरमाई सियासत
भारतीय किसान संघ, देवास जिले के नेतृत्व में किसान मुख्य रूप से तीन बड़ी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं:
* खरीफ फसल नुकसानी की राहत राशि: पिछले साल खरीफ की फसल, विशेष रूप से सोयाबीन और मक्का, पीला मोजक रोग और जल भराव के कारण बुरी तरह प्रभावित हुई थी। किसानों के अनुसार, 80% से 90% रकबे में 70% से 80% तक फसलें खराब हो गई थीं। बार-बार आवेदन और निवेदन के बावजूद, इस नुकसानी की राहत राशि आज तक किसानों को नहीं दी गई है।
* फसल बीमा क्लेम का टोटा: किसानों का आरोप है कि उन्हें फसल बीमा क्लेम की राशि या तो नाम मात्र की मिली है, या कई हल्के (क्षेत्रों) में तो वह भी नहीं मिली है। प्राकृतिक आपदा के समय बीमा सुरक्षा का लाभ न मिलना किसानों के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है।
* समर्थन मूल्य पर खरीदी और उचित 'भावतर': उचित समर्थन मूल्य पर खरीदी और बाजार में फसल का सही मूल्य न मिलने (भावतर) को लेकर भी किसानों में गहरा रोष है, जिसका प्रतीकात्मक प्रदर्शन उन्होंने 'भावतर' की अर्थी जलाकर किया।
प्रशासन की 'जीरो टॉलरेंस' नीति पर सवाल
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि किसानों के इस तीन दिवसीय अनिश्चितकालीन धरने और आज के बड़े विरोध प्रदर्शन के बावजूद, प्रशासन का कोई भी जिम्मेदार अधिकारी किसानों से बात करने या उनकी सुध लेने के लिए नहीं पहुंचा। प्रशासन की यह पूर्ण उदासीनता किसानों के गुस्से को और भड़का रही है।
किसान संघ ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती और उन्हें लंबित राहत राशि एवं बीमा क्लेम नहीं दिया जाता, तब तक उनका यह अनिश्चितकालीन धरना जारी रहेगा। मुख्यमंत्री मोहन यादव के बागली दौरे के मद्देनजर, किसानों के इस उग्र विरोध ने स्थानीय राजनीति को गरमा दिया है। अब देखना यह होगा कि मुख्यमंत्री के दौरे से पहले किसानों के इस आक्रोश को शांत करने के लिए प्रशासन और सरकार क्या कदम उठाती है।